जब तक शीर्ष नेतृत्व चाहेगा मैं मुख्यमंत्री पद पर कायम रहूंगा: सिद्धरमैया

बेलगावी. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने मंगलवार को फिर कहा कि जब तक कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व चाहेगा वह मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी को पांच साल तक शासन के लिए जनादेश मिला है और वह (पार्टी) 2028 के विधानसभा चुनाव के बाद भी सत्ता में वापसी करेगी.

सिद्धरमैया ने विधानसभा में कहा, “मैं यह बहुत स्पष्ट रूप से कह रहा हूं. हमारे पास शीर्ष नेतृत्व है. हम उनके फैसले का पालन करते हैं. शीर्ष नेतृत्व जो कहे, वही अंतिम होता है,” विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान नेतृत्व का मुद्दा उठा. कुनिगल से कांग्रेस विधायक एच डी रंगनाथ ने आरोप लगाया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के किसानों को जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (डीसीसी बैंक) से अल्पकालिक ऋण नहीं मिल रहा है, जबकि पड़ोसी मधुगिरी निर्वाचन क्षेत्र के किसानों को 100 करोड़ रुपये के अल्पकालिक ऋण प्राप्त हुए हैं.

उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के भरोसेमंद और उन्हें मुख्यमंत्री के पद पर देखने के आकांक्षी रंगनाथ ने आरोप लगाया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के किसानों के साथ भेदभाव किया जा रहा है. सिद्धरमैया के भरोसेमंद के एन राजन्ना को मधुगिरि क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. रंगनाथ के प्रश्न का उत्तर देते हुए सिद्धरमैया ने उन्हें आश्वस्त किया कि यदि कोई भेदभाव हुआ है तो वे उसे दूर करेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा, “उम्मीद है रंगनाथ मुझ पर भरोसा करेंगे.” विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने तंज करते हुए कहा कि यह भेदभाव जानबूझकर किया गया प्रतीत होता है.

मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा, “आग में घी मत डालो. विपक्ष का काम तो आग में घी डालना ही है.” अशोक ने उत्तर दिया, “इसका मतलब है कि आग लगी है. रंगनाथ पूजा कर रहे हैं ताकि डी. के. शिवकुमार मुख्यमंत्री बन सकें.” अशोक ने यह भी कहा कि विपक्ष आग भड़का रहा है, इससे फर्क नहीं पड़ता, लेकिन चिंता की बात यह है कि सत्तारुढ़ कांग्रेस के विधायक ही अशांति फैला रहे हैं.
सिद्धरमैया ने अशोक को फटकारा और कहा कि जब सत्ताधारी विधायक चुप हैं तो उन्हें भी चुप रहना चाहिए.

अशोक ने कहा, “वे चुप नहीं बैठे हैं महोदय. वे प्रतिदिन पूजा-अर्चना कर रहे हैं. वे शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं. मैं यह बात प्रतिदिन अखबारों में पढ़ रहा हूं.” इस पर सिद्धरमैया ने कहा, “भले ही आप उकसाने की कोशिश करें, हमारी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं देगा, सभी 140 विधायक एकजुट हैं.” इसके बाद विपक्ष के नेता ने उनसे पूछा कि क्या वे पूरे पांच साल तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे.
इसके जवाब में सिद्धरमैया ने कहा, “आप मुझसे यह सवाल क्यों पूछ रहे हैं? जनता ने हमें पांच साल तक शासन करने का जनादेश दिया है.”

मुख्यमंत्री ने कहा, “कर्नाटक के मतदाताओं ने हमें पांच साल का कार्यकाल पूरा करने का आशीर्वाद दिया है. हमें जनता का आशीर्वाद दो बार मिला 2013 और 2018 के विधानसभा चुनावों में, जबकि भाजपा को कभी भी जनता का जनादेश नहीं मिला और भविष्य में भी मतदाताओं का आशीर्वाद उन्हें अकेले सत्ता संभालने के लिए नहीं मिलेगा. वे हमेशा विपक्ष में ही रहेंगे.”

भाजपा विधायक एस सुरेश कुमार ने कहा, “सिद्धरमैया पहले कहते थे ‘मैं पांच साल तक मुख्यमंत्री रहूंगा’, लेकिन अब वे कह रहे हैं ‘हम पांच साल तक शासन करेंगे’. यहां एकवचन ‘मैं’ से बहुवचन ‘हम’ में बदलाव हुआ है.” इस पर मुख्यमंत्री ने कहा, “हम सरकार चला रहे हैं. यह हमेशा से ही बहुवचन (सामूहिक) रही है. यह कभी भी व्यक्तिगत मामला नहीं था. मैं अब तक मुख्यमंत्री हूं और शीर्ष नेतृत्व की इच्छा तक इस पद पर बना रहूंगा.”

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