
नयी दिल्ली/इस्लामाबाद. चार दिन तक चले भीषण सैन्य टकराव के दौरान, भारतीय सशस्त्र बलों ने हवाई घुसपैठ को नाकाम करने के लिए पाकिस्तान के कई ड्रोन को रोका और इन्हें नि्क्रिरय कर दिया, जबकि जमीन पर साइबर योद्धाओं के दलों ने डिजिटल घुसपैठ और गलत सूचनाएं फैलाये जाने के अभियान का मुकाबला किया.
भारत द्वारा सात मई की सुबह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और पाकिस्तान में नौ आतंकवादी शिविरों को नष्ट करने से पहले ही, कई भारतीय वेबसाइट साइबर हमलों का लक्ष्य बन गई थीं. अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले के कुछ दिन बाद जालंधर स्थित आर्मी र्निसंग कॉलेज की वेबसाइट को हैक कर लिया गया और उस पर भड़काऊ संदेश लिख दिया गया था. एक सूत्र ने पांच मई को बताया कि हाल में एपीएस नगरोटा और एपीएस सुंजवान समेत कम से कम चार आर्मी पब्लिक स्कूलों (एपीएस) को हैकर ने निशाना बनाया.
वेबसाइट को हैक करने और उनमें सेंध लगाने के प्रयासों के अलावा, अप्रैल के अंत में भारत और भारतीय सशस्त्र बलों के खिलाफ सोशल मीडिया मंचों समेत इंटरनेट पर ”गलत सूचनाएं फैलाने का अभियान” चलाया गया और यह अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के शुरू होने और पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई के बाद और तेज हो गया.
भारतीय वायुसेना में वायु संचालन महानिदेशक एयर मार्शल ए के भारती ने 11 मई को संवाददाताओं को बताया था, ”आठ मई को स्थानीय समयानुसार रात आठ बजे, कई पाकिस्तानी मानवरहित हवाई प्रणालियों, ड्रोन, लड़ाकू वाहनों ने भारतीय वायुसेना के कई ठिकानों पर हमला किया. इनमें जम्मू, उधमपुर, पठानकोट, अमृतसर, बठिंडा, नाल, डलहौजी, जैसलमेर, उत्तरलाई, फलोदी, नलिया शामिल हैं. हमारी सभी ए.डी. (वायु रक्षा) प्रणालियां इनका इंतजार कर रही थीं. हमारे प्रशिक्षित दलों ने सभी हमलों को नाकाम कर दिया.” उन्होंने कहा, ”इन घुसपैठों और सामूहिक हमलों से जमीनी स्तर पर कोई नुकसान नहीं हुआ है.”
आधिकारिक सूत्रों ने पहले बताया था कि भारत ने सात मई की रात को 15 भारतीय शहरों पर हमला करने की पाकिस्तान की कोशिशों को विफल करने के लिए बराक-8 मिसाइल, एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल आकाश और स्वदेशी रूप से विकसित ड्रोन रोधी उपकरणों को तैनात किया था. संघर्ष के दौरान जब भारत की मजबूत वायु रक्षा प्रणाली ने श्रीनगर से सर क्रीक तक भारतीय हवाई क्षेत्र में अतिक्रमण करने वाले कई ड्रोन को रोका, उनसे मुकाबला किया और उन्हें निष्प्रभावी कर दिया उस वक्त जमीनी स्तर पर साइबर विशेषज्ञों ने गलत दावों और फर्जी खबरों को फैलाने के अभियान का मुकाबला किया.
साइबर विशेषज्ञों के अलावा विदेश सचिव विक्रम मिसरी, कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में विवरण साझा करने के लिए अपनी संयुक्त प्रेस वार्ता में पाकिस्तान द्वारा किए गए कई दावों की तथ्यान्वेषण (फैक्ट चेक) भी किया.
मिसरी ने नौ मई को यहां संवाददाताओं से कहा था कि पाकिस्तान ने यह ”बेतुका और अपमानजनक” दावा किया है कि यह भारतीय सशस्त्र बल और भारतीय वायुसेना ही थी जो अमृतसर जैसे शहरों को निशाना बना रही थी और इसका दोष पाकिस्तान पर डालने की कोशिश कर रही थी और उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा, ”…’हम अपने ही शहरों पर हमला करेंगे’, एक ऐसी विक्षिप्त कल्पना है जो केवल पाकिस्तान ही कर सकता है.” उन्होंने कहा, ”…पाकिस्तान से यह गलत सूचना आ रही है कि भारत ड्रोन हमले के जरिये ननकाना साहिब गुरुद्वारे को निशाना बना रहा है. यह फिर से एक और सफेद झूठ है और पाकिस्तान के गलत सूचना अभियान का हिस्सा है.” सामरिक मामलों के विशेषज्ञों और कई रक्षा थिंक टैंक के सदस्यों का कहना है कि साइबर क्षेत्र में गलत सूचना और फर्जी खबरें फैलाना, विशेष रूप से संघर्ष के समय, ”किसी भी नये युग के युद्ध का हिस्सा है”.
दिल्ली स्थित मनोहर र्पिरकर रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान के वरिष्ठ प्रबंधन के एक सदस्य ने कहा, ”यह एक ऐसा खेल है, जिसमें भले ही जानकारी गलत हो, विरोधी पक्ष दूसरे पक्ष का मनोबल गिराने का प्रयास करता है.” सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने पहलगाम हमले के बाद से कई झूठे दावों का पर्दाफाश किया है. मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ ने मंगलवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के ”सफल संचालन” ने ”भारत-पाकिस्तान संबंधों में नये मानदंड” स्थापित किए हैं, जो ”नये युग के युद्ध” में सैन्य श्रेष्ठता के माध्यम से देश की ताकत और राष्ट्रीय संकल्प को उजागर करता है. भारत और पाकिस्तान गोलीबारी तथा सैन्य कार्रवाइयों को रोकने के लिए एक सहमति पर पहुंच गए हैं, लेकिन भारतीय सेना और साइबर योद्धा हवा में या डिजिटल क्षेत्र में दुश्मन के किसी भी दुस्साहस को नाकाम करने के लिए सतर्क हैं.
भारत के साथ सैन्य टकराव के दौरान घायल दो और पाकिस्तानी सैनिकों की मौत
भारत के साथ हालिया सैन्य टकराव के दौरान घायल हुए दो और पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गयी जिसके बाद इस संघर्ष में मरने वाले सैन्यर्किमयों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है. सेना ने बुधवार को यह जानकारी दी. सेना की मीडिया शाखा इंटर-र्सिवसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के अनुसार, भारतीय हमलों के दौरान घायल हुए दो और सैनिकों की मौत हो गई.
उसने एक बयान में कहा कि इन सैनिकों की मौत के साथ ही भारत के साथ टकराव के दौरान मारे गए सैन्यर्किमयों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है. मृत सैनिकों की पहचान पाकिस्तानी सेना के हवलदार मुहम्मद नवीद और पाकिस्तानी वायुसेना के वरिष्ठ तकनीशियन मुहम्मद अयाज के रूप में की गई है.
सेना ने कहा, “उनका बलिदान सदैव राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में अंकित रहेगा तथा आने वाली पीढि.यों को प्रेरित करेगा.” मंगलवार को सेना ने कहा था कि ड्यूटी के दौरान 11 सैन्यकर्मी मारे गए तथा 78 घायल हुए. पिछले सप्ताह भारत ने 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में आतंकी ढांचे पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत लक्षित हमले किए थे. भारतीय कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने 8, 9 और 10 मई को भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमला करने का प्रयास किया. भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक सीमा पार से ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद संघर्ष समाप्त करने के लिए शनिवार को सहमति बन गई.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारत ने अपने सामरिक लक्ष्य हासिल किए: विशेषज्ञ
सामरिक मामलों के एक विशेषज्ञ ने बुधवार को कहा कि भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए एक नया राष्ट्रीय सुरक्षा सिद्धांत पेश किया और आतंकवादी बुनियादी ढांचे को नष्ट करने एवं पाकिस्तान पर अपनी सैन्य श्रेष्ठता दर्शाने के अपने सामरिक उद्देश्यों को पूरा करने से भी आगे जा कर बेहतर प्रदर्शन किया.
अमेरिकी ‘थिंक टैंक’ ‘मॉडर्न वार इंस्टीट्यूट’ में ‘अर्बन वारफेयर स्टडीज’ के अध्यक्ष जॉन स्पेंसर ने कहा कि भारत ने सात मई को शुरू किए गए अपने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में किसी भी लक्ष्य पर ”अपनी इच्छानुसार” हमला कर सकने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया और सीमा पार आतंकवाद के लिए ”चेतावनी वाली नयी रेखा” खींच कर उसे लागू किया. ‘मॉडर्न वॉर इंस्टीट्यूट’ (एमडब्ल्यूआई) खुद को ‘यूनाइटेड स्टेट्स मिलिट्री अकेडमी’ के ऐसे राष्ट्रीय संसाधन के रूप में र्विणत करता है जो हालिया संघर्षों का अध्ययन करता है.
पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए. भारत की कार्रवाई के बाद जब पाकिस्तान ने भारत के सैन्य प्रतिष्ठानों और असैन्य क्षेत्रों को निशाना बनाने का प्रयास किया तो भारतीय सशस्त्र बलों ने चार दिनों की अवधि में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भीषण जवाबी हमले किए.
इसके बाद दोनों पक्षों के सैन्य संचालन महानिदेशकों के बीच वार्ता के बाद सैन्य कार्रवाइयों को रोकने पर 10 मई की दोपहर को सहमति बनी.
स्पेंसर ने भारत एवं पाकिस्तान के बीच संघर्ष पर एक लेख में लिखा, ”ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल अपने सामरिक उद्देश्यों को पूरा किया बल्कि उससे भी आगे निकलकर काम किया. इसके तहत आतंकवादी ढांचों को नष्ट किया गया, सैन्य श्रेष्ठता का प्रदर्शन किया गया, हमले रोकने की क्षमता को दर्शाया गया और एक नए राष्ट्रीय सुरक्षा सिद्धांत को पेश किया गया.” उन्होंने संघर्ष के विभिन्न आयामों का विश्लेषण करते हुए कहा, ”चेतावनी वाली एक नयी रेखा खींची गई और उसे लागू किया गया. यह रेखा है : पाकिस्तानी धरती से होने वाले आतंकवादी हमलों का अब सैन्य बल से सामना होगा.”
स्पेंसर ने कहा, ”यह कोई धमकी नहीं है. यह एक मिसाल है.” उन्होंने कहा, ”भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों, ड्रोन समन्वय केंद्रों, यहां तक कि ‘एयरबेस’ समेत किसी भी लक्ष्य पर हमला करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया. इस बीच, पाकिस्तान भारत के अंदर एक भी सुरक्षित क्षेत्र में घुसने में असमर्थ रहा.” स्पेंसर ने कहा, ”यह समानता नहीं है. यह अभूतपूर्व श्रेष्ठता है. इससे पता चलता है कि वास्तविक प्रतिरोध क्या होता है.” स्पेंसर ने तर्क दिया कि भारत ने पाकिस्तानी कार्रवाइयों का ”पुरजोर तरीके से जवाब” दिया लेकिन यह ”पूर्ण युद्ध” बनने से पहले ही रुक गया. उन्होंने कहा कि ”तनाव बढ.ने पर नियंत्रण” ने एक स्पष्ट संकेत दिया कि भारत जवाब देगा और वह गति को भी नियंत्रित करेगा.
उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के कूटनीतिक पहलू पर भी चर्चा करते हुए कहा कि भारत ने ”अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता” का अनुरोध किए बिना संकट को संभाला. स्पेंसर ने ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने लेख में लिखा, ”इसने संप्रभु शर्तों पर सिद्धांत लागू किया, संप्रभु साधनों का उपयोग किया. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ कब्जे या शासन परिवर्तन को लेकर नहीं था.” उन्होंने कहा कि इसे विशिष्ट उद्देश्यों के लिए अंजाम दिया गया था. उन्होंने स्पष्ट किया कि सामरिक सफलता विनाश के पैमाने से नहीं, बल्कि वांछित राजनीतिक प्रभाव प्राप्त करने से जुड़ी है. स्पेंसर ने कहा, ”भारत प्रतिशोध के लिए नहीं लड़ रहा था. यह प्रतिरोध के लिए लड़ रहा था, और यह काम कर गया.”



