
मुंबई. हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता कमल हासन ने कहा कि कलाकार देश के नागरिक हैं और उन्हें अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने का पूरा अधिकार है. इसी के साथ उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सरकार से सवाल पूछने वाली फिल्में बनाना ‘जोखिम’ भरा है.
अभिनेता ने अपनी आगामी फिल्म ‘हिंदुस्तानी 2: जीरो टॉलरेंस’ के ट्रेलर लॉन्च के अवसर पर यह बात कही. इस फिल्म में वह एक ऐसे सेनापति की भूमिका में नजर आएंगे, जिन्होंने भारत को अंग्रेजों से आजादी दिलाई और फिर बाद में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी.
तमिल में ‘इंडियन 2: जीरो टॉलरेंस’ शीर्षक वाली यह आगामी फिल्म कमल की 1996 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली ‘इंडियन’ फिल्म का ‘सीक्वल’ है, जिसमें उन्होंने दोहरी भूमिका निभाई थी. शंकर ही इस फिल्म का निर्देशन करेंगे. यह पूछे जाने पर कि क्या आज सरकार से सवाल पूछने वाली फिल्में बनाना कठिन है? इसके जवाब में अभिनेता ने कहा कि यह समस्या ब्रिटिश शासन के समय से चली आ रही है.
कमल हासन ने यहां संवाददाताओं से कहा, ”लोग तब भी फिल्में बनाते थे. हम ऐसी फिल्में बनाते रहेंगे और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि सत्ता पर कौन बैठा है. यह सिर्फ फिल्म निर्माता का अधिकार नहीं है बल्कि सवाल पूछना नागरिकों का भी अधिकार है.” उन्होंने कहा, ”हम कलाकार आप लोगों के बीच बहुत से लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं. तालियों की बदौलत हम मानते हैं कि हम आपके प्रतिनिधि हैं इसलिए हम सजा के बारे में सोचे बिना निर्भीकता से बात करते हैं. हां, इसमें जोखिम जरूर है और सरकार नाराज भी हो सकती है, लेकिन आपकी कमजोर तालियां उस आग को बुझा देती हैं इसलिए तालियों की गड़गड़ाहट को और तेज करें.” कमल हासन (69) ने कहा कि देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के लिए न केवल नेता बल्कि नागरिक भी जिम्मेदार हैं.
उन्होंने कहा, ”हम सभी भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार हैं और हमें अपनी सोच बदलनी चाहिए. अपनी सोच बदलने का सबसे अच्छा समय चुनाव के दौरान होता है. ये सिर्फ याद दिलाते हैं कि हम कितने भ्रष्ट हो गए हैं… भ्रष्टाचार की वजह से कुछ भी नहीं बदला है. सामूहिक चेतना की बदौलत ही सब कुछ बदलेगा.” अभिनेता-फिल्म निर्माता ने कहा कि वे महात्मा गांधी के प्रशंसक हैं, लेकिन वे उदारता की विचारधारा को नहीं मानते. कमल ने साल 2000 में रीलीज हुई फिल्म ‘हे राम’ का निर्देशन और अभिनय भी किया था. यह फिल्म महात्मा गांधी की हत्या पर आधारित थी.
उन्होंने कहा, “मैं गांधी जी का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं. वे कहते हैं कि उन्होंने आपको सहनशीलता सिखाई, ‘आप सहनशीलता के बारे में क्या सोचते हैं?’ मैं कहता हूं कि मैं उस सहिष्णुता में बहुत ज्यादा यकीन नहीं रखता. गांधी जी मेरे हीरो हैं. लेकिन आप किसको बर्दाश्त करते हैं? किसी दोस्त को तो नहीं ही बर्दाश्त करना पड़ता.” उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि दुनिया में दोस्ती बढ़े. आप जो बर्दाश्त करते हैं, वह सिरदर्द है. जो कुछ भी समाज के लिए सिरदर्द है, उसके प्रति आपकी सहनशीलता शून्य होनी चाहिए. कोई दवा खोजें, उसे खत्म करें.”



