लोथल राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर सभ्यता के इतिहास के बारे में लोगों की समझ विकसित करेगा: मोदी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 15 Oct 2024 08:21 PM
लोथल राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर सभ्यता के इतिहास के बारे में लोगों की समझ विकसित करेगा: मोदी

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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि गुजरात के लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर बनाने के उनकी सरकार के फैसले का उद्देश्य सभ्यता के इतिहास के बारे में लोगों की समझ विकसित करना है. उन्होंने पेशेवरों के सोशल मीडिया मंच लिंक्डइन पर ‘आइए, पर्यटन पर ध्यान केंद्रित करें’ शीर्षक से एक पोस्ट में कहा कि नयी परियोजना निश्चित रूप से इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के बीच समान रूप से उत्साह बढ़ाएगी.

उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास से पर्यटन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, जिसे वह भारत में विकास के एक प्रमुख ताकत के रूप में देखते हैं. उन्होंने कहा, ”जब पर्यटन बढ़ता है तो सभी की आय बढ़ती है. मैं आप सभी अग्रणी और सम्मानित पेशेवरों से आग्रह करता हूं कि आप पर्यटन क्षेत्र में नए अवसरों का पता लगाएं और इस पर अपने विचार मेरे साथ साझा करें.” उन्होंने कहा, ”इस तरह, हम एक मजबूत अर्थव्यवस्था में योगदान देंगे और साथ ही आने वाली पीढि.यों के लिए अपने समृद्ध अतीत को संरक्षित करेंगे. यह परिसर प्राचीन लोथल को डॉक शहर की मिनी प्रतिकृति के रूप में फिर से जीवंत करेगा.”

मोदी ने कहा कि लोथल एक समय सभ्यताओं, विचारों और वस्तुओं का जीवंत समागम स्थल था और खुदाई से इसकी भूमिका एक महत्वपूर्ण समुद्री केंद्र के रूप में दिखती है. उन्होंने कहा कि हजारों साल पहले बनाए गए डॉक, ‘हमारे पूर्वजों के पास सरलता की भावना’ को प्रर्दिशत करते हैं. उन्होंने कहा कि इसकी उन्नत इंजीनियरिंग और शहरी नियोजन आधुनिक पर्यवेक्षकों को विस्मय में डाल देती है, जो हमारे अतीत की प्रतिभा का एक नमूना है.

उन्होंने कहा, ”अफसोस है कि आजादी के बाद के दशकों में हमने अपने इतिहास के कई पहलुओं और कई ऐतिहासिक स्थलों को नजरअंदाज कर दिया, जिससे हमारा समृद्ध अतीत स्मृति से लुप्त हो रहा है.” मोदी ने कहा कि हालांकि, पिछले 10 वर्षों में इस प्रवृत्ति में बदलाव देखा गया है. उन्होंने कहा कि इसी भावना के साथ उनकी सरकार ने एक जीवंत राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर बनाने का फैसला किया है.

उन्होंने कहा, ”इससे सभ्यता के इतिहास की हमारी समझ विकसित होगी.” उन्होंने कहा, ”यह नयी परियोजना निश्चित रूप से इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के बीच उत्साह को प्रज्वलित करेगी. परिसर प्राचीन लोथल को डॉक सिटी की मिनी-प्रतिकृति के रूप में जीवन में वापस लाएगा. इस परिसर के केंद्र में एक प्रतिष्ठित लाइटहाउस संग्रहालय खड़ा होगा, जो 77 मीटर ऊंचा है और यह दुनिया में अपनी तरह का सबसे ऊंचा होगा.”

लोथल अहमदाबाद जिले के धोलका तालुका में आता है और यह राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 47 तथा राज्य राजमार्ग संख्या 8 के निकट स्थित है, जो अहमदाबाद, भावनगर तथा राजकोट जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों को उत्कृष्ट सड़क संपर्क प्रदान करता है. इसके अतिरिक्त, यह अहमदाबाद-भावनगर रेलवे लाइन पर लोथल-भुरखी रेलवे स्टेशन से लगभग छह किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है. यह पुरातात्विक स्थल तीन गांवों से घिरा हुआ है: सरगवाला, उतेलिया और गुंडी, जहां कृषि मुख्य व्यवसाय है.

By Yogesh Kumar Sahu