अवैध धर्मांतरण मामले में दोषी 12 लोगों को उम्रकैद और चार लोगों को 10-10 साल की सजा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 11 Sep 2024 07:39 PM
अवैध धर्मांतरण मामले में दोषी 12 लोगों को उम्रकैद और चार लोगों को 10-10 साल की सजा
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के लखनऊ में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत ने अवैध धर्म परिवर्तन के मामले में दोषी करार दिये गये मोहम्मद उमर गौतम और मौलाना कलीम सिद्दीकी समेत 12 लोगों को बुधवार को उम्रकैद और चार अन्य दोषियों को10-10 वर्ष कैद की सजा सुनायी. अदालत ने सभी को मंगलवार को दोषी करार दिया था और बुधवार को सजा का ऐलान किया गया.

अदालत द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने मोहम्मद उमर गौतम, मौलाना कलीम सिद्दीकी, इरफान शेख, सलाउद्दीन जैनुद्दीन शेख, प्रकाश रामेश्वर कावड़े उर्फ आदम, भुप्रिय बन्दो उर्फ अर्सलान मुस्तफा, कौशर आलम, फराज वाबुल्लाशाह, धीरज गोविंद राव जगताप, सरफराज अली जाफरी, काजी जहांगीर और अब्दुल्ला उमर को भारतीय दंड संहिता की धारा 121 ए (राष्ट्रद्रोह) के तहत आजीवन कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनायी.

आदेश के मुताबिक, मामले में बाकी चार अभियुक्तों मोहम्मद सलीम, राहुल भोला, मन्नू यादव तथा कुणाल अशोक चौधरी को ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन (प्रतिषेध) अधिनियम’ की धारा-पांच के तहत 10-10 वर्ष की कैद और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनायी गयी. उप निरीक्षक विनोद कुमार ने 20 जून 2021 को इस मामले में लखनऊ के एटीएस थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी.

इन सभी आरोपियों पर तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धारा 417, 120 बी, 121ए, 123, 153ए, 153बी, 295ए और 298 के साथ ही उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3/5/8 के तहत आरोप लगाए गए थे. विशेष लोक अभियोजक एमके सिंह के मुताबिक, उमर गौतम और मामले के अन्य अभियुक्त एक साजिश के तहत धार्मिक उन्माद, वैमनस्य और नफरत फैलाकर देशभर में अवैध धर्मांतरण का गिरोह चला रहे थे. उनके तार दूसरे देशों से भी जुड़े हैं.

सिंह ने बताया कि इसके लिए आरोपी हवाला के जरिए विदेशों से धन भेजे जाने के मामले में भी लिप्त थे. वे आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं और दिव्यांगों को लालच देकर और उन पर अनुचित दबाव बनाकर बड़े पैमाने पर उनका धर्म परिवर्तन करा रहे थे.
पुलिस के मुताबिक, मोहम्मद उमर गौतम को मुफ्ती काजी जहांगीर आलम कासमी के साथ 20 जून 2021 को दिल्ली के जामिया नगर से गिरफ्तार किया गया था.

पुलिस ने बताया कि वे एक संगठन का संचालन कर रहे थे जो उत्तर प्रदेश में मूक- बधिर छात्रों और गरीब लोगों को इस्लाम में धर्मांतरित कराने में शामिल था और इस बात की आशंका है कि इसके लिए उन्हें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से धन मिलता था. मौजूदा पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार उस समय एटीएस के अपर पुलिस महानिदेशक का दायित्व संभाल रहे थे.

उन्होंने बताया था कि उमर गौतम पहले हिंदू था लेकिन उसने मुस्लिम धर्म स्वीकार कर लिया और धर्मांतरण कराने में सक्रिय हो गया.
उन्होंने उमर के हवाले से बताया था कि उसने करीब एक हजार गैर मुस्लिम लोगों को इस्लाम में धर्मांतरित कराया और उनकी मुस्लिमों से शादी कराई है. यह अभियान जामिया नगर में स्थित इस्लामिक दावा सेंटर नामक संस्था के जरिये चलाया जा रहा था.

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