
नयी दिल्ली. भारत की राजधानी में स्थित कुतुब मीनार का निर्माण मुगलों के आगमन से 300 साल पहले हुआ था और उसका मुगल काल से कोई नाता नहीं है. सोशल मीडिया के एक वर्ग के दावे का खंडन करते हुए इतिहासकारों ने यह बात कही. देश की सबसे ऊंची इस मीनार की लंबाई 72.5 मीटर है और यह 13वीं शताब्दी में बनकर तैयार हुई थी.
एक टेलीविजन चैनल और एक समाचार वेबसाइट पर इसे मुगलकालीन बताया जा रहा है जिसके बाद से इस दावे को झूठा करार देते हुए सोशल मीडिया पर कई पोस्ट लिखी जा रही हैं. इतिहासकारों का कहना है कि कुतुब मीनार का निर्माण 1193 में कुतुबुउद्दीन ऐबक ने करवाया था जिसने भारत में गुलाम वंश की नींव रखी थी और मुगल भारत में तब आए जब बाबर ने लोधी वंश के अंतिम बादशाह इब्राहिम खान लोधी को 1526 में पानीपत की पहली जंग में हराया था.
इतिहासकार एस इरफान हबीब ने कहा कि कुतुबुद्दीन ऐबक ने इस ढांचे का आधार बनवाया था और उसके दामाद शम्सुद्दीन इल्तुतमिश ने 13 शताब्दी की शुरुआत में मीनार में तीन और मंजिल बनवाकर इसका निर्माण पूरा करवाया. गुलाम वंश 1206 से 1290 तक चला और शासन करने वाला यह दिल्ली सल्तनत का पहला वंश था. इसे मामलुक वंश भी कहा जाता है जिसकी स्थापना कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी जो तुर्क परिवार में जन्मा था लेकिन बाद में उसे अफगानिस्तान के गोर के शासक मुहम्मद गोरी को एक गुलाम के तौर पर बेच दिया गया था.
हबीब ने कहा, ‘‘इसके बाद खिलजी, तुगलक सैयद वंश और लोधी वंश का आगमन हुआ और इसके बाद मुगल आए. इसलिए मुगलों के आने से पूर्व कई अन्य वंश आए थे. अत: जो लोग इसे मुगल इमारत बता रहे हैं वे 300 साल से ज्यादा समय का इतिहास गलत बता रहे हैं.’’ लेखक और इतिहासकार सोहैल हाश्मी के मुताबिक, कुछ लोग मुस्लिमों को मुगल मानने लगे हैं.
हाश्मी ने कहा, ‘‘मुगलों का कुतुब मीनार से कोई लेनादेना नहीं है. जो इसे मुगलकालीन इमारत कह रहे हैं उन्हें हमारे अतीत की कोई जानकारी नहीं है और समय का ज्ञान नहीं है. दरअसल जब वे मुगल कहते हैं तो उनका मतलब मुस्लिम से होता है. वे इन दोनों शब्दों को एक ही मानते हैं.’’ उन्होंने कहा कि कुतुब मीनार के निर्माण और उसकी मरम्मत से मुगलों का कोई सरोकार नहीं.
14.3 मीटर के आधार व्यास के साथ पांच मंजिला स्मारक कुतुब मीनार का व्यास शीर्ष पर 2.7 मीटर रह जाता है. इस पर अरबी भाषा में कुरान की आयतों को बेहद खूबसूरती से उकेरा गया है. इसे 1993 में यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी गई थी.
कुतुब मीनार की जहां पहली तीन मंजिलें लाल बलुआ पत्थर से बनी हैं, वहीं चौथी और पांचवीं मंजिल संगमरमर और बलुआ पत्थर की हैं.
हाशमी ने बताया, ‘‘तुगलक शासकों में से अंतिम शासक ने शीर्ष मंजिल को एक के बजाय दो में फिर से बनवाया. यही कारण है कि अब आप जो शीर्ष दो मंजिल देखते हैं, उनमें निचली मंजिलों के विपरीत बहुत अधिक संगमरमर है. यहां तक ??कि मीनार का आकार भी है पहली तीन मंजिलों की तुलना में शीर्ष दो मंजिलों में अलग है.’’



