इंदौर में ‘दूषित पानी’ पीने के कारण 100 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती, तीन मरीजों की मौत

इंदौर. देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में कथित तौर पर दूषित पानी पीने के कारण 100 से ज्यादा लोगों को उल्टी-दस्त की गंभीर दिक्कतों के साथ अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया और इनमें से कम से कम तीन मरीजों की मौत हो गई. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

हालांकि, स्थानीय लोगों का दावा है कि दूषित पानी पीने से बीमार होने के बाद अब तक चार महिलाओं समेत पांच लोग दम तोड़ चुके हैं.
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने बताया कि शहर के भागीरथपुरा इलाके में उल्टी-दस्त के प्रकोप के बारे में पता चलने पर स्वास्थ्य विभाग ने 2,703 घरों के सर्वेक्षण के दौरान करीब 12,000 लोगों की जांच की और इनमें से हल्के लक्षणों वाले 1,146 मरीजों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया. उन्होंने बताया कि अपेक्षाकृत गंभीर स्थिति वाले 111 मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती किया गया जिनमें से 18 लोगों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई.

सीएमएचओ ने बताया, ”मरीजों का कहना है कि दूषित पानी पीने के बाद उन्हें उल्टी-दस्त और शरीर में पानी की कमी की दिक्कतें शुरू हो गईं.” हासानी ने बताया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में चार एम्बुलेंस के साथ चिकित्सकों के कई दल तैनात हैं जो उल्टी-दस्त के प्रकोप से निपटने के लिए उचित कदम उठा रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस इलाके से पेयजल के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं.
इस बीच, शहर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि उन्हें भागीरथपुरा क्षेत्र में उल्टी-दस्त से पीडि़त तीन लोगों की मौत की जानकारी मिली है. उन्होंने हालांकि मृतकों की पहचान का खुलासा नहीं किया.

महापौर ने बताया,”हमने राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव से आग्रह किया है कि मृतकों के शोकसंतप्त परिवारों को उचित सहायता राशि प्रदान की जाए. सभी मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर किया जा रहा है.” उन्होंने कहा, ”पेयजल के नमूनों की जांच रिपोर्ट का हालांकि इंतजार किया जा रहा है, लेकिन पहली नजर में लगता है कि ड्रेनेज का पानी पेयजल की आपूर्ति वाली लाइन में मिलने से पेयजल दूषित हुआ. इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे.”

भागीरथपुरा के आक्रोशित लोगों का कहना है कि वे और उनके परिजन नगर निगम के नल कनेक्शन के जरिये घर-घर पहुंचने वाला नर्मदा नदी का दूषित पानी पीने से बीमार हुए. उन्होंने आरोप लगाया कि नल से दूषित पानी आने की कई शिकायतों के बावजूद नगर निगम ने उनकी कोई सुध नहीं ली.

क्षेत्रीय पार्षद कमल बाघेला ने कहा,”लोगों का कहना है कि पिछले बृहस्पतिवार (25 दिसंबर) को जिस पानी की आपूर्ति की गई थी, उससे अलग तरह की गंध आ रही थी. शायद लोग यही पानी पीने से बीमार पड़े हैं. नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा कि पानी दूषित कैसे हुआ.” पार्षद ने बताया कि उल्टी-दस्त से पीडि़त होने के बाद एक निजी अस्पताल में भर्ती कराए गए नंदलाल पाल (80) की मौत हो गई. पाल के बेटे सिद्धार्थ ने बताया कि उनके पिता को कथित तौर पर दूषित पानी के कारण उल्टी-दस्त की समस्या के बाद 28 दिसंबर को इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

उन्होंने बताया,”मेरे पिता की मंगलवार सुबह मौत हो गई.” भागीरथपुरा क्षेत्र के निवासी जितेंद्र प्रजापत ने कहा कि कथित तौर पर दूषित पानी के कारण उल्टी-दस्त से पीडि़त उनकी बड़ी बहन सीमा प्रजापत (50) ने सोमवार को दम तोड़ दिया. उन्होंने बताया,”मेरी बहन को अचानक उल्टी-दस्त की समस्या हुई और हमें उसे संभालने का मौका तक नहीं मिला. अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में उसकी मौत हो गई.” प्रजापत ने कहा कि भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से जिस पानी की आपूर्ति की जा रही थी, वह पीते वक्त ‘कड़वा’ लग रहा था और लोगों को आशंका है कि ज्यादा मात्रा में कोई जलशोधक रसायन मिलाए जाने से पानी का स्वाद बदल गया था.

भागीरथपुरा क्षेत्र में रहने वाली चंद्रकला यादव ने कहा कि उनकी सास उर्मिला यादव (70) को 27 दिसंबर (शनिवार) को कथित तौर पर दूषित पानी के कारण उल्टी-दस्त की समस्या शुरू हुई और एक अस्पताल में इलाज के दौरान 28 दिसंबर (रविवार) को उनकी मौत हो गई. भागीरथपुरा में रहने वाली मंजुला दिगंबर वाढ़े (74) और उमा कोरी (29) ने मंगलवार को दम तोड़ा. उनके परिजनों ने कहा कि दोनों महिलाओं की मौत कथित तौर पर दूषित पानी पीने के बाद उल्टी-दस्त से पीडि़त होने के चलते हुई.

दिवंगत उमा कोरी के पति बिहारी कोरी ने कहा,”दूषित पेयजल कांड की विस्तृत जांच की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और मेरी तरह किसी अन्य व्यक्ति को अपने परिजन को न खोना पड़े.” इंदौर, अपनी पानी की जरूरतों के लिए नर्मदा नदी पर निर्भर है. नगर निगम की बिछाई पाइपलाइन के जरिये नर्मदा नदी के पानी को पड़ोसी खरगोन जिले के जलूद से 80 किलोमीटर दूर इंदौर लाकर घर-घर पहुंचाया जाता है.

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