
राजौरी/जम्मू. जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्री माता वैष्णोदेवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (एसएमवीडीआईएमई) में योग्यता आधारित प्रवेश का बचाव करते हुए मंगलवार को कहा कि संविधान के तहत धर्म के आधार पर सीटें आवंटित नहीं की जा सकतीं.
अब्दुल्ला ने यहां संवाददाताओं से कहा, ”जब विश्वविद्यालय में चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित करने का फैसला लिया गया था, तो यह पहले से ही ज्ञात था कि धर्म के आधार पर सीटें आवंटित नहीं की जा सकतीं. मंजूरी नीट के आधार पर दी गई थी. राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (नीट) एकमात्र अर्हता है.” श्रीनगर से पुंछ और राजौरी होते हुए जम्मू जा रहे नेशनल कांफ्रेंस के नेता ने कहा कि जिन लोगों ने नीट के माध्यम से प्रवेश पाया है, उन्हें अब उनके धर्म के कारण दंडित किया जा रहा है.
उन्होंने कहा, ”न तो कानून और न ही संविधान इसकी अनुमति देता है, और न ही विश्वविद्यालय की नीति इस आधार पर प्रवेश से इनकार करने की अनुमति देती है.” अब्दुल्ला ने महाविद्यालय में प्रवेश के लिए धार्मिक आधार पर भेदभाव करने के प्रयासों की आलोचना करते हुए कहा कि केवल योग्यता ही चयन का आधार है.
उन्होंने कहा, ”अगर आप धर्म के आधार पर सीट आवंटन चाहते हैं, तो आपको अनुदान और मुफ्त में दी जाने वाली जमीन लेना बंद करना होगा. आपको दोनों के लिए भुगतान करना होगा. तभी आप विश्वविद्यालय के नियमों में बदलाव करके किसी एक धर्म के लिए सीटें आरक्षित कर सकते हैं. हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी.” अब्दुल्ला ने जम्मू में एक पत्रकार के घर को ध्वस्त किये जाने के मामले पर कहा कि यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है. उन्होंने कहा, ”मैंने श्रीनगर में कहा था कि यह हमारे हाथ में नहीं है. जिन लोगों ने अधिकारी की नियुक्ति की है और जिन्होंने ऐसा कदम उठाया है, उनसे पूछा जाना चाहिए.”



