तेजी से बदलती, संघर्ष से जूझती दुनिया में भारत को ‘विश्व बंधु’ के रूप में देखा जाता है: मुर्मू

नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन या आतंकवाद के खिलाफ सैद्धांतिक रुख अपनाने सहित वैश्विक चुनौतियों का समाधान तलाशने के लिए भारत, दुनिया के साथ काम कर रहा है तथा तेजी से बदलती और संघर्ष से जूझती दुनिया में देश को भरोसेमंद ‘विश्व बंधु’ के रूप में देखा जाता है. यहां राष्ट्रपति भवन में उनसे मिलने आए भारतीय विदेश सेवा (2023 बैच) के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने इन अधिकारियों से विदेश में रहने वाले भारतीयों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहने को कहा.

मुर्मू ने कहा, ”हाल की विदेश यात्राओं में मैंने खुद देखा है कि बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के क्षेत्र में हमारी साझेदारी की विकास परियोजनाओं से हमें ख्याति मिली है, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों में.” उन्होंने कहा कि फिल्मों, योग, आयुर्वेद और भारतीय कला, शिल्प, नृत्य और संगीत सहित भारतीय ज्ञान शक्ति में भी जबरदस्त रुचि है.

राष्ट्रपति ने कहा, ”मैंने यह भी महसूस किया है कि विदेशों में हमारे मित्रों और साझेदारों को अब हमसे बहुत अधिक अपेक्षाएं हैं, जिन्हें हमें पूरा करना चाहिए. यहीं पर आपकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. आपको अपने मेजबान देश में व्यापार और वैज्ञानिक समुदाय, सांस्कृतिक प्रतिनिधियों और मीडिया सहित विभिन्न हितधारकों के साथ रचनात्मक रूप से काम करना होगा.” मुर्मू ने कहा कि विदेश यात्रा के दौरान भारतीय प्रवासियों के साथ अपनी बैठकों में, वह उनकी कई उपलब्धियों और अपनी मातृभूमि से जुड़ने और योगदान देने के उनके उत्साह से प्रभावित हुई हैं.

राष्ट्रपति ने कहा, ”कृपया याद रखें कि संकट के समय में, भारतीय मिशन विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों के लिए दूसरा घर है और आप ही उनकी एकमात्र आशा हैं.” उन्होंने कहा कि वंदे भारत मिशन (कोविड), ऑपरेशन गंगा (यूक्रेन), ऑपरेशन कावेरी (सूडान) और ऑपरेशन अजय (इजराइल) अनुकरणीय प्रयास थे. ”इन देशों से हमारे राजनयिकों ने लाखों भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की.” मुर्मू ने कहा, ”आपको विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए हमेशा मौजूद रहने की इस गौरवशाली परंपरा को जारी रखना चाहिए.” उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और कई जगहों पर ”हमारे सामने युद्ध जैसी स्थितियां, मानवीय संकट, साथ ही नए खतरे और गैर-पारंपरिक चुनौतियां हैं”.

मुर्मू ने कहा कि कृत्रिम मेधा, ‘क्वांटम कंप्यूटिंग’ और मशीन र्लिनंग जैसी प्रौद्योगिकी कूटनीति और विदेश नीति के लिए नया साधन प्रदान करती हैं. उन्होंने कहा कि हालांकि, जब इनके नियंत्रण की बात आती है, तो अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि इन प्रौद्योगिकियों की कोई सीमा नहीं है.

राष्ट्रपति ने कहा, ”इसलिए हमें सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है. इन सभी चुनौतियों का प्रभावी तरीके से निपटना और ऐसे समाधान प्रदान करना आपका काम होगा जो हमारे राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखें.” मुर्मू ने उनसे कहा कि ”याद रखें, कि आप केवल भारत सरकार का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं, बल्कि 1.4 अरब भारतीयों और उनकी उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं”.
उन्होंने कहा, ”आप भारत की विविधतापूर्ण और बहुलवादी संस्कृति, हमारी 5000 साल पुरानी सभ्यता की प्रचुरता का प्रतिनिधित्व करते हैं, और इसके साथ ही आप एक ऐसे समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो मूलत: इस अप्रत्याशित संसार में लोगों की भलाई और स्थिरता के लिए एक बड़ी ताकत है.”

मुर्मू ने कहा कि विदेश नीति कोई लिखित सार या अभिजात्य वर्ग से जुड़ा कार्यकलाप नहीं है. उन्होंने कहा, ”यह दरअसल घरेलू नीतियों का ही विस्तार है, जिनका उद्देश्य देश के राजनीतिक, आर्थिक एवं सुरक्षा संबंधी हितों और क्षेत्रीय अखंडता को सुनिश्चित करना है. अंतत: यह आपका उत्तरदायित्व है कि आप न केवल हमारे हितों की रक्षा करें, बल्कि इसके साथ ही वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्­य हासिल करने के व्यापक रणनीतिक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए वैश्विक एजेंडे को सटीक स्­वरूप प्रदान करें.”

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