भारत युद्ध का नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति का समर्थन करता है : प्रधानमंत्री मोदी

कजान. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रूस-यूक्रेन विवाद का हल शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से करने का आह्वान करते हुए बुधवार को कहा कि संवाद और कूटनीति ही संघर्ष के समाधान का एकमात्र रास्ता है. ब्रिक्स के 16वें शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि समूह को दुनिया को यह संदेश देना चाहिए कि यह विभाजनकारी संगठन नहीं, बल्कि मानवता के हित में काम करने वाला संगठन है.

प्रधानमंत्री ने युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद जैसी चुनौतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि ब्रिक्स विश्व को सही रास्ते पर ले जाने में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है. उन्होंने कहा, ”हम युद्ध का नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति का समर्थन करते हैं. और जिस तरह हम एक साथ मिलकर कोविड जैसी चुनौती से पार पाने में सक्षम हुए, उसी तरह हम भावी पीढि.यों के वास्ते सुरक्षित, मजबूत और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करने के लिए नए अवसर पैदा करने में निश्चित रूप से सक्षम हैं.” रूस के कजान शहर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया. शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके चीनी समकक्ष शी चिनफिंग सहित ब्रिक्स देशों के शीर्ष नेता शामिल हुए.

अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब विश्व संघर्ष, प्रतिकूल जलवायु प्रभाव और साइबर खतरों सहित अनेक अनिश्चितताओं और चुनौतियों से गुजर रहा है, जिससे ब्रिक्स से काफी अपेक्षाएं बढ़ गई हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद से निपटने के लिए ठोस वैश्विक प्रयासों की भी वकालत की और कहा कि इस खतरे से लड़ने में कोई ”दोहरा मापदंड” नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा ”आतंकवाद और इसके वित्तपोषण का मुकाबला करने के लिए, हमें सभी के एकजुट, दृढ़ समर्थन की आवश्यकता है. इस गंभीर मामले पर दोहरे मानदंडों के लिए कोई जगह नहीं है.

मोदी ने कहा कि समूह के देशों को युवाओं में कट्टरपंथ को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा ”हमें अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र में व्यापक समझौते के लंबित मुद्दे पर मिलकर काम करना होगा.” उन्होंने कहा कि इसी तरह ”हमें साइबर सुरक्षा, सुरक्षित और संरक्षित एआई के लिए वैश्विक नियमन के वास्ते काम करने की आवश्यकता है.” प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अन्य वैश्विक निकायों में सुधार की भी वकालत की. उन्होंने कहा, ”हमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, बहुपक्षीय विकास बैंकों और विश्व व्यापार संगठन जैसे वैश्विक संस्थानों में सुधारों पर समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ना चाहिए.”

मोदी ने कहा, ”जब हम ब्रिक्स में अपने प्रयासों को आगे बढ़ा रहे हैं, तो हमें यह सुनिश्चित करने के लिए सतर्क रहना चाहिए कि इस संगठन की छवि ऐसी न बने कि यह वैश्विक संस्थानों को बदलने की कोशिश कर रहा है, बल्कि यह समझा जाए कि यह संगठन उन्हें सुधारने की इच्छा रखता है.” प्रधानमंत्री ने वैश्विक चुनौतियों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, ”हमारी बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रही है. दुनिया उत्तर-दक्षिण विभाजन और पूर्व-पश्चिम विभाजन के बारे में बात कर रही है.” मोदी ने कहा कि महंगाई को रोकना तथा खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा और जल सुरक्षा सुनिश्चित करना दुनिया के सभी देशों के लिए प्राथमिकता के विषय हैं. उन्होंने कहा, ”प्रौद्योगिकी के इस युग में, साइबर डीप-फेक, गलत सूचना जैसी नयी चुनौतियां सामने आई हैं.”

उन्होंने कहा, ”ऐसे समय में ब्रिक्स से काफी उम्मीदें हैं. मेरा मानना ??है कि एक विविध और समावेशी मंच के रूप में ब्रिक्स सभी क्षेत्रों में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है.” जी-20 की अध्यक्षता के दौरान भारत द्वारा आयोजित ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ’ शिखर सम्मेलन को याद करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समूह को ‘ग्लोबल साउथ’ की चिंताओं को प्राथमिकता देनी चाहिए. मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दो सत्र को संबोधित किया.

‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर लैटिन अमेरिका, एशिया, अफ्रीका और ओशिनिया के क्षेत्रों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसका आशय, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बाहर, दक्षिणी गोलार्द्ध और भूमध्यरेखीय क्षेत्र में स्थित ऐसे देशों से है जो ज्यादातर कम आय वाले या विकासशील हैं. उन्होंने शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी के लिए राष्ट्रपति पुतिन को बधाई दी और समूह की अध्यक्षता संभालने पर ब्राजील को शुभकामनाएं दीं. मोदी ने कहा कि भारत भागीदार देशों के रूप में ब्रिक्स में नए देशों का स्वागत करता है.

उन्होंने कहा, ”इस संबंध में सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए और ब्रिक्स के संस्थापक सदस्यों के विचारों का सम्मान किया जाना चाहिए.” मोदी ने कहा, ”जोहानिसबर्ग शिखर सम्मेलन के दौरान अपनाए गए मार्गदर्शक सिद्धांतों, मानकों, मानदंडों और प्रक्रियाओं का सभी सदस्यों और भागीदार देशों द्वारा अनुपालन किया जाना चाहिए.” उन्होंने कहा, ”विभिन्न दृष्टिकोणों और विचारधाराओं के समागम से बना ब्रिक्स समूह दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो सकारात्मक सहयोग को बढ़ावा देता है.” प्रधानमंत्री ने कहा, ”हमारी विविधता, एक-दूसरे के प्रति सम्मान और आम सहमति के आधार पर आगे बढ़ने की हमारी परंपरा हमारे सहयोग का आधार है.” शिखर सम्मेलन के समापन पर नेताओं ने ‘कजान घोषणापत्र’ को अपनाया.

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