पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका; अग्रिम जमानत पर लगी रोक, तीन हफ्ते में देना होगा जवाब

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Wed, 15 Apr 2026 01:07 PM
पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका; अग्रिम जमानत पर लगी रोक, तीन हफ्ते में देना होगा जवाब
ऑडियो सुनें

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को दी गई एक हफ्ते की अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी है। यह मामला असम में दर्ज उस एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें खेड़ा पर आरोप है कि उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ कई पासपोर्ट रखने के आरोप लगाए थे।

न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरीऔर अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने इस मामले में खेड़ा को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। यह नोटिस असम सरकार की उस याचिका पर जारी किया गया, जिसमें तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा दी गई ट्रांजिट बेल पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फिलहाल संबंधित आदेश (ट्रांजिट बेल) पर रोक लगाई जाती है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर खेड़ा असम की संबंधित अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उस प्रक्रिया में बाधा नहीं बनेगा। अदालत ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी और तब तक सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना होगा।

सुनवाई के दौरान असम सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि तेलंगाना हाई कोर्ट को इस मामले में सुनवाई का अधिकार क्षेत्र नहीं था, क्योंकि कथित अपराध और एफआईआर दोनों असम में दर्ज हैं। उन्होंने इसे फोरम चुनने की कोशिश बताते हुए कानून का दुरुपयोग करार दिया।

असम सरकार ने स्पेशल लीव पिटीशन की थी दायर
असम सरकार ने स्पेशल लीव पिटीशन दायर कर 10 अप्रैल को तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें खेड़ा को एक सप्ताह के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी। हाई कोर्ट ने यह राहत इसलिए दी थी ताकि खेड़ा संबंधित अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें।

तेलंगाना हाई कोर्ट की एकल पीठ, जस्टिस के सुजाना ने आदेश दिया था कि गिरफ्तारी की स्थिति में खेड़ा को एक सप्ताह के लिए अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए। खेड़ा ने यह राहत तब मांगी थी जब असम पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

वहीं, खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तेलंगाना हाई कोर्ट में दलील दी थी कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है और अधिकतम यह मानहानि का मामला बनता है, जिसमें गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है।

क्या है मामला?
यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भूयान सरमा पर कथित रूप से आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणी करने से जुड़ा है। असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं।

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी थी कि यह मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और खेड़ा को मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े सवाल उठाने पर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आरोप यदि गलत भी माने जाएं, तो अधिकतम यह मानहानि का मामला बनता है, जिसके लिए गिरफ्तारी जरूरी नहीं है।

वहीं, असम सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल देवजीत सैकिया ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि खेड़ा, जो दिल्ली के निवासी हैं, उन्होंने तेलंगाना हाई कोर्ट का रुख क्यों किया, इसका कोई ठोस कारण नहीं है।

विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गर्म
इस पूरे विवाद ने असम विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। कांग्रेस ने खेड़ा का समर्थन करते हुए आरोप लगाया है कि हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। वहीं बीजेपी ने खेड़ा के बयान को गैरजिम्मेदार और मानहानिकारक बताया है।

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By Nandkishoryadav