कर्नाटक में कांग्रेस की ‘खींचतान’ पर सिंधिया बोले, ”कुछ छात्र सबक सीखने को तैयार ही नहीं होते”

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 30 Nov 2025 09:06 PM
कर्नाटक में कांग्रेस की ‘खींचतान’ पर सिंधिया बोले, ”कुछ छात्र सबक सीखने को तैयार ही नहीं होते”
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इंदौर/बेंगलुरु. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कर्नाटक में नेतृत्व को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच कथित खींचतान को लेकर कांग्रेस पर रविवार को निशाना साधा और कहा कि कुछ विद्यार्थी ऐसे होते हैं जो जनता से सबक सीखने के लिए तैयार ही नहीं होते.

कर्नाटक में कांग्रेस के दोनों शीर्ष नेताओं के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान की खबरों पर सिंधिया ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा, ”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का परचम जनता ने पूरे देश में लहराया है. मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने भारत का चहुंमुखी विकास किया है और विश्व पटल पर देश की छवि को उभारा है. दूसरी तरफ, एक ऐसा दल (कांग्रेस) है जो अपनी सत्ता वाले प्रदेश में कुर्सी की लड़ाई में उलझ गया है.” उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस के ‘अंदरूनी मामले’ पर विस्तृत टिप्पणी नहीं करना चाहते. हालांकि, वह भाजपा के इस धुर प्रतिद्वंद्वी दल पर तंज कसने से नहीं चूके.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”इस दल (कांग्रेस) के भविष्य के बारे में जनता ही निर्णय करती है और जनता बार-बार उन्हें सबक सिखाती है, पर कुछ विद्यार्थी ऐसे होते हैं जो सबक सीखने के लिए तैयार ही नहीं होते.” उच्चतम न्यायालय को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के विवादास्पद बयान पर सिंधिया ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है लेकिन प्रजातंत्र के किसी भी स्तंभ, खासकर न्यायपालिका पर किसी भी व्यक्ति को ओछी टिप्पणी कभी नहीं करनी चाहिए.

शिवकुमार ने सिद्धरमैया के साथ मतभेद से किया इनकार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के साथ आंतरिक मतभेद की खबरों को उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने रविवार को एक बार फिर खारिज कर दिया और कहा कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच वह कभी भी किसी विधायक को दिल्ली नहीं ले गए. शनिवार को दोनों नेताओं ने नाश्ते पर एक बैठक की, जिसके बाद उन्होंने एकजुटता दिखाई और अपने बीच किसी भी मतभेद से इनकार किया.

शिवकुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा, ”हमारे बीच कभी मतभेद नहीं रहे. मैं जब भी दिल्ली गया, एक भी विधायक नहीं ले गया. मैं कम से कम 10 से 12 विधायक ले जा सकता था. इससे किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होती.” उन्होंने कहा कि कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते वह सभी पार्टी सदस्यों के लिए ”पितातुल्य” हैं.

उपमुख्यमंत्री ने कहा, ”मुझे सभी को साथ लेकर चलना है. सभी 140 विधायक मेरे प्रिय हैं. मैं कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं करता. मेरा किसी के साथ कोई मतभेद नहीं हैं.” मई 2018 से एक साल तक मुख्यमंत्री रहे एच.डी. कुमारस्वामी के कार्यकाल के दौरान अपने प्रयासों को याद करते हुए उन्होंने कहा, ”मैंने कांग्रेस और जद(एस) की गठबंधन सरकार को बचाने की पूरी कोशिश की. यह बात मैं और भगवान दोनों जानते हैं.” उन्होंने कहा कि कुमारस्वामी और उनके पिता पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा भी इस बात को जानते हैं.

कुमारस्वामी के इस आरोप का जवाब देते हुए कि शिवकुमार ने सत्ता के लिए रस्साकशी के बीच मठाधीशों का समर्थन मांगा था, उन्होंने कहा, ”मैंने इसके लिए कभी नहीं कहा. मैं सभी जातियों से प्यार करता हूं. कई संतों ने मेरे पक्ष में बोला था. क्या मैंने उनसे मेरी ओर से बोलने के लिए कहा था? नहीं. यह उनका मुझ पर प्यार और विश्वास है. क्या मुझे इसे गलत कहना चाहिए?” शिवकुमार ने कहा, ”उन्हें (कुमारस्वामी) जो कहना है कहने दीजिए, लेकिन मुझे कोई ठेस नहीं पहुंचेगी. मैं कभी पीठ पीछे वार नहीं करता. मैं आगे ब­ढ़कर लड़ता हूं.”

नेतृत्व विवाद को लेकर भाजपा द्वारा की जा रही आलोचना पर उन्होंने कहा, ”भाजपा अपने अस्तित्व के लिए कुछ भी कह सकती है. क्या हमें उन्हें गंभीरता से लेना चाहिए?” उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वह एक दिसंबर से शुरू हो रहे संसद सत्र के मद्देनजर, किसानों के मुद्दे और मेकेदातु संतुलन जलाशय परियोजना सहित राज्य से जुड़े कई मुद्दों को उठाने के लिए दिल्ली में एक सर्वदलीय बैठक बुलाना चाहते हैं.

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