नोएडा/नयी दिल्ली. नोएडा के सेक्टर 93ए में सुपरटेक के ट्विन टावर को रविवार दोपहर ध्वस्त किये जाने के बाद आसपास की इमारतें सुरक्षित नजर आईं. हालांकि, एक विस्तृत ‘आॅडिट’ जारी है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. ट्विन टावर को गिराने का कार्य मुंबई की कंपनी एडिफिस इंजीनियंिरग को सौंपा गया था. एडिफिस इंजीनियंिरग के उत्कर्ष मेहता ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘ट्विन टावर को सफलतापूर्वक गिरा दिया गया. आसपास की इमारतों को कोई ढांचागत नुकसान नहीं पहुंचा है. स्थल का निरीक्षण जारी है.’’ संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) लव कुमार ने कहा, ‘‘ट्विन टावर ध्वस्त किये जाने के बाद आसपास की इमारतों को नुकसान पहुंचने की कोई सूचना नहीं है. विस्तृत ‘आॅडिट’ जारी है.’’
ट्विन टावर गिराए जाने से हमें 500 करोड़ रुपये का नुकसान: सुपरटेक चेयरमैन
रियल्टी फर्म सुपरटेक लिमिटेड के चेयरमैन आर के अरोड़ा ने रविवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद नोएडा स्थित ट्विन टॉवर इमारत को गिराए जाने से कंपनी को करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. अरोड़ा ने पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में कहा कि इस इमारत को ढहाए जाने से उसके निर्माण पर आई लागत एवं कर्ज पर देय ब्याज के रूप में कंपनी को करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है.
अरोड़ा ने कहा, ‘‘हमारा कुल नुकसान करीब 500 करोड़ का हुआ है. इसमें इमारत के निर्माण और जमीन की खरीद पर आई लागत के अलावा नोएडा प्राधिकरण को तमाम मंजूरियों के लिए दिए गए शुल्क और बैंकों को कर्ज पर दिया गया ब्याज शामिल है. इसके अलावा हमें इन टावर में फ्लैट खरीदने वाले ग्राहकों को भी 12 प्रतिशत की दर से ब्याज देना पड़ा है.’’ ये
ध्वस्त किए गए ट्विन टावर के आसपास श्वास संबंधित बीमारी से पीड़ित लोग कुछ दिन न जाएं : चिकित्सक
नोएडा स्थित सुपरटेक के लगभग 100 मीटर ऊंचे ट्विन टावर को रविवार को जमींदोज किये जाने के बीच चिकित्सकों ने उसके आसपास रह रहे और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को अधिक सतर्क रहने और संभव हो तो कुछ दिन इलाके से दूर रहने की सलाह दी है. ट्विन टावर को ध्वस्त करने से अनुमानित 80 हजार टन मलबा निकला है और विस्फोट के दौरान हवा में धूल का विशाल गुब्बार देखने को मिला.
चिकित्सकों का कहना है कि अधिकतर धूल कण का आकार पांच माइक्रोन या इससे कम है जो अनुकूल मौसमी परिस्थतियों जैसे तेज हवाएं और बारिश की अनुपस्थिति में कुछ दिन वातावरण में ही रह सकते हैं. उन्होंने कहा कि धूलकण से हुए भारी प्रदूषण की वजह से आंखों, नाक और त्वचा में खुजली, खांसी, छींक, सांस लेने में परेशानी, फेफड़ों में संक्रमण, नाक बंद होने, दमा और दिल की बीमारी की शिकायत हो सकती है.
सफदरजंग अस्पताल में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ.जुगल किशोर ने कहा, ‘‘हवा की गति कम होने की वजह से धूल कण कुछ समय तक हवा में ही रह सकते हैं. जो लोग श्वास समस्याओं जैसे दमा और ब्रोंकाइटिस का सामना कर रहे हैं, उन्हें संभव हो तो कुछ दिन उस इलाके में जाने से बचना चाहिए.’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे लोगों को कम से कम 48 घंटे तक प्रभावित इलाके में जाने से बचना चाहिए. जो लोग आसपास के इलाके में रह रहे हैं उन्हें कुछ दिन व्यायाम से बचना चाहिए.’’ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के ‘क्रिटिकल केयर’ के सहायक प्रोफेसर डॉ.युद्धवीर ंिसह ने कहा, ‘‘वातावरण में मौजूद 2.5 माइक्रोन से कम आकार के मौजूद कण समस्या हैं. इससे खांसी, छींक, दमा की शिकायत, फेफड़ों में संक्रमण, नाक बंद होना, सांस लेने में समस्या के मामले बढ़ सकते हैं. वायरस के प्रसार में भी ये सूक्ष्म कण सहायक होते हैं और इससे संक्रमण दर बढ सकती है.’’
ट्विन टावर खाली कराने के आखिरी समय में एक व्यक्ति सोता मिला, उसे बाहर निकाला गया
नोएडा में ट्विन टावर गिराये जाने से पहले एमराल्ड कोर्ट हाउंिसग सोसाइटी के एक ‘विशेष कार्यबल’ ने एक महीने पहले बहुत बारीकी से बनायी गयी योजना के तहत सोसाइटी के सभी लोगों को वहां से बाहर निकाल लिया था. सोसाइटी के बांिशदे शुक्रवार से ही बाहर जाने लगे थे. जिन्हें नोएडा से कहीं बाहर जाना था वे पहले ही चले गये थे और जिनकी कहीं आसपास ठहरने की योजना थी, उन्होंने रविवार सुबह तक इंतजार किया. इसी सोसाइटी में ये दोनों अवैध टावर हैं.
सुबह सात बजे बच्चों एवं बुजुर्गों समेत लगभग सभी लोग सोसाइटी के विशेष कार्यबल के सुनियोजित प्रयास के तहत 15 आवासीय टावर को खाली कर चुके थे. एमराल्ड कोर्ट के गौरव मेहरोत्रा ने कार्यबल का नेतृत्व किया. हालांकि सुबह सात बजे से ठीक कुछ देर पहले एक सुरक्षागार्ड ने विशेष कार्यबल को एक टावर की ऊपरी मंजिल पर एक व्यक्ति के रह जाने की सूचना दी. विशेष कार्यबल के सदस्य नरेश केशवानी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘टावर खाली कराने की हमारी दोहरी पुष्टिकरण प्रक्रिया के चलते हमें इसके बारे में पता चला. जानकारी सामने आयी कि एक को छोड़कर सभी लोग टावर से चले गये. यह भी पता चला कि यह व्यक्ति अपार्टमेंट में गहरी नींद में सो रहा था और टावर खाली करने की समय सीमा की बात उसके दिमाग से निकल गयी थी.’’
केशवानी ने कहा, ‘‘किसी तरह सुरक्षार्किमयों ने उसे जगाया और उसे महज सात बजे के आसपास टावर से बाहर लाया गया.’’ उन्होंने कहा कि विशेष कार्यबल ने एक महीने तक ंिचतन-मनन किया और उसने दोहरी पुष्टिकरण प्रक्रिया बनायी. उन्होंने कहा, ‘‘इसी दोहरे पुष्टिकरण प्रक्रिया के चलते ऐसा हो सका कि सो रहे व्यक्ति की पहचान हो पायी और उसे सुरक्षित बाहर निकाला गया.’’
ट्विन टॉवर को ढहाने से बिल्डरों, प्राधिकरण का अहंकार भी ध्वस्त हुआ: एफपीसीई
घर खरीदारों की संस्था फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव अफर्ट्स (एफपीसीई) ने नोएडा में सुपरटेक के ट्विन टॉवर गिराए जाने की कार्रवाई को फ्लैट मालिकों के लिए एक बड़ी जीत बताया और कहा कि इस कदम से बिल्डरों और विकास प्राधिकरणों का अहंकार भी ध्वस्त हुआ है.
एफपीसीई ने कहा कि इस मामले में विकास प्राधिकरणों की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए. करीब 100 मीटर ऊंचे ट्विन टॉवर एपेक्स और सियान को ढहाने का आदेश उच्चतम न्यायालय ने पिछले वर्ष अगस्त में दिया था. इन दो टावर में 900 से अधिक फ्लैट थे.
एफपीसीई के अध्यक्ष अभय उपाध्याय ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘जब ये टावर गिरे तो मेरी पहली प्रतिक्रिया यह थी कि यह केवल इमारत का गिरना नहीं है बल्कि बिल्डरों और प्राधिकरणों के अहंकार और उनकी इस सोच का ढहना है कि वे जो चाहे कर सकते हैं.’’ उपाध्याय ने इस कार्रवाई को फ्लैट खरीदारों की बड़ी जीत बताया.
उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने प्राधिकरण के जो लोग इसमें शामिल थे उनकी पहचान और उनकी जिम्मेदारी तय नहीं की, उन लोगों की भी नहीं जो बिल्डरों के कहने पर उन्हें प्रभावित कर रहे थे.’’ एफपीसीई अध्यक्ष ने कहा, ‘‘यह बेहतर होता अगर न्यायालय ने ऐसा किया होता या फिर सीबीआई जांच का आदेश दिया होता जिससे कि इसमें शामिल लोगों को सामने लाया जा सके. विभागीय जांच में तो लोगों को बचाया जा सकता है.’’
नोएडा में ट्विन टावर ध्वस्त किये जाने पर लोगों ने कहा- जमींदोजÞ हुईं ‘भ्रष्टाचार की इमारतें’
नोएडा में रविवार को सैंकड़ों लोग सुपरटेक के 100 मीटर ऊंचे ट्विन टावर को ध्वस्त किये जाने के गवाह बने. लोगों ने अवैध रूप से निर्मित इन ढांचों के खिलाफ की गई कार्रवाई को सही ठहराते हुए इस कदम की प्रशंसा की. कुछ लोगों ने कहा कि यह कार्रवाई संदेश देता है कि देश में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, वहीं अन्य लोगों ने कहा कि यह कार्रवाई जरूरी थी.
इन इमारतों को विस्फोट कर ध्वस्त किये जाने से पहले, ट्विन टावर के चारों ओर 500 मीटर के दायरे को ”निषिद्ध क्षेत्र” घोषित कर दिया गया, जहां आम लोगों को जाने की अनुमति नहीं थी. इलाके में भारी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किये गये थे. नोएडा और आसपास के शहरों के लोग इस कार्रवाई को देखने के लिए जेपी फ्लाईओवर मैदान के पास जमा हुए. कई लोग दोपहर ढाई बजे ट्विन टावर को ध्वस्त किये जाने से कुछ घंटे पहले एक ऐसी जगह ढूंढते नजर आए, जहां से ढांचों को ढहाए जाने के दृश्य बिल्कुल साफ नजर आए.
पुरुषोत्तम मिश्रा (42) नामक व्यक्ति ने कहा, ”ऐसा लगा कि जैसे भ्रष्टाचार की इमारतें जमींदोज हो गईं हों.” उन्होंने कहा, ”यह अद्भुत था. हम यह देखने के लिए दो घंटे से इंतजार कर रहे थे. यह रसूखदार लोगों को एक कड़ा संदेश देगा.” मिश्रा ने कहा, ”टावर ताश के पत्तों की तरह बिखर गया. कितनी जल्दी यह सब हो गया. ” दिल्ली के उत्तम नगर से आए आशीष सुमन ने कहा, ”यह इसी का हकदार था. ” उन्होंने कहा, ”यह कई दिनों तक खबरों में रहा. आखिरकार अब यह सब खत्म हो गया. इससे सभी को एक कड़ा संदेश मिला है कि भारत में भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.”