ओडिशा में बीजद की हार के बाद पांडियन ने सक्रिय राजनीति से लिया सन्यास

भुवनेश्वर. पूर्व नौकरशाह वी. के. पांडियन ने राजनीति में आने के ठीक छह महीने और 13 दिन बाद, सक्रिय राजनीति से सन्यास लेने की रविवार को घोषणा की और कहा कि वह ओडिशा को अपने दिल में तथा ‘गुरु नवीन बाबू’ को अपनी सांसों में रखेंगे. पांडियन ने एक वीडियो संदेश में कहा कि राजनीति में आने का उनका एकमात्र मकसद नवीन पटनायक की सहायता करना था और यही कारण है कि उन्होंने 2024 का चुनाव नहीं लड़ा. पांडियन ने चुनावों में हार के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराये जाने की स्थिति में लोगों, बीजू जनता दल (बीजद) नेताओं व कार्यकर्ताओं से माफी भी मांगी.

उन्होंने कहा, ”राजनीति में आने का मेरा एकमात्र मकसद नवीन बाबू की सहायता करना था. अब मैंने सक्रिय राजनीति छोड़ने का फैसला किया है. यदि इस सफर में मैंने किसी को कोई ठेस पहुंचाई हो, तो मुझे माफ कर दें. यदि मेरे खिलाफ विमर्श ने बीजद की हार में कोई भूमिका निभाई है, तो मुझे खेद है.” चुनाव प्रचार के दौरान पांडियन ने कहा था कि अगर पार्टी अध्यक्ष पटनायक विधानसभा चुनाव के बाद लगातार छठी बार ओडिशा के मुख्यमंत्री नहीं बने, तो वह (पांडियन) राजनीति छोड़ देंगे.

पांडियन ने झाड़सुगुडा जिले के ब्रजराजनगर में एक रैली में घोषणा की थी, ”आप (भाजपा) कहते हैं कि ओडिशा में भाजपा की लहर है और परिवर्तन की लहर है, लेकिन मैं दृढ.ता से कहता हूं कि अगर मुख्यमंत्री (पटनायक) दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बने तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा.” अपने करीबी सहयोगी का बचाव करते हुए, बीजद प्रमुख नवीन पटनायक ने पांडियन के खिलाफ जारी आलोचना को शनिवार को ”दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया और ”शानदार काम” करने के लिए उनकी सराहना की.

पटनायक ने यह भी स्पष्ट किया था कि पांडियन उनके उत्तराधिकारी नहीं हैं. उन्होंने कहा, ”पांडियन की कुछ आलोचना हुई है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. वह पार्टी में शामिल हुए और उन्होंने कोई पद नहीं संभाला. उन्होंने किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव नहीं लड़ा. जब भी मुझसे मेरे उत्तराधिकारी के बारे में पूछा गया, मैंने हमेशा स्पष्ट रूप से कहा कि वह पांडियन नहीं हैं. मैं फिर से दोहराता हूं कि ओडिशा के लोग मेरा उत्तराधिकारी तय करेंगे.” अपने निर्णय की घोषणा करते हुए पांडियन ने पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं सहित पूरे बीजू (पटनायक) परिवार से क्षमा मांगी और उन लाखों बीजद सदस्यों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया, जिनसे वे जुड़े हुए थे.

पांडियन ने कहा, ”मैं ओडिशा को हमेशा अपने दिल में तथा अपने ‘गुरु नवीन बाबू’ को अपनी सांसों में रखूंगा तथा भगवान जगन्नाथ से उनकी खुशहाली और समृद्धि की प्रार्थना करूंगा.” अपनी पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए पांडियन ने बताया कि वह (तमिलनाडु के) एक साधारण परिवार और छोटे से गांव से आते हैं तथा उनके बचपन का सपना भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में शामिल होकर लोगों की सेवा करना था, जिसे भगवान जगन्नाथ ने संभव बनाया.

उन्होंने यह भी बताया कि वह ओडिशा इसलिए आए, क्योंकि उनकी पत्नी केंद्रपाड़ा से हैं. उन्होंने कहा, ”जिस दिन से मैंने ओडिशा की धरती पर कदम रखा, मुझे लोगों से अपार प्यार और स्नेह मिला… धर्मगढ. से लेकर राउरकेला, मयूरभंज से लेकर गंजाम तक. मैंने लोगों के लिए बहुत मेहनत की.” पूर्व आईएएस अधिकारी ने सत्ता के गलियारे में अपने प्रवेश के बारे में बात करते हुए कहा कि 12 साल पहले, वह मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में नियुक्त हुए थे. पांडियन ने कहा, ”नवीन पटनायक के लिए काम करना सम्मान की बात थी. उनसे मुझे जो अनुभव और सीख मिली, वह जीवन भर के लिए है. उनकी शालीनता, नेतृत्व, नैतिकता और सबसे बढ.कर, ओडिशा के लोगों के प्रति उनके प्यार ने मुझे हमेशा प्रेरित किया.”

उन्होंने कहा, ”मैंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेकर आईएएस छोड़ दिया और अपने गुरु नवीन पटनायक की सहायता के लिए बीजद में शामिल हो गया. मेरा एकमात्र उद्देश्य उनकी मदद करना था, जैसा कि कोई भी अपने गुरु या परिवार के लिए करता है. मैं कुछ धारणाओं और कथनों को स्पष्ट करना चाहता हूं.” पांडियन ने स्वीकार किया कि शायद यह उनकी कमियां रहीं कि वह सही समय पर कुछ राजनीतिक विमर्श का प्रभावी ढंग से मुकाबला नहीं कर पाए. उन्होंने कहा,”मैं दोहराता हूं कि मैं चुनावों से पहले अपने गुरु नवीन पटनायक की मदद करने के लिए राजनीति में आया था और मुझे किसी राजनीतिक पद की कोई इच्छा नहीं थी. इसलिए, मैं न तो चुनाव में उम्मीदवार था और न ही बीजद में किसी पद पर था.”

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