
भुवनेश्वर. बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने कंधमाल जिले में आम की गुठली का दलिया खाने से हाल में हुई दो आदिवासी महिलाओं की मौत के लिए बृहस्पतिवार को ओडिशा सरकार को जिम्मेदार ठहराया. पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इन महिलाओं के घरों में पर्याप्त भोजन का कथित तौर पर अभाव था जिसके कारण उन्हें मजबूरी में आम की गुठली का दलिया खाना पड़ा.
बहरहाल, भाजपा सरकार का कहना है कि महिलाओं की मौत खाद्य विषाक्तता के कारण हुई.
पटनायक ने बीजद मुख्यालय शंख भवन में पार्टी की छात्र शाखा के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा, ”राज्य सरकार ने गरीब आदिवासियों को चावल देना बंद कर दिया, इसलिए उन्हें आम की गुठली का दलिया खाने पर मजबूर होना पड़ा. (इसके कारण) दो लोगों की मौत हो गई है और अन्य का उपचार किया जा रहा है. यह बहुत दुखद है.” उन्होंने वर्तमान सरकार के कार्यों पर चिंता व्यक्त की और आरोप लगाया कि इसने लोगों के लिए पर्याप्त अनाज सुनिश्चित करने के उनकी (बीजद) सरकार के प्रयासों पर ”पानी फेर दिया.” वर्ष 2000 से 2024 तक ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे पटनायक ने जोर दिया कि बीजद सरकार ने उन लोगों के लिए राज्य की अपनी खाद्य सुरक्षा योजना शुरू की थी जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के दायरे में नहीं आते थे.
पटनायक ने कहा, ”मौजूदा सरकार ने उन सभी प्रयासों पर पानी फेर दिया है और परिणामस्वरूप, लोग आम की गुठली का दलिया खाने को मजबूर हैं क्योंकि उन्हें चावल नहीं मिल रहा.” खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता कल्याण मंत्री के सी पात्रा ने पटनायक के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ”बीजद सरकार के कार्यकाल में रायगड़ा जिले के टिकिरी और काशीपुर ब्लॉक में आम की गुठली खाने से 16 लोगों की मौत हो गई थी. क्या पटनायक यह स्वीकार करेंगे कि इन लोगों की मौत चावल न मिलने के कारण हुई?”
मंत्री ने कहा कि चिकित्सकीय रिपोर्ट से पुष्टि हुई है कि लोगों की मौत चावल की कमी के कारण नहीं, बल्कि ”खाद्य विषाक्तता” के कारण हुईं. पात्रा ने दावा किया कि आम की गुठली का दलिया खाना आदिवासी समाज की खान-पान से जुड़ी आदतों का हिस्सा है.
मंत्री ने कहा, ”आम की गुठली खाना उनके जीवन को प्रभावित नहीं करता लेकिन इस मामले में दलिया चार-पांच दिन का बासी था जिसके कारण यह जहरीला बन गया.”



