
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के बढ.ते मामलों पर चिंता जताते हुए इससे बचने के लिए रविवार को देशवासियों से ‘रुको, सोचो और एक्शन लो’ का मंत्र साझा किया और इस बारे में अधिक से अधिक जागरूकता फैलाने का आह्वान किया. आकाशवाणी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 150वीं कड़ी में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश के रचनात्मक ऊर्जा की एक लहर चल रही है और एनिमेशन की दुनिया में ‘मेड इन इंडिया’ और ‘मेड बाइ इंडियंस’ छाया हुआ है.
उन्होंने कहा कि एनिमेशन की दुनिया में भारत नयी क्रांति की राह पर है जबकि ‘गेमिंग क्षेत्र’ का भी विस्तार हो रहा है और ये दुनिया में लोकप्रिय हो रहे हैं. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर हो रहा भारत, हर क्षेत्र में कमाल कर रहा है. ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े एक फरेबी और पीड़ित के बीच बातचीत का वीडियो भी साझा किया और कहा कि कोई भी एजेंसी न तो धमकी देती है, न ही वीडियो कॉल पर पूछताछ करती है और न ही पैसों की मांग करती है.
इंटरनेट के तेजी से बढ.ते उपयोग के बीच ‘डिजिटल अरेस्ट’ फरेब का एक बड़ा माध्यम बनता जा रहा है. इसमें किसी शख्स को ऑनलाइन माध्यम से डराया जाता है कि वह सरकारी एजेंसी के माध्यम से ‘अरेस्ट’ हो गया है और उसे जुर्माना देना होगा. कई लोग ऐसे मामलों में डर जाते हैं और शिकार बन जाते हैं. प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ के दर्शकों को विस्तार से बताया कि इस प्रकार के फरेब करने वाले गिरोह कैसे काम करते हैं और कैसे ‘खतरनाक खेल’ खेलते हैं.
उन्होंने कहा कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ के शिकार होने वालों में हर वर्ग और हर उम्र के लोग हैं और वे डर की वजह से अपनी मेहनत से कमाए हुए लाखों रुपए गंवा देते हैं. उन्होंने कहा, ”इस तरह का कोई कॉल आए तो आपको डरना नहीं है. आपको पता होना चाहिए कि कोई भी जांच एजेंसी फोन कॉल या वीडियो कॉल पर इस तरह पूछताछ कभी नहीं करती.” उन्होंने इससे बचने के लिए देशवासियों से ‘रुको, सोचो और एक्शन लो’ का मंत्र साझा किया.
उन्होंने कहा, ”ऐसे मामलों में घबराएं नहीं. शांत रहें. जल्दबाजी में कोई कदम ना उठाएं. किसी को अपनी व्यक्तिगत जानकारी ना दें. संभव हो तो स्क्रीनशॉट लें और रिकॉर्डिंग जरूर करें.” उन्होंने कहा कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर ऐसी धमकी नहीं देती और न ही पूछताछ करती है और न वीडियो कॉल पर ऐसे पैसे की मांग करती है.
उन्होंने कहा, ”अगर डर लगे तो समझिए कुछ गड़बड़ है.” प्रधानमंत्री ने लोगों से ऐसे मामलों में राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर डायल करने और साइबर क्राइम डॉट जीओवी डॉट इन पर रिपोर्ट करने के अलावा परिवार और पुलिस को सूचना देने का आह्वान किया.
उन्होंने कहा, ”सबूत सुरक्षित रखें. यह तीन चरण आपकी डिजिटल सुरक्षा का रक्षक बनेंगे. मैं फिर कहूंगा ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई चीज नहीं है. यह सिर्फ धोखाधड़ी है, झूठ है और फरेब है. बदमाशों का गिरोह एैसा कर रहा है और जो लोग ऐसा कर रहे हैं वह समाज के दुश्मन हैं.”
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर जो फरेब चल रहा है उससे निपटने के लिए तमाम जांच एजेंसी राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रही हैं और आपसी तालमेल के लिए ‘नेशनल साइबर कोआर्डिनेशन’ केंद्र की स्थापना की गई है.
उन्होंने कहा, ”ऐसी धोखाधड़ी करने वाली हजारों वीडियो कॉलिंग आईडी को ब्लॉक किया गया है. लाखों सिम कार्ड और बैंक अकाउंट को भी ब्लॉक किया गया है.” मोदी ने कहा कि ऐसे मामलों में एजेंसियां अपना काम कर रही हैं लेकिन ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर हो रहे फरेब से बचने के लिए जागरूकता बहुत जरूरी है.
उन्होंने स्कूलों और कॉलेजों सहित हर जगह इसके बारे में लोगों से जागरूकता फैलाने का आह्वान किया. इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों से भारत को एनिमेशन की दुनिया की वैश्विक शक्ति बनाने का संकल्प लेने का भी आह्वान किया. छोटा भीम, कृष्णा, हनुमान और मोटू-पतलू जैसे एनिमेशन चरित्रों की लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि यह सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दूसरे देश के बच्चों को भी खूब आर्किषत करते हैं और इन्हें चाहने वाले भी दुनियाभर में हैं.
उन्होंने कहा, ”एनिमेशन की दुनिया में भारत नई क्रांति करने की राह पर है. भारत के गेमिंग स्पेस का भी तेजी से विस्तार हो रहा है. भारतीय गेम्स भी इन दिनों दुनिया-भर में लोकप्रिय हो रहे हैं.” पिछले दिनों भारत के अग्रणी गेमर्स से हुई अपनी मुलाकात को याद करते हुए उन्होंने कहा, ”वाकई, देश में रचनात्मक ऊर्जा की एक लहर चल रही है. एनिमेशन की दुनिया में ‘मेड इन इंडिया’ और ‘मेड बाइ इंडियंस’ छाया हुआ है.” प्रधानमंत्री ने इस बात पर खुशी जताई कि भारतीय प्रतिभाएं वैश्विक स्तर पर भी गेमिंग में मह्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.
उन्होंने स्पाइडर मैन और ट्रांसफॉर्मर्स जैसी फिल्मों में भारतीय एनिमेटर हरि नारायण राजीव के योगदान की चर्चा की और कहा कि अब भारत के युवा मौलिक सामग्री तैयार कर रहे हैं, जो देश की संस्कृति की झलक दर्शाती है. उन्होंने कहा, ”एनिमेशन क्षेत्र आज एक ऐसे उद्योग का रूप ले चुका है जो दूसरे उद्योगों को ताकत दे रहा है.” प्रधानमंत्री ने ‘डिजिटल पर्यटन’ की बढ. रही लोकप्रियता का भी जिक्र किया और युवाओं से अपनी सृजनात्मकता को विस्तार देने की अपील की.
उन्होंने कहा, ”क्या पता दुनिया का अगला सुपर हिट एनिमेशन आपके कम्प्यूटर से निकले! अगला लोकप्रिय गेम आपकी रचना हो. शिक्षा के क्षेत्र में एनिमेशन का आपका नवोन्मेष बड़ी सफलता हासिल कर सकता है.” प्रधानमंत्री ने 28 अक्टूबर को विश्व एनिमेशन दिवस का जिक्र करते हुए लोगों से भारत को एनिमेशन की दुनिया में पावरहाउस बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया. मोदी ने अपने संबोधन के दौरान आत्मनिर्भर भारत अभियान का भी उल्लेख किया और कहा कि यह देश की सामूहिक चेतना का हिस्सा बन गया है और पग-पग पर हमारी प्रेरणा और जुनून बन गया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि दस साल पहले जटिल प्रौद्योगिकी को भारत में विकसित करने की बात पर कई लोगों को विश्वास नहीं होता था, तो कई लोग उपहास उड़ाते थे.
उन्होंने कहा, ”लेकिन आज वही लोग, देश की सफलता को देखकर हैरत में रहते हैं. आत्मनिर्भर हो रहा भारत, हर क्षेत्र में कमाल कर रहा है.” मोदी ने कहा कि एक जमाने में भारत मोबाइल फोन आयात करता था और आज वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माता बन गया है जबकि कभी दुनिया में सबसे ज्यादा रक्षा उपकरण खरीदने वाला भारत आज, 85 देशों को निर्यात कर रहा है और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत आज, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश बना है.
उन्होंने कहा, ”आत्मनिर्भरता का ये अभियान अब सिर्फ सरकारी अभियान नहीं है, अब आत्मनिर्भर भारत अभियान एक जन अभियान बन रहा है. हम हर क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं.” प्रधानमंत्री ने इस कड़ी में लद्दाख के हानले में एशिया की सबसे बड़ी ‘इमेजिंग टेलीस्कोप मेस’ का उद्घाटन किए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि यह भी ‘मेड इन इंडिया’ है.
इस उपलब्धि को ‘आत्मनिर्भर भारत का सामर्थ्य’ करार देते हुए उन्होंने श्रोताओं से कहा, ”सोचिए, जिस स्थान पर माइनस 30 डिग्री सेल्सियस की ठंड पड़ती हो और जहां ऑक्सीजन तक का अभाव हो, वहां हमारे वैज्ञानिकों और स्थानीय उद्योग ने वो कर दिखाया है, जो एशिया के किसी देश ने नहीं किया.” प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आत्मनिर्भर होते भारत के ज्यादा-से-ज्यादा उदाहरण और ऐसे प्रयासों को साझा करने का आग्रह किया और त्योहारों के इस मौसम में इस अभियान को ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र के साथ और मजबूत करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा, ”हमें न सिर्फ भारत को आत्मनिर्भर बनाना है बल्कि अपने देश को नवोन्मेष के वैश्विक ‘पावरहाउस’ के रूप में मजबूत भी करना है.”
आजादी में योगदान देने वाले महापुरुष अतीत में खो नहीं जाते, भविष्य का रास्ता दिखाते हैं: मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा और सरदार पटेल की 150वीं जयंती के वर्ष को जीवंत बनाने के लिए देशवासियों से सहभागिता का आह्वान करते हुए रविवार को कहा कि आजादी के आंदोलन में योगदान देने वाले महापुरुष अतीत में खो नहीं जाते हैं, बल्कि उनका जीवन वर्तमान को भविष्य का रास्ता दिखाता है. आकाशवाणी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 150वीं कड़ी में अपने विचार साझा करते हुए झारखंड विधानसभा चुनाव से पूर्व उन्होंने यह भी कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर उनकी जन्मस्थली उलिहातू की यात्रा उनके जीवन के खास पलों में एक थी, जिसका उनपर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा.
उन्होंने कहा, ”अगर आप मुझसे पूछें कि मेरे जीवन के सबसे यादगार पल क्या रहे तो कितने ही वाकये याद आते हैं. लेकिन, इनमें भी एक पल ऐसा है जो बहुत खास है. वो पल था जब पिछले साल 15 नवंबर को मैं भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर उनकी जन्मस्थली झारखंड के उलिहातू गांव गया था.” उन्होंने कहा, ”इस यात्रा का मुझ पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा.” उन्होंने याद दिलाया कि वह देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्हें इस पवित्र भूमि की मिट्टी को अपने मस्तक से लगाने का सौभाग्य मिला.
उन्होंने कहा, ”उस क्षण, मुझे न सिर्फ स्वतंत्रता संग्राम की शक्ति महसूस हुई, बल्कि इस धरती की शक्ति से जुड़ने का भी अवसर मिला. मुझे यह एहसास हुआ कि कैसे एक संकल्प को पूरा करने का साहस देश के करोड़ों लोगों का भाग्य बदल सकता है.” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में हर युग में कुछ चु नौतियां आईं और हर युग में ऐसे असाधारण भारतवासी जन्मे, जिन्होंने इन चुनौतियों का सामना किया. इस क्रम में बिरसा मुंडा और सरदार पटेल का उल्लेख किया.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने दोनों स्वतंत्रता सेनानियों की 150वीं जयंती को मनाने का निश्चय किया है. सरदार पटेल की जयंती का वर्ष 31 अक्टूबर से और इसके बाद भगवान बिरसा मुंडा का जयंती वर्ष 15 नवम्बर से शुरू होगा. प्रधानमंत्री ने कहा, ”इन दोनों महापुरुषों ने अलग-अलग चुनौतियां देखीं, लेकिन दोनों की दृष्टि एक थी- ‘देश की एकता’.” मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने बीते वर्षों में ऐसे महान नायक-नायिकाओं की जयंतियों को नयी ऊर्जा से मनाकर, नई पीढ़ी को नई प्रेरणा दी है. झारखंड में दो चरणों में 13 और 20 नवंबर को मतदान होना है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष 31 अक्तूबर को दिवाली के कारण इस वर्ष सरदार पटेल की जयंती पर ‘रन फॉर यूनिटी’ यानी ‘एकता के लिए दौड़’ कार्यक्रम का आयोजन 29 अक्तूबर को आयोजित किया जाएगा. उन्होंने इस कार्यक्रम में लोगों से अधिक संख्या में भाग लेने का आग्रह किया. उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान न्यूयॉर्क के ‘टाइम्स स्कवेयर’ से अफ्रीका के छोटे से गांव तक, विश्व के लोगों ने भारत के सत्य और अहिंसा के संदेश को समझा, उसे फिर से जाना और उसे जिया. उन्होंने कहा कि जब देश ने स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयंती मनाई तो देश के नौजवानों ने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शक्ति को समझा.
उन्होंने कहा, ”इन योजनाओं ने हमें ये एहसास दिलाया कि हमारे महापुरुष अतीत में खो नहीं जाते, बल्कि उनका जीवन हमारे वर्तमान को भविष्य का रास्ता दिखाता है.” बिरसा मुंडा और सरदार पटेल के जयंती वर्ष का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा, ”सरकार ने भले ही इन महान विभूतियों की 150वीं जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का निर्णय लिया है लेकिन आपकी सहभागिता ही इस अभियान में प्राण भरेगी, इसे जीवंत बनाएगी.” उन्होंने देशवासियों से इस अभियान का हिस्सा बनने का आह्वान करते हुए लौह पुरुष सरदार पटेल से जुड़े अपने विचार और कार्य तथा धरती-आबा बिरसा मुंडा की प्रेरणाओं को दुनिया के सामने लाने के लिए कहा.
उन्होंने कहा, ”आईये, एक साथ मिलकर इस उत्सव को भारत की अनेकता में एकता का उत्सव बनाएं, इसे विरासत से विकास का उत्सव बनाएं.” प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘कैलीग्राफी’ का भी उल्लेख किया और कहा कि आजकल जम्मू-कश्मीर में स्थानीय संस्कृति को लोकप्रिय बनाने के लिए कैलीग्राफी का उपयोग हो रहा है. प्रधानमंत्री ने अनंतनाग के फिरदौसा बशीर का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने इसके माध्यम से स्थानीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया है. उन्होंने कहा कि इसी तरह का प्रयास उधमपुर के गौरीनाथ भी कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, ”वह एक सदी से अधिक पुरानी सारंगी के माध्यम से डोगरा संस्कृति और धरोहर को सहेजने में जुटे हैं.” प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में ऐसी असाधारण प्रतिभा के बहुत लोग हैं जो अपनी प्रतिभा से स्थानीय धरोहर का संरक्षण कर रहे हैं. इस कड़ी में उन्होंने डी वैकुंठम और छत्तीसगढ. में नारायणपुर के बुटलूराम माथरा का उल्लेख किया जो क्रमश: तेलंगाना में पचास वर्षों से चेरियाल लोक कला को लोकप्रिय बना रहे हैं और अबूझमाड़िया जनजाति की लोककला का संरक्षण कर रहे हैं.
प्रधानमंत्री ने रूस के याकुत्स्क में कालिदास के अभिज्ञान शाकुंतलम के मंचन पर प्रसन्नता जताई और कहा कि हाल ही की लाओस यात्रा के दौरान स्थानीय कलाकारों द्वारा लाओस की रामायण का मंचन देखना उनके लिए बेहद रोमांचकारी रहा. उन्होंने कहा कि कुवैत में अब्दुल्ला अल बारून ने महाभारत और रामायण का अरबी में अनुवाद किया है जबकि पेरू की एरलिंदा गार्सिआ युवाओं को भरतनाट्यम सिखा रही हैं तथा इसी तरह मारिया वालदेस ओडिसी नृत्य का प्रशिक्षण दे रही हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य दक्षिण अमेरिका के कई देशों में लोकप्रिय हो रहा है. उन्होंने लोगों से हैशटेग ‘कल्चरल ब्रिज’ के माध्यम से ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया. मोदी ने ‘मन की बात’ के इस कार्यक्रम में ‘फिट इंडिया’ के बारे में भी बात की और धनतेरस, दीवाली, छठ पूजा और गुरुनानक जयंती की शुभकामनाएं दीं.
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पुतिन को झारखंड की कलाकृति भेंट की
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल में संपन्न हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को झारखंड की एक कलाकृति भेंट की, जबकि ईरान और उज्बेकिस्तान के नेताओं को महाराष्ट्र के हस्तशिल्प उत्पाद उपहार में भेंट किए. अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी. अधिकारियों के मुताबिक, मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान को ‘मदर ऑफ पर्ल’ (एमओपी) सी-शेल फूलदान भेंट किया.
अधिकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों के कारीगरों से प्राप्त यह फूलदान राज्य की कुशल शिल्पकला और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रमाण है. मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव को एक पारंपरिक वारली पेंटिंग भेंट की, जो महाराष्ट्र की वारली जनजाति की एक प्रतिष्ठित कला है. अधिकारियों ने पेंटिंग के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला, जो लगभग 5,000 वर्ष पुरानी है और अब अपनी विशिष्ट शैली और सुंदरता के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है.
बुनियादी ज्यामितीय आकृतियों से निर्मित वारली चित्रकला प्रकृति, त्योहारों और सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से आदिवासी जीवन को दर्शाती है. वर्ष 2014 में भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्राप्त वारली कला समकालीन माध्यमों में विकसित हो चुकी है, जो एक स्थायी तथा अनुकूलनीय विरासत का प्रतीक है. पुतिन को झारखंड के हजारीबाग जिले की एक सोहराई पेंटिंग भेंट की गई. सोहराई पेंटिंग को ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) उत्पाद के रूप में मान्यता प्राप्त है. वे प्राकृतिक रंगों और सरल उपकरणों के उपयोग के लिए जाने जाते हैं.
कलाकार अक्सर जटिल डिजाइन बनाने के लिए टहनियों, चावल के भूसे या यहां तक कि उंगलियों से बने ब्रश का उपयोग करते हैं. वे अपनी सरल लेकिन अभिव्यंजक कहानी कहने के लिए जाने जाते हैं. अधिकारियों ने बताया कि पशु, पक्षी और प्रकृति का चित्रण कृषि जीवन शैली और आदिवासी संस्कृति में वन्यजीवों के प्रति श्रद्धा का प्रतिबिंब है.
देश में रचनात्मक ऊर्जा की लहर, एनिमेशन की दुनिया में ‘मेड इन इंडिया’ छाया हुआ है: मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि देश के रचनात्मक ऊर्जा की एक लहर चल रही है और एनिमेशन की दुनिया में ‘मेड इन इंडिया’ और ‘मेड बाइ इंडियंस’ छाया हुआ है. उन्होंने कहा कि एनिमेशन की दुनिया में भारत नयी क्रांति की राह पर है जबकि गेमिंग स्पेस का भी यहां विस्तार हो रहा है और वह दुनिया में लोकप्रिय हो रहे हैं.
आकाशवाणी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 150वीं कड़ी में अपने विचार साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर हो रहा भारत, हर क्षेत्र में कमाल कर रहा है. इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों से भारत को एनिमेशन की दुनिया की वैश्विक शक्ति बनाने का संकल्प लेने का भी आह्वान किया. छोटा भीम, कृष्णा, हनुमान और मोटू-पतलू जैसे एनिमेशन चरित्रों की लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि यह सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दूसरे देश के बच्चों को भी खूब आर्किषत करते हैं और इन्हें चाहने वाले भी दुनियाभर में हैं.
उन्होंने कहा, ”एनिमेशन की दुनिया में भारत नई क्रांति करने की राह पर है. भारत के गेमिंग स्पेस का भी तेजी से विस्तार हो रहा है. भारतीय गेम्स भी इन दिनों दुनिया-भर में लोकप्रिय हो रहे हैं.” पिछले दिनों भारत के अग्रणी गेमर्स से हुई अपनी मुलाकात को याद करते हुए उन्होंने कहा, ”वाकई, देश में रचनात्मक ऊर्जा की एक लहर चल रही है. एनिमेशन की दुनिया में ‘मेड इन इंडिया’ और ‘मेड बाइ इंडियंस’ छाया हुआ है.” प्रधानमंत्री ने इस बात पर खुशी जताई कि भारतीय प्रतिभाएं वैश्विक स्तर पर भी गेमिंग में मह्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.
उन्होंने स्पाइडर मैन और ट्रांसफॉर्मर्स जैसी फिल्मों में भारतीय एनिमेटर हरि नारायण राजीव के योगदान की चर्चा की और कहा कि अब भारत के युवा मौलिक सामग्री तैयार कर रहे हैं, जो देश की संस्कृति की झलक दर्शाती है. उन्होंने कहा, ”एनिमेशन क्षेत्र आज एक ऐसे उद्योग का रूप ले चुका है कि जो दूसरे उद्योगों को ताकत दे रहा है.” प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ की इस कड़ी में ‘डिजिटल पर्यटन’ की बढ़ रही लोकप्रियता का भी जिक्र किया और युवाओं से अपनी सृजनात्मकता को विस्तार देने की अपील की.
उन्होंने कहा, ”क्या पता दुनिया का अगला सुपर हिट एनिमेशन आपके कम्प्यूटर से निकले! अगला लोकप्रिय गेम आपकी रचना हो. शिक्षा के क्षेत्र में एनिमेशन का आपका नवोन्मेष बड़ी सफलता हासिल कर सकता है.” प्रधानमंत्री ने 28 अक्टूबर को विश्व एनिमेशन दिवस का जिक्र करते हुए लोगों से भारत को एनिमेशन की दुनिया में पावरहाउस बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया.
मोदी ने अपने संबोधन के दौरान आत्मनिर्भर भारत अभियान का भी उल्लेख किया और कहा कि यह देश की सामूहिक चेतना का हिस्सा बन गया है और पग-पग पर हमारी प्रेरणा बन गया है.
उन्होंने कहा, ”आत्मनिर्भरता हमारी नीति ही नहीं, हमारा जुनून बन गया है.” प्रधानमंत्री ने कहा कि दस साल पहले जटिल प्रौद्योगिकी को भारत में विकसित करने की बात पर कई लोगों को विश्वास नहीं होता था तो कई उपहास उड़ाते थे. उन्होंने कहा, ”लेकिन आज वही लोग, देश की सफलता को देखकर अचंभे में रहते हैं. आत्मनिर्भर हो रहा भारत, हर क्षेत्र में कमाल कर रहा है. मोदी ने कहा कि एक जमाने में भारत मोबाइल फोन आयात करता था और आज वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माता बन गया है.
उन्होंने कहा, ”कभी दुनिया में सबसे ज्यादा रक्षा उपकरण खरीदने वाला भारत आज, 85 देशों को निर्यात कर रहा है. अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत आज, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश बना है.” उन्होंने कहा, ”आत्मनिर्भरता का ये अभियान अब सिर्फ सरकारी अभियान नहीं है, अब आत्मनिर्भर भारत अभियान एक जन अभियान बन रहा है. हम हर क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं.” प्रधानमंत्री ने इस कड़ी में लद्दाख के हानले में एशिया की सबसे बड़ी ‘इमेजिंग टेलीस्कोप मेस’ का उद्घाटन किए जाने का जिक्र किया कहा कि यह भी ‘मेड इन इंडिया’ है.
इस उपलब्धि को ‘आत्मनिर्भर भारत का सामर्थ्य’ करार देते हुए उन्होंने श्रोताओं से कहा, ”सोचिए, जिस स्थान पर माइनस 30 डिग्री की ठंड पड़ती हो और जहां ऑक्सीजन तक का अभाव हो, वहां हमारे वैज्ञानिकों और स्थानीय उद्योग ने वो कर दिखाया है, जो एशिया के किसी देश ने नहीं किया.” प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आत्मनिर्भर होते भारत के ज्यादा-से-ज्यादा उदाहरण और ऐसे प्रयासों को साझा करने का आग्रह किया और त्योहारों के इस मौसम में इस अभियान को ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र के साथ और मजबूत करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा, ”हमें न सिर्फ भारत को आत्मनिर्भर बनाना है बल्कि अपने देश को नवोन्मेष के वैश्विक पावरहाउस के रूप में मजबूत भी करना है.”



