
मुंबई. जैन मुनि नीलेशचंद्र विजय ने शहर के दादर स्थित कबूतरखाना को नगर निकाय द्वारा बंद किये जाने के खिलाफ सोमवार को आजाद मैदान में आमरण अनशन की शुरुआत की. जैन मुनि ने पांरपरिक रूप से कबूतरों को दाना देने के निर्धारित उक्त स्थान (कबूतरखाना) को दोबारा खोलने की मांग की.
जैन मुनि ने बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) मुख्यालय के पास संवाददाताओं से बातचीत में प्रदर्शन के तहत जल त्यागने की घोषणा की. जैन मुनि नीलेशचंद्र विजय ने कहा कि वह अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ”मेरा प्रदर्शन डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा लिखे संविधान के अनुरूप है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन का अधिकार है.” बीएमसी ने दादर और शहर के अन्य क्षेत्रों में कबूतरखानों को बंद करने का फैसला जुलाई में मुख्य रूप से श्वसन संबंधी बीमारियों सहित गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा चिंताओं की वजह से लिया है.
जैन मुनि का यह विरोध बीएमसी के उस हालिया निर्णय के जवाब में आया है, जिसमें उसने केवल चार वैकल्पिक स्थानों – वर्ली जलाशय, अंधेरी पश्चिम में मैंग्रोव क्षेत्र, ऐरोली मुलुंड चेक पोस्ट क्षेत्र और बोरीवली पश्चिम में गोराई मैदान – पर ही नियंत्रित मात्रा में कबूतरों को दाना खिलाने की अनुमति दी है. दाना खिलाने की अनुमति सुबह 7 बजे से 9 बजे के बीच ही दी गई है, तथा इन स्थानों का प्रबंधन और देखरेख गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) करेंगे.
जैन मुनि ने कहा, ”बीएमसी द्वारा दी गई वैकल्पिक जगहें 4, 5 और यहां तक कि 9 किलोमीटर दूर हैं. क्या कबूतर इतनी दूर उड़ सकते हैं? प्रशासन को मौजूदा कबूतरखाना से दो किलोमीटर के भीतर ही जगह देनी चाहिए थी.” उन्होंने दादर कबूतरखाना को फिर से खोलने की मांग की.
जैन मुनि ने कहा कि वह एक महीने तक अन्न-जल त्यागकर विरोध प्रदर्शन करेंगे. उन्होंने जैन ट्रस्ट की संपत्ति को पुणे में एक बिल्डर को बेचे जाने की घटना, जिसे अब रद्द कर दिया गया है, तथा महाराष्ट्र के विभिन्न भागों में गौरक्षकों पर कथित हमले के बारे में भी बात की. जैन मुनि ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से समाधान की अपील की, साथ ही देश भर के जैन समुदाय से इस मुद्दे का समर्थन करने के लिए मुंबई आने का आ”ान किया.
उन्होंने कहा कि यह पवित्र स्थल – दादर स्थित कबूतरखाना – एक शताब्दी से भी अधिक समय से अस्तित्व में है और सांस्कृतिक तथा धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है. नीलेशचंद्र विजय ने दावा किया कि कबूतरखाना बंद होने के बाद से पक्षियों की संख्या में भारी गिरावट आई है तथा एक लाख से अधिक कबूतर मर गए हैं. उन्होंने कहा कि सामुदायिक संगठन वर्तमान में प्रतिदिन 50 से 60 घायल या बीमार कबूतरों का उपचार कर रहे हैं. नीलेशचंद्र विजय ने कहा कि यदि नगर निकाय उचित स्थान आवंटित कर दे तो जैन समुदाय भूमि खरीदने के लिए धन जुटाने को तैयार है.
उन्होंने दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि यदि मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जारंगे को अपने समुदाय के हितों के लिए आजाद मैदान में प्रदर्शन करने की अनुमति दी गई थी, तो वह पशु कल्याण के लिए वहां विरोध प्रदर्शन क्यों नहीं कर सकते.
कबूतरों को दाना खिलाने को लेकर विवाद जुलाई में महाराष्ट्र विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान तब शुरू हुआ जब शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने दादर में कबूतरखाना के पास के निवासियों के लिए स्वास्थ्य जोखिम की चिंता जताई.
नगर निकाय ने स्पष्ट किया है कि यह अस्थायी प्रबंध है और विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट तथा अदालत से आदेश मिलने तक बंद कबूतरखानों को फिर से नहीं खोला जाएगा. जैन मुनि ने कहा, ”हम कबूतरों के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिन्हें शांति का दूत माना जाता है. इसलिए यह एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन होगा.”



