
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडे द्वारा लगाए गए नकली दवाओं और कोडीन सिरप के सेवन से हुई ‘मौतों’ के आरोपों को नकारते हुए कहा कि अभी तक ऐसा कोई मामला राज्य सरकार के संज्ञान में नहीं आया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सिरप को अवैध तरीके से अन्य स्थानों पर भेजने के मामलों पर स्वापक ओषधि और मन: प्रभावी पदार्थ अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है.
आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कोडीन सिरप मामले में शामिल सबसे बड़े थोक विक्रेता को विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने 2016 में पहली बार गिरफ्तार किया था, उसे सपा सरकार के सत्ता में रहने के दौरान लाइसेंस जारी किया गया था.
उन्होंने सार्वजनिक रूप से प्रसारित हो रही तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा, ह्लजब भी राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे मुद्दे उठते हैं, कुछ लोग तुरंत देश छोड़कर भाग जाते हैं. मुझे लगता है कि आपके लोगों के साथ भी ऐसा ही हो रहा होगा.ह्व सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष द्वारा उठाए गए इस मुद्दे का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मामला ह्लराजनीतिक रूप से प्रेरितह्व प्रतीत होता है.
उन्होंने कहा, ”जब कोई मुद्दा बेवजह उठाया जाता है, तो ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ वाली कहावत याद आ जाती है.” मुख्यमंत्री ने कहा, ह्लउत्तर प्रदेश में आज तक नकली दवाओं से मौत का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है.” साथ ही उन्होंने कहा कि प्रवर्तन एजेंसियां सतर्क रहती हैं.
आदित्यनाथ ने कहा, ह्लखाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) समय-समय पर छापेमारी करता है और दोषी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करता है.ह्व उन्होंने स्पष्ट रूप से यह भी कहा, ह्लउत्तर प्रदेश में कोडीन सिरप से कोई मौत नहीं हुई है. सिरप को अवैध तरीके से अन्य जगहों पर भेजे जाने से संबंधित मामलों में एनडीपीएस अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है और राज्य सरकार ने अदालत में सफलतापूर्वक अपना पक्ष रखा है.” आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में कोडीन सिरप का उत्पादन नहीं होता है, और राज्य में केवल इसके भंडार और थोक विक्रेता हैं.
उन्होंने कहा, ह्लइसका उत्पादन हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में होता है. मौत के जो मामले सामने आए हैं वे अन्य राज्यों से हैं और तमिलनाडु में निर्मित सिरप से जुड़े थे.ह्व इस मामले को “मिलावट का नहीं, बल्कि अवैध रूप से माल की हेराफेरी” बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सहारनपुर, गाजियाबाद, वाराणसी, लखनऊ और कानपुर सहित जिलों के थोक व्यापारी सिरप को उन राज्यों और देशों में भेज रहे हैं जहां प्रतिबंध है, जिससे इसका दुरुपयोग हो रहा है.
उन्होंने कहा, ह्लऐसी दवाइयों का सेवन बिना चिकित्सक की सलाह के नहीं किया जा सकता, विशेषकर बच्चों द्वारा.ह्व उन्होंने कहा कि खांसी के इलाज के लिए डॉक्टर आमतौर पर यह सिरप लिखते हैं. अब तक की गई कार्रवाई का विवरण देते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने 79 मामले दर्ज किए हैं, 225 लोग नामजद हैं और 78 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
उन्होंने कहा, ”134 फर्म पर छापे मारे गए हैं. इस रैकेट से जुड़े लेन-देन की एसटीएफ जांच कर रही है, और अगर गहराई से जांच की जाए तो समाजवादी पार्टी के नेताओं या पदाधिकारियों से इसके संबंध सामने आते हैं.” मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वासन दिया कि किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा.
उन्होंने कहा, ” चिंता न करें, समय आने पर (आरोपियों के खिलाफ) बुलडोजर जैसी कार्रवाई भी की जाएगी. तब नारेबाजी न कीजिएगा.” बाद में जारी एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी ने कोडीन कफ सिरप प्रकरण में अभियुक्तों के तार समाजवादी पार्टी से जुड़े होने का संकेत देते हुए कहा कि ‘मामले का सरगना आलोक सिपाही पक्का सपाई है’.
उन्होंने फोटो दिखाते हुए कहा कि एक और आरोपी अमित यादव तस्वीर में अखिलेश यादव के साथ दिख रहा है और वह समाजवादी पार्टी के युवजन सभा से जुड़ा रहा है. योगी ने बताया कि विभोर राणा का लाइसेंस समाजवादी सरकार में जारी हुआ था और सपा से जुड़े आलोक सिपाही को हमारी सरकार ने बर्खास्त किया.
उन्होंने कहा कि कोडीन कफ सिरप प्रकरण में पुलिस महानिरीक्षक के नेतृत्व में एसआईटी का गठन कर कार्रवाई की जा रही है और जल्द ही दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा. मुख्यमंत्री ने विपक्ष के हंगामे का जवाब देते हुए कहा कि जब समाजवादी पार्टी से जुड़े आरोपियों पर कार्रवाई होगी तो सपा के लोग ही सबसे पहले फातिहा पढ़ने जाएंगे.



