
चंडीगढ़. ‘‘मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए 500 करोड़ रुपये’’ वाली टिप्पणी के चलते कांग्रेस पार्टी से निलंबित की गयीं नवजोत कौर सिद्धू ने बुधवार को कहा कि वह और उनके पति हमेशा पार्टी के साथ रहेंगे. कौर कांग्रेस की पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी हैं. कौर ने कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमंिरदर सिंह राजा वडिंग पर भी तीखा हमला करते हुए उन पर पार्टी को ‘बर्बाद’ करने का आरोप लगाया.
कांग्रेस ने कौर को ‘‘मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए 500 करोड़ रुपये’’ वाली उनकी टिप्पणी के लिए सोमवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया था. उनकी टिप्पणी से राजनीतिक विवाद छिड़ गया था. कौर ने बुधवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ हम कांग्रेस के साथ हैं और हमेशा रहेंगे, और हम अपने पंजाब राज्य को जीतेंगे और इसे अपने विनम्र, प्रिय और त्याग के प्रतीक गांधी परिवार को उपहार स्वरूप देंगे. ’’ कौर ने वडिंग पर निशाना साधते हुए कहा कि 70 ”कुशल, ईमानदार और वफादार” नेता उनके संपर्क में हैं, ”जिन्हें आपने (वडिंग) कांग्रेस पार्टी से अलग कर दिया है और जो कांग्रेस टिकट के लिए योग्य विजयी उम्मीदवार हैं.”
उन्होंने अपने पोस्ट में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘ आप पंजाब की 70 प्रतिशत सीटों को बर्बाद करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जहां आपने पहले ही अप्रभावी लोगों को फर्जी टिकट दे दिए हैं, इसके बावजूद कांग्रेस पंजाब में जीत हासिल करेगी.’’ कौर ने वडिंग पर निशाना साधते हुए कहा, “टिकट बेचने के आरोप में आपको गुजरात से निकाल दिया गया था और आपने वहां महंगी गाड़ियां, जमीनें और मेट्रो खरीदीं. क्या आप आईटी की व्याख्या सुनने के लिए तैयार हैं? राजा वडिंग, अपने उन कुत्तों का इस्तेमाल मत करो जिन्हें आपकी वजह से टिकट मिले हैं.”
उन्होंने कहा, ‘‘आप लगातार कांग्रेस पार्टी के खिलाफ काम क्यों कर रहे हैं और उम्मीदवारों को हराकर उन्हें अन्य पार्टियों में शामिल होने के लिए मजबूर क्यों कर रहे हैं?’’ नवजोत कौर सिद्धू ने मंगलवार को दावा किया कि उन्हें कांग्रेस की पंजाब इकाई के 70 प्रतिशत और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के 90 प्रतिशत लोगों का समर्थन प्राप्त है. अपने निलंबन को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कौर ने कहा कि नोटिस एक ऐसे व्यक्ति की ओर से आया है, जिनके पास कोई मान्यता नहीं है और ऐसे कई नोटिस जारी किए जाते रहे हैं.
कौर ने पटियाला में पत्रकारों से कहा कि वह पार्टी आलाकमान के संपर्क में हैं. उन्होंने कहा, ‘‘पार्टी (आलाकमान) के साथ उचित चर्चा की जा रही है. लेकिन हमारी एक शर्त है कि हम ‘चोरों’ का समर्थन नहीं करेंगे.’’ उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा, ‘‘अगर आप सरकार बनाना चाहते हैं, तो कांग्रेस में चार-पांच लोग हैं जो पार्टी को बर्बाद कर रहे हैं. यदि आप उन्हें दरकिनार करने को तैयार हैं, तो हम इस पर विचार करेंगे.’’ यह पूछे जाने पर कि क्या निलंबन के बाद उन्हें कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है, उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पूरा समर्थन प्राप्त है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘पंजाब कांग्रेस के 70 प्रतिशत से अधिक लोग मेरे साथ हैं और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के 90 प्रतिशत लोग मेरे साथ हैं.’’ यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने अपने खिलाफ कार्रवाई के बाद आलाकमान से बात की, उन्होंने कहा, ‘‘मैं अभी कुछ भी साझा नहीं करूंगी.’’
कानूनी नोटिस बेबुनियाद, माफी मांगें अन्यथा जवाबी मुकदमे का सामना करना पड़ेगा : नवजोत कौर ने रंधावा से कहा
नवजोत कौर सिद्धू ने कांग्रेस सांसद सुखंिजदर सिंह रंधावा द्वारा उन्हें भेजे गए कानूनी नोटिस को ‘‘बेबुनियाद’’ करार दिया और कहा कि यह कानूनी रूप से टिकने वाला नहीं है. नवजोत कौर ने अपने वकील के माध्यम से रंधावा से नोटिस वापस लेने या उत्पीड़न, झूठे दावों और हर्जाने के लिए जवाबी मुकदमा दायर करने की चेतावनी दी है. मंगलवार को रंधावा ने कांग्रेस से निलंबित कौर को कानूनी नोटिस भेजकर उनके खिलाफ ‘‘मानहानिकारक’’ टिप्पणी करने के लिए माफी मांगने या कानूनी कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी थी. कौर कांग्रेस की पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी हैं.
कांग्रेस ने कौर को ‘‘मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए 500 करोड़ रुपये’’ वाली उनकी टिप्पणी के लिए सोमवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया था. उनकी टिप्पणी से राजनीतिक विवाद छिड़ गया है. नोटिस के जवाब में नवजोत कौर ने अपने वकील के माध्यम से कहा कि लिखित माफी या कानूनी कार्रवाई की मांग न ‘‘केवल अनुचित बल्कि बेतुकी भी है.’’ नोटिस के जवाब में कौर के वकील ने कहा, ‘‘मेरे मुवक्किल ने आपके मुवक्किल के किसी भी कानूनी अधिकार का उल्लंघन नहीं किया है. यह बयान न तो दुर्भावनापूर्ण था और न ही मानहानिकारक, बल्कि विभिन्न प्रामाणिक समाचार रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर जनहित में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक वास्तविक प्रयोग था.’’



