इसरो ने चंद्रमा पर लैंडर मिशन के सफल प्रक्षेपण पर जेएएक्सए को दी बधाई

बेंगलुरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ‘स्मार्ट लैंडर फॉर इन्वेस्टिगेटिंग मून’ (एसएलआईएम) के सफल प्रक्षेपण पर जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जेएएक्सए) को बृहस्पतिवार को बधाई दी. अंतरिक्ष एजेंसी ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर कहा, ”वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय के एक और सफल चंद्र मिशन के लिए बहुत-बहुत बधाई.” जेएएक्सए ने बृहस्पतिवार को एक एक्स-रे दूरबीन ले जाना वाला रॉकेट प्रक्षेपित किया, जो ब्रह्मांड की उत्पति का पता लगाएगा. जापान ने साथ ही एक एसएलआईएम भी भेजा है जो चांद पर जानकारी जुटाएगा. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि चंद्रयान-3 मिशन के बाद इसरो का अगला चंद्रमा मिशन जेएएक्सए के साथ साझेदारी में हो सकता है.

चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण मिशन (लूपेक्स) जेएएक्सए और भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के बीच एक सहयोगी मिशन है. जेएएक्सए और इसरो साथ मिलकर रोवर और लैंडर विकसित कर रहे हैं. यह रोवर न सिर्फ इसरो और जेएएक्सए के बल्कि अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा व यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के उपकरणों को अपने साथ ले जाएगा.

नेशनल स्पेस पॉलिसी पर जापान मंत्रिमंडल समिति के उपाध्यक्ष और जापान की राष्ट्रीय खगोलीय वेधशाला के महानिदेशक साकू सुनेता ने पिछले महीने यहां इसरो मुख्यालय का दौरा किया था और अंतरिक्ष एजेंसी के अध्यक्ष एस. सोमनाथ के साथ मुलाकात कर लूपेक्स मिशन की प्रगति पर चर्चा की थी.

इसरो के अधिकारी ने कहा, ”अन्य चीजों के साथ लूपेक्स मिशन के लिए एक छोटे लैंडर के निर्माण पर चर्चा हुई.” जेएएक्सए के मुताबिक, लूपेक्स मिशन का मकसद स्थायी गतिविधियों के लिए एक चंद्र आधार स्थापित कर चांद के ध्रुवीय क्षेत्र की उपयुक्तता की खोज करना है. इसके साथ चांद की सतह पर जल-बर्फ संसाधनों की उपलब्धता के संबंध में जानकारी जुटाना और वाहन-परिवहन व रात में जीवित रहने जैसी चांद और ग्रहों की सतह से जुड़ी खोज तकनीकों का प्रदर्शन करना है. इसरो के एक अधिकारी के मुताबिक, लूपेक्स मिशन साल 2025 में शुरू किया जाना प्रस्तावित है.

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