राजीव चंद्रशेखर ने 2004 से 2009 तक करगिल विजय दिवस नहीं मनाने पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया

नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने बुधवार को कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि उनकी (विपक्षी दलों की) सरकार ने 2004 से 2009 तक ‘करगिल विजय दिवस’ नहीं मनाया और अब वे अपने नये गठबंधन (इंडिया) के नाम की आड़ में छिपने की कोशिश कर रहे हैं.

चंद्रशेखर ने 2009 में राज्यसभा में पेश अपने प्रस्ताव की प्रति साझा करते हुए ट्वीट किया, ”क्या आप जानते हैं कि 2004-2009 तक कांग्रेस नीत संप्रग (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) सरकार ने मेरे द्वारा संसद में मुद्दा उठाए जाने तक करगिल विजय दिवस नहीं मनाया था.” चंद्रशेखर ने प्रस्ताव में लिखा था कि जो सदस्य इसको मनाने का विरोध इस आधार पर कर रहे हैं कि वह ”भारतीय जनता पार्टी (भजपा) का युद्ध” था तो उन्हें यह मजाक बंद करना चाहिए.

उन्होंने कहा, ”यह देश के प्रति हमारा कर्तव्य है कि इन कुर्बानियों और कर्तव्यनिष्ठा को याद किया जाए.” करगिल युद्ध 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी-नीत सरकार के कार्यकाल में लड़ा गया. भाजपा सदस्य ने कहा, ”मेरी लगातार मांग के बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने 2010 से करगिल विजय दिवस के दिन श्रद्धांजलि देने की परंपरा की शुरुआत की.”

उन्होंने कहा, ”यह वही संप्रग है, जो अपना चेहरा नये नाम (इंडिया) की ओट में छिपाना चाहती है. वैसा राजनीतिक दल और परिवार जो करगिल विजय दिवस अर्थात हमारे सशस्त्र बलों की सेवा एवं बलिदान से संबंधित कार्यक्रम नहीं मनाना चाहता था अब खुद को नए नाम ‘इंडिया’ से प्रस्तुत करना चाहती है. यह वही कांग्रेस है जिसने बालाकोट हवाई हमले का मखौल उड़ाया था, र्सिजकल स्ट्राइक का मजाक उड़ाया, विदेश में भारत को बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ा और अब खुद को ‘इंडिया’ के तौर पर पेश करना चाहती है.” करगिल दिवस पाकिस्तान पर जीत के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. चंद्रशेखर लंबे समय से सुरक्षाबलों के हितों से जुड़े मामलों से संबद्ध रहे हैं और दिल्ली तथा बेंगलुरु में ‘समर स्मारक’ के समर्थकों में से रहे हैं.

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