शीर्ष माओवादी नेता भूपति के आत्मसमर्पण पर CM साय ने कहा, ‘अपने अंतिम चरण में है नक्सलवाद’

रायपुर. छत्तीसग­ढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र के ग­ढ़चिरौली जिले में शीर्ष नक्सली नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव और 60 अन्य नक्सलियों का आत्मसमर्पण माओवादी विचारधारा पर एक निर्णायक प्रहार है. साय ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा को चुनौती देने वाला नक्सलवाद अब दम तोड़ रहा है और अपने अंतिम चरण में है.

साय ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया,”देश की आंतरिक सुरक्षा को चुनौती देने वाला नक्सलवाद अब हर मोर्चे पर दम तोड़ रहा है और अपने अंतिम दौर से गुजर रहा है. ग­ढ़चिरौली में कुख्यात माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू एवं 60 अन्य नक्सलियों का आत्मसमर्पण नक्सलवादी विचारधारा पर एक निर्णायक प्रहार है. हमारे शौर्यवान सुरक्षाबल दिन-रात अदम्य साहस के साथ इस लड़ाई को अंजाम दे रहे हैं और सफलता प्राप्त कर रहे हैं.”

साय ने लिखा है, ”मुझे पूर्ण विश्वास है कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त भारत का हमारा संकल्प अवश्य पूरा होगा. छत्तीसग­ढ़, विशेषकर बस्तर, अब विकास और शांति की उस नई सुबह की ओर ब­ढ़ रहा है, जिसका वर्षों से इंतज.ार था.” राव को भूपति, सोनू और अभय के नाम से भी जाता है. उसने 60 अन्य नक्सलियों के साथ ग­ढ़चिरौली जिले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने आत्मसमर्पण किया है.

इस साल अब तक छत्तीसग­ढ़ में अलग-अलग मुठभेड़ों में 253 नक्सली मारे जा चुके हैं. उनमें प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के महासचिव और शीर्ष कार्यकर्ता नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू (70) तथा केंद्रीय समिति के पांच सदस्यों का मुठभेड़ में मारा जाना अहम है.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस साल झारखंड में दो और आंध्र प्रदेश में केंद्रीय समिति का एक सदस्य मारा गया. छत्तीसग­ढ़ पुलिस के अनुसार, इस वर्ष माओवादियों के महासचिव और आठ केंद्रीय समिति सदस्यों के खात्मे तथा केंद्रीय समिति सदस्य सुजाता और भूपति के आत्मसमर्पण के बाद, अब प्रतिबंधित संगठन में नौ पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति सदस्य (शीर्ष माओवादी कार्यकर्ता) बचे हैं, जिनमें छत्तीसग­ढ़ का खूंखार माओवादी कमांडर माड़वी हिडमा भी शामिल है.

भूपति द्वारा आत्मसमर्पण की इच्छा जताए जाने के बाद पुलिस ने उससे संपर्क किया: अधिकारी

मुंबई. शीर्ष माओवादी नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ ??भूपति द्वारा पिछले महीने हथियार डालने की इच्छा जताने के बाद पुलिस ने उससे बातचीत शुरू की थी. एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी. पूर्वी महाराष्ट्र के गढ.चिरौली जिले में दो दिन पहले भूपति ने 60 अन्य माओवादियों के साथ पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था.

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले महीने जब उसने आत्मसमर्पण करने की इच्छा जाहिर करते हुए पर्चे और प्रेस नोट जारी किए, तो गढ.चिरौली पुलिस ने अपना खुफिया नेटवर्क सक्रिय कर दिया और भामरागढ. क्षेत्र के सूत्रों के माध्यम से बातचीत शुरू हुई. माओवादियों की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो का सदस्य भूपति, पीपुल्स वार ग्रुप (पीडब्लूजी) के संस्थापक सदस्यों में से एक था, जिसका गठन 1980 में हुआ था.

अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र-छत्तीसगढ. सीमा क्षेत्र में माओवादी आंदोलन को फैलाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है.
उन्होंने बताया कि वाम चरमपंथ (एलडब्ल्यूई) के खात्मे की कगार पर पहुंचने और गढ.चिरौली पुलिस द्वारा बनाए गए अनुकूल माहौल के कारण भूपति ने हथियार डालने के बारे में सोचना शुरू किया और अपनी इच्छा जाहिर करते हुए पर्चे एवं प्रेस नोट जारी किए.
अधिकारी ने बताया कि वाम चरमपंथियों के बीच भी उसके आत्मसमर्पण की अटकलें तेज थीं.

उन्होंने बताया कि लगभग 10 दिन पहले भूपति ने फोडेवाड़ा क्षेत्र में ग्रामीणों के साथ बैठक की थी और हिंसा का रास्ता छोड़ने के बारे में अपने विचार साझा किए थे. अधिकारी ने बताया कि उनके एक सूत्र ने 13 अक्टूबर की सुबह गढ.चिरौली पुलिस को सूचित किया कि भूपति सहित नक्सलियों का एक समूह उसी शाम भामरागढ. तालुका के होदरी गांव के बाहर आत्मसमर्पण करने वाला है.

उन्होंने बताया कि पुलिस महानिरीक्षक (नक्सल विरोधी अभियान) संदीप पाटिल, गढ.चिरौली के पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं. अधिकारी ने बताया कि सूत्र के माध्यम से आत्मसमर्पण करने के लिए एक निश्चित स्थान तय किया गया और पूरे समूह को सुरक्षित हिरासत में ले लिया गया.

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को उसी रात छह सिविल वाहनों में गढ.चिरौली ले जाया गया. समूह में एक केंद्रीय समिति सदस्य (भूपति), दो विशेष क्षेत्रीय समिति सदस्य, 10 संभागीय समिति सदस्य, एक उप कमांडर, 16 पार्टी समिति सदस्य, छह क्षेत्र समिति सदस्य और 25 अन्य सदस्य थे.

अधिकारी ने बताया कि नक्सलियों के पास से सात एके-47 राइफल, एक एसजी राइफल, नौ इंसास राइफल, दो कार्बाइन, एक बीजीएल लांचर और गोला-बारूद समेत 54 हथियार बरामद किए गए. भूपति पर छह करोड़ रुपये का इनाम रखा गया था. सूत्रों के अनुसार, हाल के महीनों में भूपति और शीर्ष नक्सल नेतृत्व के बीच बढ.ते मतभेदों के कारण आंतरिक टकराव उत्पन्न हो गया. उन्होंने बताया कि भूपति को लगा कि सशस्त्र संघर्ष विफल हो गया है लेकिन अन्य शीर्ष कार्यकर्ताओं ने किसी अन्य नेता के नेतृत्व में लड़ाई जारी रखने का निर्णय लिया. भूपति की पत्नी तारक्का ने इस साल की शुरुआत में आत्मसमर्पण कर दिया था.

नक्सली नेता वेणुगोपाल का आत्मसमर्पण माओवादी विचारधारा को करारा झटका: पुलिस अधिकारी

हैदराबाद. तेलंगाना के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा है कि माओवादी संगठन के सबसे प्रभावशाली रणनीतिकारों में से एक माने जाने वाले शीर्ष नक्सली नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव का आत्मसमर्पण माओवादी विचारधारा के लिए ”करारा” झटका है. मूल रूप से तेलंगाना के निवासी और प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय समिति एवं पोलित ब्यूरो के सदस्य राव उर्फ ??भूपति ने सोमवार को महाराष्ट्र के गढ.चिरौली जिले में 60 अन्य नक्सलियों के साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.
अधिकारियों ने वेणुगोपाल की गिरफ्तारी पर छह करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था.

तेलंगाना के पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि 21 मई को छत्तीसगढ. में सुरक्षा बलों द्वारा नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू की हत्या के बाद वेणुगोपाल के भाकपा (माओवादी) का महासचिव बनने की संभावना थी. ”वह (वेणुगोपाल) भाकपा (माओवादी) के प्रभावशाली नेता हैं और सामान्य परिस्थितियों में इसके महासचिव हो सकता थे. लेकिन, बसवराजू की मौत के बाद वे फिर से संगठित होने और किसी और को महासचिव चुनने की स्थिति में नहीं थे.” अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”इस बीच मतभेद हुए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब सरकारी बलों से लड़ने का नहीं बल्कि कुछ समय के लिए लड़ाई बंद करने का समय है.” अधिकारी के अनुसार माओवादी नेता ने कहा था कि प्रतिबंधित संगठन का शीर्ष नेतृत्व सशस्त्र संघर्ष बंद करने और बातचीत करने या अपनी पूरी रणनीति पर पुर्निवचार करने के पक्ष में है.

उन्होंने कहा, ”इतने शीर्ष पद वाला व्यक्ति स्वास्थ्य या किसी अन्य कारण से नहीं बल्कि वैचारिक कारणों से (आत्मसमर्पण करने के लिए) आगे आ रहा है जो दर्शाता है कि संघर्ष की उनकी रणनीति स्पष्ट तौर पर पार्टी की विचारधारा की एवं रणनीति की विफलता है.” उन्होंने कहा, ”हो सकता है कि (कुछ और) लोग हों, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे अब आंदोलन या विचारधारा को बनाए रख पाएंगे. यह माओवादी विचारधारा के लिए एक करारा झटका है.”

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