
भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस प्रशिक्षण शाखा ने अपने सभी केंद्रों को निर्देश दिया है कि वे हाल में भर्ती हुए पुलिसर्किमयों में अनुशासन की भावना विकसित करने और उन्हें भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेने के लिए रामचरितमानस पाठ सत्र आयोजित करें. यह निर्णय तब लिया गया जब कुछ नवनियुक्त पुलिसर्किमयों ने पुलिस मुख्यालय से अनुरोध किया है कि उन्हें उनके घर के नजदीकी प्रशिक्षण केंद्र में भेजा जाए.
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) राजा बाबू सिंह ने प्रशिक्षुओं को ऐसी मांग करने से मना किया और उन्होंने भगवान राम के गुणों व उनके 14 साल के वनवास का वर्णन कर रामचरितमानस के उदाहरण दिए. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अन्य धर्मों के नवनियुक्त पुलिसर्किमयों को इन रामचरितमानस पाठ सत्रों में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा और प्रत्येक प्रशिक्षण केंद्र में यह अभ्यास स्वैच्छिक होगा. बुधवार को राज्य के आठ पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों में लगभग 4,000 नवनियुक्त पुलिसर्किमयों के लिए नौ महीने का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू किया गया जिसकी शुरुआत एडीजी (प्रशिक्षण) राजा बाबू सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से की.
सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उनके कार्यालय को ”प्रशिक्षुओं से कई आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें उनके घर के नज़दीक केंद्र की मांग की गई है.” उन्होंने कहा, ”अगर इसकी अनुमति दी जाती है तो मध्यप्रदेश पुलिस की राज्य-स्तरीय छवि प्रभावित होगी. पुलिस की नौकरी ऐसी है जहां किसी भी कर्मचारी को उसकी क्षेत्रीय या स्थानीय संबद्धता से अलग हटकर कहीं भी सेवा के लिए भेजा जा सकता है.” भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) 1994 बैच के अधिकारी सिंह ने कहा कि प्रशिक्षुओं को भगवान राम के जीवन और गुणों से सीखना चाहिए और अनुशासन के साथ अपना प्रशिक्षण पूरा करना चाहिए.
एडीजी ने कहा कि उन्होंने पुलिस प्रशिक्षण विद्यालयों के प्रमुखों या पुलिस अधीक्षक स्तर के सभी अधिकारियों से कहा है, ”उन्हें प्रतिदिन सोने से पहले सामूहिक रूप से श्री रामचरितमानस के एक या दो अध्यायों का पाठ करने का प्रयास करना चाहिए.” एडीजी ने कहा, ”श्री रामचरितमानस ज्ञान का भंडार है और यह आपको आदर्श मूल्य-आधारित जीवन का मार्ग दिखाता है.” रामचरितमानस भगवान राम पर 16वीं शताब्दी के कवि तुलसीदास द्वारा रचित एक महाकाव्य है.



