अल्पसंख्यकों के खिलाफ कभी नहीं बोला, लेकिन किसी को ‘खास नागरिक’ स्वीकार करने को तैयार नहीं: मोदी

भुवनेश्वर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि उन्होंने अल्पसंख्यकों के खिलाफ कभी एक शब्द भी नहीं बोला और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) केवल आज ही नहीं, बल्कि कभी भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं रही है. प्रधानमंत्री ने हालांकि स्पष्ट किया कि वह किसी को भी ‘खास नागरिक’ के तौर पर स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं. मोदी ने रविवार रात ‘पीटीआई वीडियो’ के साथ साक्षात्कार में ये बातें कहीं. विपक्ष के इन आरोपों के बीच कि उनके चुनावी भाषण समाज को बांटने वाले और ध्रुवीकरण करने वाले हैं, प्रधानमंत्री की टिप्पणियों को अल्पसंख्यकों को लेकर अब तक का सबसे स्पष्ट बयान माना जा रहा है.

प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने संविधान के धर्मनिरपेक्ष तानेबाने की अवहेलना की है. उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान उनके भाषणों का उद्देश्य वोट बैंक की राजनीति के साथ-साथ अल्पसंख्यकों का तुष्टीकरण करने की विपक्षी दलों की कोशिशों का पर्दाफाश करना है.

साक्षात्कार के दौरान मोदी से जब उनके बयानों के कारण अल्पसंख्यकों के बीच पैदा हुई आशंकाओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ”मैंने अल्पसंख्यकों के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला है. मैं केवल कांग्रेस की वोट बैंक की राजनीति के खिलाफ बोल रहा हूं. कांग्रेस संविधान के विरुद्ध काम कर रही है, यही बात मैं कहता रहा हूं.” मोदी ने कहा कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर और जवाहरलाल नेहरू समेत भारतीय संविधान के निर्माताओं ने फैसला किया था कि धर्म के आधार पर कोई आरक्षण नहीं होगा.

उन्होंने कहा, ”अब आप उससे पलट रहे हो. उनका खुलासा करना मेरी जिम्मेदारी है. उस समय संविधान सभा में मेरी पार्टी का कोई सदस्य नहीं था. यह देशभर के उत्कृष्ट लोगों की सभा थी.” प्रधानमंत्री से जब एक बार फिर पूछा गया कि क्या उनके चुनावी भाषणों में कभी अल्पसंख्यकों को निशाना नहीं बनाया गया तो उन्होंने कहा, ”भाजपा कभी अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं रही. केवल आज ही नहीं, बल्कि कभी भी नहीं.” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस तुष्टीकरण के रास्ते पर चलती है. प्रधानमंत्री ने कहा, ”वे लोग तुष्टीकरण के रास्ते पर चलते हैं, मैं संतुष्टीकरण के रास्ते पर चलता हूं.”

उन्होंने कहा, ”उनकी राजनीति तुष्टीकरण की है, मेरी राजनीति ‘सबका साथ सबका विकास’ की है. हम ‘सर्व धर्म समभाव’ में विश्वास रखते हैं. हम सभी को अपने साथ लेकर चलना चाहते हैं. हम किसी को खास नागरिक के तौर पर स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, बल्कि सभी को समान समझते हैं.” प्रधानमंत्री से यह भी पूछा गया कि क्या उन्हें वाकई लगता है कि कांग्रेस सत्ता में आई तो हिंदुओं की संपत्ति को मुसलमानों को दे देगी या केवल यह प्रचार के लिए कही गई बात थी.

इस पर मोदी ने कहा, ”यह केवल मेरे इस तरह से सोचने का सवाल नहीं है. बिना किसी तर्क के प्रचार करना पाप है. मैंने कभी ऐसा पाप नहीं किया और ना ही करना चाहूंगा. उन्होंने (विपक्ष ने) ऐसे अतार्किक प्रचार अभियान चलाए हैं.” प्रधानमंत्री ने माना कि जिस दिन कांग्रेस का घोषणापत्र जारी किया गया था, उस दिन उन्होंने कहा था कि इस पर मुस्लिम लीग की छाप है. उन्होंने कहा, ”कांग्रेस पार्टी को उसी दिन मेरी बात का खंडन करना चाहिए था और कहना चाहिए था कि ‘मोदी जी यह सही नहीं है’.”

मोदी ने दावा किया कि कांग्रेस के घोषणापत्र में ठेके देने में अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण का वादा किया गया. उन्होंने कहा, ”आप एक पुल बनाना चाहते हैं तो ठेका लेने के लिए बोली कौन लगाएगा? संसाधनों, विशेषज्ञता, प्रौद्योगिकी वाला कोई व्यक्ति. लेकिन अगर आप वहां भी आरक्षण लाना चाहेंगे तो मेरे देश के विकास का क्या होगा?” कांग्रेस नेताओं ने मोदी पर उनके घोषणापत्र को संदर्भ से परे तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने का आरोप लगाया है. मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 2006 में राष्ट्रीय विकास परिषद के एक सम्मेलन में दिए गए इस बयान का उल्लेख किया कि देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है.

प्रधानमंत्री ने कर्नाटक में सभी मुस्लिमों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण श्रेणी के तहत लाने के कांग्रेस नीत राज्य सरकार के फैसले का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, ”उन्होंने ओबीसी आरक्षण में लूट की.” मोदी ने कहा, ”मेरा मानना है कि इन्हीं लोगों ने अपनी चुनावी राजनीति के लिए हमारे संविधान में धर्मनिरपेक्षता की भावना को तबाह कर दिया. मैं संविधान की उस भावना को बहाल करना चाहता हूं. इसलिए इन लोगों की कलई खुलना जरूरी है.”

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