परेश रावल की आगामी फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ के पोस्टर से उठा विवाद, निर्माताओं ने स्पष्टीकरण किया जारी

नयी दिल्ली. अभिनेता परेश रावल की आगामी फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ के पोस्टर में उन्हें ताजमहल का गुंबद हटाते और उसमें से भगवान शिव की मूर्ति निकलते हुए दिखाए जाने को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है. इस पर फिल्म निर्माताओं ने कहा कि यह फिल्म ‘किसी धार्मिक मामले से संबंधित नहीं है.’ ‘्स्विवणम ग्लोबल र्सिवस प्राइवेट लिमिटेड’ के बैनर तले बन रही इस फिल्म का निर्देशन तुषार अमरीश गोयल ने किया है. उसका निर्माण सीए सुरेश झा ने किया है.

रावल और फिल्म निर्माताओं ने सोमवार को फिल्म का पोस्टर जारी किया. पोस्टर के शीर्षक में लिखा है, ”क्या होगा अगर आपको जो कुछ भी प­ढ़ाया-सिखाया गया है वह सब झूठ हो? सच सिर्फ छिपाया नहीं गया है, उसे परखा भी जा रहा है. 31 अक्टूबर को अपने नज.दीकी सिनेमाघरों में ‘द ताज स्टोरी’ के साथ सच्चाई को जानिए.” इस पर तीखी प्रतिक्रिया हुई और कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसे ‘दुष्प्रचार’ और ‘फर्जी’ करार दिया है. ‘्स्विवणम ग्लोबल र्सिवस प्राइवेट लिमिटेड’ ने कुछ ही देर बाद एक बयान जारी कर इसका जवाब दिया.

उसने कहा, ”फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ के निर्माता स्पष्ट करते हैं कि यह फिल्म किसी भी धार्मिक मुद्दे से संबंधित नहीं है, न ही यह दावा करती है कि ताजमहल के अंदर कोई शिव मंदिर है. यह पूरी तरह से ऐतिहासिक तथ्यों पर केंद्रित है. हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप फिल्म देखें और अपनी राय बनाएं.” लेकिन बहस थमने का नाम नहीं ले रही है. कई लोगों ने कहा कि यह हाल में रिलीज हुई ‘द उदयपुर फाइल्स’ और ‘द बंगाल फाइल्स’ जैसी फिल्मों के बाद सिनेमा में ‘प्रोपगैंडा’ का नवीनतम उदाहरण प्रतीत होता है.

एक व्यक्ति ने ‘एक्स’ पर लिखा, ”पोस्टर को देखकर ऐसा लगता है कि यह ताजमहल को एक धार्मिक स्थल के रूप में चित्रित करने का प्रयास है. ताजमहल दो प्रेमियों की कब्र है. इससे ज़्यादा कुछ नहीं.” एक अन्य ने ‘एक्स’ पर लिखा, ”मध्य काल में, भारत आए सभी यूरोपीय यात्रियों, चाहे वे फ्रांस्वा र्बिनयर हों, जीन-बैप्टिस्ट टैर्विनयर हों या पीटर मुंडी, सभी ने ताजमहल को मंदिर नहीं, बल्कि शाहजहां द्वारा निर्मित एक मकबरा बताया था.” एक अन्य उपयोगकर्ता ने ‘द ताज स्टोरी’ जैसी फिल्म बनाने के लिए रावल की आलोचना की. उसने कहा, ”क्या पतन है सर, परेश रावल, ‘ओह माई गॉड’ से नकली ‘द ताज स्टोरी’ तक आ गये.” उसका इशारा 2012 में आई समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फिल्म ‘ओह माई गॉड’ की ओर था, जिसमें उन्होंने एक नास्तिक वकील की भूमिका निभाई थी, जिसने ईश्वर पर मुकदमा किया था.

एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर लिखा, ”फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ उस खारिज किए गए दावे को फिर से जीवित करती है कि ताजमहल कभी एक हिंदू मंदिर था. इतिहासकार इसे छद्म इतिहास बताकर खारिज करते हैं, लेकिन आलोचकों को डर है कि यह सांप्रदायिक विभाजन को ब­ढ़ावा देगा. ताज 17वीं सदी की मुगलकालीन कृति है – भारत की साझा विरासत.” रावल 2014 से 2019 तक अहमदाबाद पूर्व से भाजपा सांसद थे. हालांकि फिल्म की कथानक अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन निर्माताओं ने पहले एक बयान में कहा था कि यह फिल्म ‘ताजमहल के 22 बंद दरवाजों के पीछे छिपे सवालों और रहस्यों’ को उजागर करती है.

निर्माताओं ने दावा किया कि फिल्म ‘भारतीय इतिहास के एक ऐसे अध्याय को प्रस्तुत करने का वादा करती है, जिसे पहले कभी किसी ने प्रस्तुत करने की हिम्मत नहीं की.’ इसी साल 14 अगस्त को, 70 वर्षीय रावल ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर फिल्म का एक छोटा सा दृश्य साझा किया था. उन्होंने इसके शीर्षक में लिखा था, ”आज.ादी के 79 साल बाद भी क्या हम बौद्धिक आतंकवाद के गुलाम हैं?” अदालत के दृश्य में रावल जिस किरदार में न्यायाधीशों के सामने बहस कर रहे हैं, उसे यह कहते हुए दिखाया गया, ”आजादी के 78 साल बाद भी हमारी सोच, नजरिया उन्हीं लोगों के तलवे चाट रहा है, जिन्होंने लेश मात्र संकोच नहीं किया, हमारी पूरी सुरक्षा को खत्म करने की, हमारे अस्तित्व को मिटाने की.” यह किरदार कहता है, ”यदि हम उन्हें आज नहीं उठाते, तो हमारा इतिहास और हमारा अस्तित्व सिर्फ सवाल बनकर रह जाएंगे.” ‘द ताज स्टोरी’ में जाकिर हुसैन, अमृता खानविलकर, स्नेहा वाघ और नमित दास जैसे अन्य कलाकार भी हैं.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button