पीयूष गोयल ने लंदन में भारत-ब्रिटेन व्यापार गोलमेज सम्मेलन को किया संबोधित

लंदन. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-ब्रिटेन व्यापार गोलमेज सम्मेलन को मंगलवार को संबोधित किया. इसमें दोनों देशों के व्यापार जगत के दिग्गज और मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईअसे) ने शिरकत की. गोयल दो दिवसीय यात्रा पर लंदन में हैं.

गोलमेज सम्मेलन के बाद गोयल ने कहा, ” भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने, नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देने और निवेश के अवसरों का विस्तार करने के अवसरों का उल्लेख किया.” यह बैठक ब्रिटेन के साथ अधिक सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने के लिए सोमवार को व्यापार जगत के दिग्गजों के साथ उनकी बातचीत के बाद हुई.

इससे पहले सोमवार को मंत्री ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर जारी वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए ब्रिटेन के व्यापार एवं वाणिज्य मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स के साथ बैठक की थी. साथ ही वित्त प्रौद्योगिकी पर ध्यान केंद्रित करते हुए रेवोल्यूट के प्रमुख मार्टिन गिल्बर्ट और ‘रत्न एवं आभूषण क्षेत्र में वैश्विक रुझानों’ पर डी बीयर्स समूह के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अल कुक के साथ चर्चा की थी.

गिल्बर्ट से मुलाकात के बाद गोयल ने सोशल मीडिया पर लिखा, ” भारत के वित्तीय प्रौद्योगिकी परिवेश में अपार अवसरों तथा नवाचार व विकास को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी के महत्व पर विचारों का आदान-प्रदान किया.” मंत्री ने कुक के साथ अपनी बैठक के बारे में कहा, ” हमने भारत के अवसरों, टिकाऊ गतिविधियों और हीरा उद्योग के लिए विकास की संभावनाओं पर चर्चा की.” गोयल ने भारत से आए मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ भी बातचीत की. इसमें उद्योग मंडल फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के वरिष्ठ वाइस चेयरमैन अनंत गोयनका और पूर्व अध्यक्ष हर्ष पति सिंघानिया तथा राजन भारती मित्तल शामिल रहे.

गोयल अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा मंगलवार को ब्रिटेन की वित्त मंत्री रेचल रीव्स से मुलाकात करेंगे. इस यात्रा के दौरान सभी की निगाहें मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर जारी वार्ता पर है जिसे पिछले वर्ष आम चुनाव के कारण रोक दिए जाने के बाद फरवरी में फिर से शुरू किया गया. ब्रिटेन के वाणिज्य विभाग के प्रवक्ता ने कहा, ” यह सरकार भारत के साथ उपयुक्त समझौता करने के लिए प्रतिबद्ध है जिससे ब्रिटेन के व्यवसायों के लिए पहुंच में सुधार होगा, शुल्क में कटौती होगी और व्यापार सस्ता व सुगम होगा.”

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