‘‘मैं कभी किसी को नहीं डांटता, गुस्सा भी नहीं होता….बस कश्मीर के सवाल पर हो जाता हूं’’ :शाह

नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस सांसद सुदीप बंदोपाध्याय की एक टिप्पणी पर कहा कि वह कभी किसी को नहीं डांटते और न ही गुस्सा होते हैं लेकिन कश्मीर का सवाल आता है तो गुस्सा आ जाता है. सदन में ‘दंड प्रक्रिया (शिनाख्त) विधेयक, 2022’ को चर्चा एवं पारित करने के लिए रखते हुए शाह ने कहा कि सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक ‘मॉडल कारागार मैनुअल’ बना रही है जिसे राज्यों को भेजा जाएगा.

जब तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत राय ने कहा कि इस तरह के किसी मैनुअल का मसौदा उन्होंने नहीं देखा है तो शाह ने कहा, ‘‘नहीं देख्रेंगे, क्योंकि आप सरकार में नहीं हैं. सरकार अभी बना रही है. आप सरकार में होते तो जरूर देखते. मैं आपको अग्रिम रूप से आश्चस्त करने के लिए यह बात कह रहा हूं.’’ इस पर सदन में तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंदोपाध्याय कहते सुने गये कि ‘‘आप जब दादा (सौगत राय) को बोलते हैं तो डांटकर बोलते हैं’’.

इसके जवाब में शाह ने मुस्कराते हुए कहा, ‘‘नहीं, नहीं….मैं कभी किसी को नहीं डांटता हूं. मेरी आवाज जरा ऊंची हैं. यह मेरा ‘मैन्यूफेक्चंिरग डिफेक्ट’ है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘न मैं कभी किसी को डांटता हूं और न कभी गुस्सा होता हूं. कश्मीर का सवाल आ जाता है तो (गुस्सा) हो जाता हूं, बाकी नहीं होता.’’ इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य हंस पड़े.

नया ‘मॉडल जेल मैनुअल’ बना रही है सरकार : अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि केंद्र सरकार एक नया ‘मॉडल जेल मैनुअल’ बना रही है जिसमें कैदियों के पुनर्वास, महिला कैदियों के लिए अलग जेल और खुली जेल समेत अनेक ंिबदुओं को समाहित किया जाएगा. शाह ने औपनिवेशिक ब्रिटिश काल के दौरान कैदियों की पहचान संबंधी 1920 के कानून की जगह लेने वाले ‘दंड प्रक्रिया (शिनाख्त) विधेयक, 2022’ को लोकसभा में चर्चा एवं पारित करने के लिए रखते हुए कहा कि उक्त विधेयक को पृथक रूप से देखने के बजाय भावी मॉडल जेल मैनुअल के साथ देखना होगा.

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नया मॉडल जेल मैनुअल बना रही है. इसे राज्यों को भेजा जाएगा. इसमें कैदियों के पुनर्वास, उन्हें समाज में पुनर्स्थापित करने, जेल के अधिकारियों के बीच अनुशासन, जेल की सुरक्षा, महिला कैदियों के लिए अलग जेल और खुली जेल आदि प्रावधानों को समाहित किया गया है.’’ शाह ने गत 28 मार्च को सदन में ‘दंड प्रक्रिया (शिनाख्त) विधेयक, 2022’ पेश किये जाते समय विपक्षी सदस्यों द्वारा जताई गयी आपत्तियों के आलोक में कहा, ‘‘कृपया उक्त विधेयक को पृथक रूप में देखने के बजाय मॉडल जेल मैनुअल के साथ देखना होगा.’’ उन्होंने कहा कि 1902 के कानून की जगह नये कानून से अदालतों में दोषसिद्ध करने के लिए प्रमाणों को बढ़ाया जा सकेगा.

शाह ने कहा कि यह विधेयक लाने का सही समय है जिसमें काफी देरी हो चुकी है. उन्होंने कहा, ‘‘1980 में विधि आयोग ने अपनी 87वीं रिपोर्ट में बंदी शिनाख्त अधिनियम पर पुर्निवचार करने की सिफारिश सरकार को भेजी था. इस पर कई बार चर्चा हुई. हमने सरकार बनने के बाद राज्यों से चर्चा की, अनेक प्रकार के सुझाव लिये गये. सभी को समाहित करते हुए और दुनियाभर में अपराध प्रक्रिया में दोषसिद्धि के लिए इस्तेमाल अनेक प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद यह विधेयक लाया गया है.’’ उन्होंने कहा कि इसमें मानवाधिकार हनन संबंधी सदस्यों की ंिचताओं पर ध्यान दिया गया है. शाह ने कहा कि कानून में समय पर बदलाव नहीं करेंगे तो दोषसिद्धी की दर में हम पीछे रह जाएंगे.

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