वोक्कालिगा समुदाय से संबद्ध महंत ने सिद्धरमैया से पद छोड़ने और शिवकुमार को सत्ता सौंपने की अपील की

बेंगलुरु. सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर जारी सत्ता संघर्ष के बीच वोक्कालिगा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले एक महंत ने सार्वजनिक रूप से कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया से पद छोड़ने और राज्य के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को सत्ता सौंपने का आग्रह किया.
महंत की यह अपील ऐसे समय में आई है, जब सिद्धरमैया मंत्रिमंडल में तीन और उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग बढ़ रही है.

मांग की जा रही है कि वीरशैव-लिंगायत, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदायों से एक-एक उपमुख्यमंत्री बनाया जाए. विश्व वोक्कालिगा महासमस्तन मठ के महंत कुमार चंद्रशेखरनाथ स्वामीजी ने बेंगलुरू के संस्थापक केम्पेगौड़ा की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री की मौजूदगी में शिवकुमार के पक्ष में आवाज उठाई.
कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष और राज्य के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से हैं. यह समुदाय राज्य के दक्षिणी भागों में एक प्रमुख समुदाय है.

चंद्रशेखरनाथ स्वामीजी ने कहा, ” राज्य में हर कोई मुख्यमंत्री बन गया है और सत्ता का सुख सभी ने भोगा है, लेकिन हमारे डी के शिवकुमार अभी तक मुख्यमंत्री नहीं बन पाए हैं, इसलिए अनुरोध है कि सिद्धरमैया कृपया हमारे डी के शिवकुमार को सत्ता सौंप दें और उन्हें आशीर्वाद दें.” सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “सिद्धरमैया अगर मन बना लें तो ही यह संभव है, अन्यथा नहीं, इसलिए ‘नमस्कार’ के साथ मैं सिद्धरमैया से अनुरोध करता हूं कि वह डी.के. शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाएं.”

सिद्धरमैया ने बाद में संवाददाताओं से बातचीत में महंत की अपील पर पूछे गए सवाल पर कहा, “कांग्रेस में आलाकमान होता है और जो भी आलाकमान कहेगा, हम उसका पालन करेंगे.” शिवकुमार ने कहा: “बातें कही जा चुकी हैं… हम दोनों (वह और सिद्धरमैया) राज्य की परियोजनाओं (केंद्र से स्वीकृति लंबित) के संबंध में राज्य के सांसदों से चर्चा करने के लिए नयी दिल्ली जा रहे हैं.” शिवकुमार ने कहा, “स्वामीजी ने जो कहा है, उसे गंभीरता से नहीं लिया जा सकता. राजनीति में लोग प्रशंसा में बोलते हैं, लेकिन हम पार्टी के निर्णय का पालन करेंगे.” सिद्धरमैया के करीबी माने जाने वाले सहकारिता मंत्री के.एन. राजन्ना ने कहा, “कौन पद छोड़ेगा, सिर्फ इसलिए कि उन्होंने (महंत ने) कहा, क्या इसे छोड़ा जा सकता है, महंत को अपना पद छोड़ने दीजिए, मैं स्वामीजी बन जाऊंगा पूछिए कि क्या वह पद छोड़ेंगे. कोई भी पद नहीं छोड़ेगा… मुझे नहीं पता कि महंत ने किस इरादे से ये बातें कही हैं, लोकतंत्र में उन्हें बोलने का अधिकार है.”

गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि महंत ने अपनी निजी राय साझा की होगी लेकिन उनका मुख्यमंत्री पद से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि मुख्यमंत्री का चुनाव राजनीतिक दल और उसके विधायकों की भागीदारी वाली प्रक्रिया के बाद होता है. विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि यह घटनाक्रम साबित करता है कि सरकार के भीतर मतभेद है और यह भारतीय जनता पार्टी के उस दावे को भी सही साबित करता है जिसमें कहा गया है कि यह सरकार लंबे समय तक नहीं टिकेगी.

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