
नयी दिल्ली. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को कहा कि भारतीय तेल कंपनियां वर्ष 2046 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर चल रही हैं और वे उत्सर्जन में कटौती एवं स्वच्छ ईंधन को अपनाने के लिए अभियान चला रही हैं. हालांकि भारत ने शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन हासिल करने के लिए वर्ष 2070 का लक्ष्य रखा है. लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियां इसे वर्ष 2038 से लेकर 2046 तक ही हासिल करने के लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही हैं.
पुरी ने यहां 26वीं ऊर्जा प्रौद्योगिकी बैठक को संबोधित करते हुए कहा, ”भारतीय ऊर्जा क्षेत्र बदलाव के शिखर पर है और तेजी से वैश्विक तेल तथा ऊर्जा बाजार का केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है क्योंकि हम पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार हैं.” उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा मांग भविष्य की आर्थिक वृद्धि में जान फूंकने का काम करती है. भारत दुनिया का तीसरा बड़ा तेल उपभोक्ता, तीसरा बड़ा रसोई गैस उपभोक्ता, चौथा तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयातक, चौथा बड़ा रिफाइनर और चौथा सबसे बड़ा वाहन बाजार है.
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि अगले दो दशकों में वैश्विक ऊर्जा मांग वृद्धि में देश की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत रहने की संभावना है. तेल की बढ़ती मांग के बीच भारतीय कंपनियों ने महत्वाकांक्षी शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य निर्धारित किए हैं. पुरी ने कहा कि यह जीवाश्म ईंधन से स्वच्छ ईंधन और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर एक क्रमिक बदलाव होगा. उन्होंने कहा कि तेल की ऊंची कीमतें ऊर्जा बदलाव को गति देती हैं.
इजराइल और हमास के बीच छिड़े संघर्ष पर उन्होंने कहा कि भारत स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है. शनिवार को यह संघर्ष शुरू होने के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें तीन डॉलर प्रति बैरल से अधिक बढ़ गईं. उन्होंने कहा, ” जहां तक ऊर्जा का सवाल है. हमें यह बिल्कुल स्पष्ट कर देना चाहिए कि जिस स्थान पर यह सब जारी है, वह कई मायनों में वैश्विक ऊर्जा का केंद्र है. हम इस पर करीबी नजर रखेंगे और देखेंगे कि हमें अपना आगे का रास्ता किस तरह तय कर सकते हैं.”
भारत में जैव ईंधन के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, ”हम पांच महीने पहले ही 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य तक पहुंच गए. अब हम 12 प्रतिशत पर हैं. वर्ष 2025 तक 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है.”



