जी7 शिखर सम्मेलन में जेलेंस्की की कूटनीतिक अपीलों के कारण पीछे छूटा परमाणु निरस्त्रीकरण का मुद्दा

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Mon, 22 May 2023 01:29 PM
जी7 शिखर सम्मेलन में जेलेंस्की की कूटनीतिक अपीलों के कारण पीछे छूटा परमाणु निरस्त्रीकरण का मुद्दा
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तोक्यो: इस साल के जी7 शिखर सम्मेलन का आयोजन स्थल हिरोशिमा दुनिया के उन चुंिनदा स्थानों में से एक है जो युद्ध की विभीषिका की याद दिलाते हैं। हिरोशिमा शांति स्मारक पार्क में ‘ए-बॉम्ब डोम’ आसपास के इलाकों में बचे उन ढांचों में से एक है जो अगस्त 1945 में परमाणु बम हमले में ध्वस्त नहीं हो पाए थे लेकिन खंडहर बन गए थे। शहर के आसपास विस्फोट में बच गए पेड़ भी हैं और मंदिरों के पत्थरों तथा मूर्तियों पर जलने के निशान हैं जो यह दिखाते हैं कि हिरोशिमा शहर पर हुए परमाणु हमले के बाद विकिरण कितने बड़े पैमाने पर हुआ था।

इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने जी7 के 2023 के शिखर सम्मेलन के लिए हिरोशिमा को क्यों चुना। यह न केवल उनका चुनावी निर्वाचन क्षेत्र हैं और यहां उनकी पारिवारिक जड़ें हैं बल्कि वह परमाणु हथियार मुक्त विश्व के भी पैरोकार हैं। ऐसी उम्मीद थी कि यह बैठक वैश्विक स्तर पर परमाणु निरस्त्रीकरण के इस अंतिम लक्ष्य की दिशा में आगे की कार्रवाई को प्रेरित कर सकती है।

यूक्रेन ने प्राथमिकता बताई: हालांकि, शिखर सम्मेलन से जारी अंतिम संवाद में परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए ‘‘हिरोशिमा विज़न’’ की ओर कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जतायी गयी लेकिन रूस के खिलाफ युद्ध में यूक्रेन के लिए लगातार वैश्विक समर्थन ने इस मुद्दे को पीछे भी धकेल दिया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की अंतिम क्षण में तय हुई यात्रा ने युद्ध में महत्वपूर्ण वक्त में इस शिखर सम्मेलन पर कदम उठाने का दबाव बढ़ा दिया।

बंद दरवाजों के भीतर हुई जी7 समूह की बैठकों के बाद उसके नेताओं ने शुक्रवार शाम यूक्रेन पर छह पृष्ठों के एक बयान में सख्त लहजे में कहा, ‘‘यूक्रेन के लिए हमारा समर्थन कम नहीं होगा। हम यूक्रेन के खिलाफ रूस के अवैध, अनुचित और अकारण युद्ध के विरोध में एक साथ खड़े होने का संकल्प लेते हैं।

रूस ने इस युद्ध की शुरुआत की थी और वह इस युद्ध को समाप्त भी कर सकता है।’’ जेलेंस्की की यात्रा ने भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया तथा ग्लोबल साउथ के अन्य देशों को यूक्रेन के राष्ट्रपति से उनका पक्ष सुनने के लिए उनसे मुलाकात का एक मौका दिया। इन देशों ने अभी तक रूस के आक्रमण की कड़े शब्दों में ंिनदा नहीं की है।

उदाहरण के लिए, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने युद्ध शुरू होने के बाद जेलेंस्की के साथ आमने-सामने की पहली बैठक में उचित तरीके से सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि वह युद्ध को ‘‘महज अर्थव्यवस्था या राजनीति का मुद्दा नहीं मानते बल्कि उनके लिए यह मानवता का मुद्दा है।’’

ग्लोबल साउथ की बड़ी भूमिका : बहरहाल, किशिदा के पास हिरोशिमा के लिए अन्य लक्ष्य थे। यहां तक कि उन्होंने इस शिखर सम्मेलन के लिए अपने दृष्टिकोण पर बात करने के लिए इस साल विदेश की कई यात्राएं की थी और विकासशील देशों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से सहयोग मांगा था। यह वैश्विक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उनके वृहद लक्ष्यों का हिस्सा है।

जापान का हित आंशिक रूप से अफ्रीका तथा ग्लोबल साउथ के अन्य हिस्सों में चीन तथा रूस के निवेश और प्रभाव से निपटने में हैं। जी7 नेताओं का अंतिम संवाद यह दर्शाता है जिसमें अफ्रीका की सुरक्षा पर काफी ध्यान दिया गया है और रूस की निजी सैन्य कंपनी वैगनर का खास जिक्र किया गया है।

हम बदलाव की कितनी उम्मीद कर सकते हैं? जब जापान ने 2016 में जी7 की मेजबानी की थी तो उस वक्त विदेश मंत्री रहे किशिदा ने अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को हिरोशिमा की संक्षिप्त यात्रा करने के लिए मना लिया था जो किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली यात्रा थी। हालांकि, उस यात्रा का प्रतीकवाद और उम्मीद जल्द ही समाप्त हो गयी और केवल शांति संग्रहालय में कई अन्य प्रदर्शनी की तरह ओबामा के शब्द बचे रह गए।

किशिदा की निश्चित तौर पर इस सम्मेलन से परमाणु निरस्त्रीकरण के मुद्दे को बल मिलने की उम्मीद रही होगी। रविवार को अपने संवाददाता सम्मेलन में किशिदा ने हिरोशिमा में विश्व नेताओं को एकत्रित करने की अपनी वजहें भी दोहरायी और शांति पर विचार करने की महत्ता पर जोर दिया।

इस शिखर सम्मेलन को सबसे ज्यादा जेलेंस्की की यात्रा तथा रूस को दिए संदेश के लिए याद रखे जाने की संभावना है। लेकिन नेताओं के अपने-अपने देश लौटने के साथ ही युद्ध जारी रहेगा और उनके पास केवल बची हुई साधारण बातें हैं जो 2024 में अगले जी7 शिखर सम्मेलन तक चलेंगी।

हिरोशिमा में 1945 के परमाणु बम हमले में जीवित बचे हिबाकुशा लोगों के लिए यह परमाणु हथियारों को खत्म करने के लिए जोर देने का आखिरी प्रमुख अवसर हो सकता था। हालांकि सकारात्मक उम्मीद अभी भी बाकी है।

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