
कोलकाता/नयी दिल्ली. पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े एक व्यक्ति की हत्या के विरोध में बुधवार को पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा के कई भूमि पत्तनों पर एक हिंदू समर्थक संगठन के सदस्यों ने प्रदर्शन किए. हावड़ा जिले में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थकों के बीच झड़प भी हुई.
टकराव उस वक्त शुरू हुआ जब पुलिस ने भाजपा के मार्च को हावड़ा पुल तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया, जिससे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षार्किमयों के बीच तीखी बहस हुई. हावड़ा पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”हम किसी को भी लोगों के सामान्य जनजीवन में बाधा डालने और प्रदर्शन के नाम पर यात्रियों को परेशान करने की अनुमति नहीं देंगे. किसी भी प्रकार की परेशानी पैदा करने के प्रयास को रोकने के लिए हम कानून के अनुसार कार्रवाई करेंगे.” पुलिस ने जैसे ही मार्च को आगे बढ़ने से रोका, प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और अवरोधक तोड़ने का प्रयास किया जिससे झड़पें हुईं.
पुलिस ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी आक्रामक हो गए, जिसके कारण सुरक्षार्किमयों को उन्हें तितर-बितर करने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी. सनातनी ऐक्य परिषद के सदस्यों ने पड़ोसी देश में हिंदुओं पर अत्याचार होने का आरोप लगाते हुए उत्तर 24 परगना जिले के पेट्रापोल और घोजाडांगा बंदरगाहों, मालदा के मनोहरपुर मुचिया और कूच बिहार जिले के चांगराबांधा में प्रदर्शन किए.
उत्तर 24 परगना में भाजपा विधायक अशोक कीर्तनिया ने जयंतपुर बाजार से पेट्रापोल सीमा की ओर एक जुलूस का नेतृत्व किया.
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने प्रदर्शनकारियों को ‘जीरो प्वाइंट’ के पास रोक दिया और उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए अवरोधक लगाए. प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध जताया.
मार्च के दौरान कीर्तनिया ने कहा कि पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित किए जाने तक बांग्लादेश प्रशासन को ”सबक सिखाने” के लिए सीमा व्यापार निलंबित रखना चाहिए. घोजाडांगा सीमावर्ती भूमि पत्तन पर भी इसी तरह के प्रदर्शन की खबरें आईं.
हालांकि, ‘पेट्रापोल क्लियरिंग एजेंट्स एसोसिएशन’ के सदस्य कार्तिक चक्रवर्ती ने कहा कि व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित नहीं हुईं क्योंकि प्रदर्शन सड़कों तक ही सीमित रहे और व्यापारिक क्षेत्र को बीएसएफ ने सुरक्षा प्रदान की थी. मालदा के मनोहरपुर सीमावर्ती क्षेत्र में हिंदू समुदाय के सदस्यों ने ‘खोल’ और ‘करताल’ जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाते हुए एक प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे और आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने बल प्रयोग किया और प्रदर्शन में भाग लेने वाले पुरुषों और महिलाओं को ”यातना” दी.
कपड़े की फैक्टरी में काम करने वाले 25 वर्षीय दीपू चंद्र दास को 18 दिसंबर को बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के बालुका में ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला और उनके शव को आग के हवाले कर दिया. सोमवार से ही हिंदू समुदाय और भाजपा ने कोलकाता और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में कई विरोध मार्च निकाले हैं.
मंगलवार को सैकड़ों लोगों ने पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों पर हमले के विरोध में बांग्लादेश उप उच्चायोग तक मार्च करने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में रोक दिया जिससे झड़प हुई और कई लोग घायल हो गए. रैली सियालदह से शुरू हुई थी और यह पार्क सर्कस में बांग्लादेश उप उच्चायोग के कार्यालय की ओर जा रही थी, लेकिन पुलिस ने बेक बागान इलाके में इसे रोक दिया. जब प्रदर्शनकारियों ने अवरोधक तोड़ने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें लाठीचार्ज कर खदेड़ दिया.
कोलकाता में प्रदर्शकारियों पर पुलिस कार्रवाई ‘तुष्टीकरण की राजनीति की पराकाष्ठा’ : भाजपा
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हुए हमले के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ कोलकाता पुलिस की कार्रवाई की बुधवार को कड़ी निंदा की. पार्टी ने इसे पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार की ”तुष्टीकरण की राजनीति की पराकाष्ठा” करार दिया.
केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर उनकी चुप्पी बांग्लादेश की सड़कों पर हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ हत्या के प्रति उनकी ”मौन सहमति” को दर्शाती है. भाजपा की यह प्रतिक्रिया मंगलवार को कोलकाता में बांग्लादेश के उप उच्चायोग की तरफ मार्च कर रहे एक हिंदुत्ववादी संगठन के सैकड़ों समर्थकों की पुलिस के साथ हुई झड़प के एक दिन बाद आई है.
कोलकाता के मध्य में स्थित बेकबागन में बांग्लादेश के उप उच्चायोग कार्यालय के करीब पहुंचने के प्रयास में प्रदर्शनकारियों ने अवरोधक तोड़ दिए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया. इस दौरान कम से कम 12 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया. झड़पों में कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हो गए.
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने पुलिस कार्रवाई को लेकर ममता सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि बांग्लादेश में एक हिंदू मजदूर की हत्या के विरोध में दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन हुए, लेकिन केवल पश्चिम बंगाल में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया.
भंडारी ने यहां भाजपा मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पुलिस ने ”हमारे साधुओं और संतों” को भी नहीं बख्शा. उन्होंने आरोप लगाया, ”पश्चिम बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’ की नींव रखने में सहयोग देने वाली पुलिस ने बांग्लादेश में एक हिंदू की बर्बर हत्या के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हिंदुओं को लाठियों से पीटा. यह तुष्टीकरण की पराकाष्ठा है.” भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ”यह पश्चिम बंगाल में उभरता सबसे बड़ा सांप्रदायिक मॉडल है, क्योंकि ममता बनर्जी ने अपनी सरकार कट्टरपंथियों के हवाले कर दी है.” भंडारी ने इस मुद्दे पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की चुप्पी पर सवाल उठाए.
उन्होंने आरोप लगाया, ”ममता सरकार अपने ‘वोट बैंक’ को खुश करने के लिए प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज का सहारा लेती है, जबकि कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह बांग्लादेश में एक हिंदू की भीड़ द्वारा की गई हत्या को ‘क्रिया-प्रतिक्रिया’ कहकर उचित ठहराते हैं और राहुल गांधी जर्मनी में चुप्पी साधे रहते हैं.” भंडारी ने कहा, ”पूरा विपक्ष हिंदुओं से नफरत करता है. यही कारण है कि उन्होंने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है.”



