मानसून सत्र सरकार और देश के लिए उपयोगी, विपक्ष के लिए विफलता वाला : रीजीजू

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 21 Aug 2025 07:38 PM
मानसून सत्र सरकार और देश के लिए उपयोगी, विपक्ष के लिए विफलता वाला : रीजीजू
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नयी दिल्ली. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बृहस्पतिवार को कहा कि संसद का मानसून सत्र देश और सरकार के लिए ”उपयोगी और सफल” था, लेकिन विपक्ष के ”असफल और नुकसानदेह” रहा. लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद रीजीजू ने कहा कि सरकार ने अपना सारा कामकाज निपटाया और सत्र की ”सफलता दर 100 प्रतिशत” रही.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सत्ता पक्ष को हंगामे के बीच अपने विधेयक पारित करने पड़े क्योंकि विपक्ष ने चर्चा की अनुमति देने के अनुरोध पर ध्यान नहीं दिया. मंत्री का कहना था, ”सरकार को राष्ट्रहित में जनता के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए.” उन्होंने कहा कि विपक्ष अपने विरोध प्रदर्शनों के ज.रिए सरकार को काम करने से नहीं रोक सकता. विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि उनके सदन के नेता और सचेतक कई बार सत्र के दौरान सरकार के साथ अनौपचारिक सहमति बना लेते थे, लेकिन दोनों सदनों में इसे लागू नहीं कर पाते थे.

उन्होंने कहा, ”वे दबाव में हो सकते हैं.” रीजीजू ने कहा, ”कांग्रेस के नए सांसद कैसे सीखेंगे? उनके नेता तो कुछ सीखते ही नहीं.” बिहार में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध कर रहे एकजुट विपक्ष ने 21 जुलाई से शुरू हुए पूरे सत्र के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा की मांग पर जोर दिया, जिससे दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित रही. सरकार ने इस आधार पर उनकी मांग को खारिज कर दिया कि यह मुद्दा न्यायालय में विचाराधीन है और निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर संसद में चर्चा नहीं हो सकती. इस सत्र में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा के दौरान लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दो दिन सुचारू रूप से चली.

रीजीजू ने कहा कि विरोध और असहमति लोकतांत्रिक बातें हैं, लेकिन संसद और सरकार को काम करने से रोकना और बाधित करना अलोकतांत्रिक है. सरकार ने सत्र के दौरान लोकसभा में 14 विधेयक पेश किए और 12 विधेयकों को मंजूरी दिलाई. राज्यसभा में 15 विधेयक पारित हुए.

रीजीजू ने गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बुधवार को लोकसभा में पेश किए गए तीन विधेयकों के खिलाफ विपक्ष के भारी विरोध की भी आलोचना की. इन विधेयकों में गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिन तक गिरफ्तार रहने की स्थिति में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से अनिवार्य रूप से हटाने का प्रावधान है. मंत्री ने कहा कि यह एक ”क्रांतिकारी” प्रस्ताव है और कुछ दल खुद को बचाने के लिए कानून बनाते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने कार्यालय को ही इस प्रस्तावित कानून के दायरे में लाने का फैसला किया.

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