मोदी संविधान नहीं पढ़े हैं, इसलिए यह उनके लिए ‘खाली’ है: राहुल गांधी

नंदूरबार/नांदेड़. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लगता है कि भारत का संविधान ‘खाली’ है क्योंकि उन्होंने (मोदी ने) इसे कभी पढ़ा ही नहीं है. उन्होंने 20 नवंबर को होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले नंदूरबार और नांदेड़ में चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि मोदी ने देश के आधारभूत दस्तावेज को पढ़ा होता तो वह अलग नीतियां अपनाते.

गांधी की यह टिप्पणी मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उस दावे के बाद आई है जिसमें कहा गया था कि कांग्रेस नेता अपनी चुनावी रैलियों में संविधान की एक प्रति दिखा रहे हैं जिसके अंदर ‘खाली’ पन्ने हैं. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गांधी ने उत्तर महाराष्ट्र के आदिवासी बहुल नंदूरबार में कहा, ”प्रधानमंत्री कहते हैं कि मैं एक ‘खाली’ संविधान दिखाता हूं. संविधान उनके (मोदी) लिए खाली है, क्योंकि उन्होंने इसे अपने जीवन में कभी पढ़ा ही नहीं है. उन्हें नहीं पता कि इसमें क्या लिखा है.”

मध्य क्षेत्र के नांदेड़ में गांधी ने कहा कि संविधान भेदभाव करना नहीं सिखाता. उन्होंने कहा, ”यदि मोदी ने संविधान पढ़ा होता तो वह ऐसा व्यवहार नहीं करते. मोदी ने 25 अमीर लोगों का 16 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया, लेकिन गरीबों और किसानों का नहीं….” गांधी ने मणिपुर में जारी संघर्ष का भी जिक्र किया और कहा, ”देश के इतिहास में हमने कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी है, जहां एक राज्य एक साल से अधिक समय से जल रहा हो लेकिन प्रधानमंत्री ने वहां का दौरा तक नहीं किया हो.” भाजपा नेता देवेन्द्र फडणवीस द्वारा उठाए गए सवालों के संदर्भ में राहुल गांधी ने कहा, ”इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि संविधान का रंग क्या है, लाल या नीला, महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके अंदर क्या लिखा है और हम अपने जीवन की कीमत पर भी इसकी रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.”

गांधी ने कहा कि संविधान में जनजातीय लोगों को आदिवासी कहा गया है, जिसका अर्थ है भूमि, जंगल और अन्य संसाधनों के मूल मालिक लेकिन भाजपा जानबूझकर उन्हें ‘वनवासी’ के रूप में र्विणत करती है. उन्होंने कहा कि भाजपा नहीं चाहती कि आदिवासी बच्चे पढ़ाई करें और डॉक्टर या इंजीनियर बनें क्योंकि वह उन्हें जंगलों तक ही सीमित रखना चाहती है.

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि देश में आठ प्रतिशत आदिवासी आबादी के मुकाबले सरकार और अन्य संस्थाओं में उनकी भागीदारी लगभग नगण्य है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार चलाने वाले 90 शीर्ष नौकरशाहों में सिर्फ एक अधिकारी आदिवासी समुदाय से हैं और उन्हें भी दरकिनार कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि जाति आधारित गणना इस भेदभाव को समाप्त करने का एकमात्र समाधान है. कांग्रेस नेता ने विपक्ष के इस आरोप को भी दोहराया कि महाराष्ट्र के लिए निर्धारित विकास परियोजनाओं को गुजरात जैसे अन्य राज्यों में स्थानांतरित किया जा रहा है.

गांधी ने आरोप लगाया कि वेदांता फॉक्सकॉन, टाटा एयरबस, आईफोन विनिर्माण संयंत्र जैसी परियोजनाएं अन्य राज्यों को दिए जाने से महाराष्ट्र में लगभग पांच लाख नौकरियां खत्म हो गईं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस और इसके सहयोगी दलों वाले गठबंधन महा विकास आघाडी (एमवीए) की सरकार यदि सत्ता में आती है तो यह सुनिश्चित किया जायेगा कि महाराष्ट्र की परियोजनाएं महाराष्ट्र में ही रहें और गुजरात की परियोजनाएं गुजरात में ही रहें. उन्होंने कहा कि जिस तरह मोदी ने ”कुछ अरबपतियों का 16 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया” उसी तरह एमवीए सरकार किसानों का तीन लाख रुपये तक का कर्ज माफ करेगी. उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान, सोयाबीन और कपास की खरीद का भी आश्वासन दिया.

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