
रांची. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बांग्लादेश से झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में अवैध घुसपैठ से जुड़े धनशोधन के एक मामले में दो बांग्लादेशी नागरिकों सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है. बांग्लादेशी नागरिक रोनी मंडल और समीर चौधरी तथा भारतीय नागरिक पिंटू हलधर को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया. इस मामले में बुधवार को भारतीय महिला पिंकी बसु को हिरासत में लिया गया.
संघीय एजेंसी ने एक बयान में कहा कि सभी चार आरोपियों को भारत में अवैध मानव तस्करी को “सुविधाजनक” बनाने के आरोप में कोलकाता से गिरफ्तार किया गया. ईडी ने कहा कि उन सभी को रांची लाने के लिए ‘ट्रांजिट रिमांड’ लिया जा रहा है. संघीय एजेंसी ने इस मामले में मंगलवार को पश्चिम बंगाल और चुनावी राज्य झारखंड में 17 स्थानों पर छापे मारे थे. एजेंसी ने कहा कि उसकी जांच में पाया गया कि पश्चिम बंगाल और झारखंड में एक ‘सिंडिकेट’ व्यापक रूप से काम करता है और यह उक्त गतिविधियों से अपराध की आय को सुगम बनाने में लगा हुआ है.
उसने कहा कि इस ‘सिंडिकेट’ के एजेंट बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में अवैध घुसपैठ में मदद करते हैं और उन्हें भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेज मुहैया कराते हैं. ईडी के अनुसार, इसकी ”पुष्टि” उन मोबाइल फोन की जब्ती से होती है जिसमें विभिन्न आपत्तिजनक चैट हैं, जो तस्करी की गई लड़कियों द्वारा वेश्यावृत्ति सहित उक्त अवैध गतिविधियों के बदले में मौद्रिक लेनदेन से संबंधित हैं.
एजेंसी ने बताया कि छापेमारी के दौरान, ‘सिंडिकेट’ द्वारा संचालित वेश्यावृत्ति रैकेट के बदले किए गए भुगतान का ब्यौरा युक्त दस्तावेज बरामद किए गए. एजेंसी ने मंगलवार को एक बयान जारी करके कहा था कि उसने छापेमारी के दौरान फर्जी आधार कार्ड, जाली पासपोर्ट, अवैध हथियार, अचल संपत्ति के दस्तावेज, नकदी, आभूषण, आधार में जालसाजी के लिए इस्तेमाल किए गए प्रिंटिंग पेपर और मशीनें तथा खाली ‘प्रोफार्मा’ जैसी आपत्तिजनक सामग्री बरामद की हैं.
यह कार्रवाई झारखंड में बुधवार को 43 विधानसभा सीट के लिए होने वाले मतदान से ठीक पहले की गई थी. राज्य की शेष 38 सीट के लिए 20 नवंबर को मतदान होगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अन्य नेताओं ने हाल में चुनाव प्रचार अभियान के दौरान राज्य सरकार पर ऐसी घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है जिससे आदिवासी बहुल संथाल परगना और कोल्हान क्षेत्रों के जनसांख्यिकीय परिदृश्य में बदलाव आया है.
मोदी ने गत सप्ताह देवघर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि झारखंड में घुसपैठ बड़ी चिंता का विषय है और संथाल परगना में आदिवासी आबादी आधी रह गयी है. उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में झामुमो नीत गठबंधन ने घुसपैठियों को स्थायी नागरिक बनने की अनुमति दे दी है.
झारखंड में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण से एक दिन पहले मंगलवार को ईडी द्वारा राज्य के कई स्थानों पर की गई छापेमारी के लिए भाजपा नीत केंद्र की आलोचना की थी और आरोप लगाया था कि केंद्रीय एजेंसी की यह कार्रवाई ”भाजपा को बांग्लादेशी घुसपैठ का विमर्श स्थापित करने में मदद करने का एक प्रयास है.” झामुमो नीत सरकार की सहयोगी कांग्रेस ने भी आरोप लगाया कि ईडी की कार्रवाई ”राज्य में भाजपा का राजनीतिक आधार बचाने का अंतिम प्रयास” है.
ईडी ने झारखंड में कुछ बांग्लादेशी महिलाओं की कथित घुसपैठ और तस्करी के एक मामले की जांच के लिए पीएमएलए के तहत सितंबर में एक मामला दर्ज किया था. ऐसा आरोप है कि घुसपैठ और तस्करी से आपराधिक आय अर्जित की गयी. संघीय एजेंसी द्वारा पीएमएलए की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर), जून में राजधानी रांची में बरियातु पुलिस थाने में दर्ज झारखंड पुलिस की एक प्राथमिकी पर आधारित है.
पुलिस की प्राथमिकी एक बांग्लादेशी महिला की शिकायत पर आधारित है जो काम की तलाश में दलालों की मदद से भारत-बांग्लादेश सीमा से देश में अवैध तरीके से घुसी. उसने करीब छह महिलाओं के नाम लिये जिन्हें एक स्थानीय रिजॉर्ट में छापा मारने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने इनमें से एक महिला के पास से ”फर्जी” आधार कार्ड भी बरामद किया.
प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थी. प्राथमिकी में महिला शिकायतकर्ता के हवाले से कहा गया है कि उसे ‘ब्यूटी सैलून’ में नौकरी दिलाने का झांसा देकर कथित तौर पर वेश्यावृत्ति के लिए बांग्लादेश से तस्करी करके लाया गया. इससे पहले, ईडी सूत्रों ने कहा था कि एजेंसी बांग्लादेश सहित पूर्वी सीमाओं से झारखंड में संथाल परगना और कोल्हान के आदिवासी जिलों में घुसपैठ के “संपूर्ण पहलू” की जांच करेगी.



