मौजूदा अनिश्चितताओं, मुख्य मुद्रास्फीति में वृद्धि के कारण रेपो दर को यथावत रखा : मल्होत्रा

Author: www.navabharat.news
UPDATED: Wed, 06 Aug 2025 08:42 PM
मौजूदा अनिश्चितताओं, मुख्य मुद्रास्फीति में वृद्धि के कारण रेपो दर को यथावत रखा : मल्होत्रा
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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं, नीतिगत दरों में एकबारगी बड़ी कटौती और मुख्य मुद्रास्फीति में वृद्धि के कारण केंद्रीय बैंक ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया है.

चालू वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करने के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत में मल्होत्रा ने वृद्धि को समर्थन देने के लिए आरबीआई की प्रतिबद्धता की पुष्टि की और कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की 6.5 प्रतिशत की वृद्धि अपेक्षा से धीमी है. मल्होत्रा ने कहा कि छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) सतर्क रहेगी और दरों पर उचित निर्णय लेने के लिए सभी आने वाले आंकड़ों पर नजर रखेगी. हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि दरों में कटौती की संभावनाएं कम होती जा रही हैं.

ब्याज दरों को यथावत रखने के सर्वसम्मत निर्णय के कारणों को गिनाते हुए मल्होत्रा ने कहा, ” हमने फरवरी से जून तक चार महीने की छोटी अवधि में रेपो दर में एक प्रतिशत की कटौती की है. इसका लाभ अब भी मिल रहा है.” शुल्क वार्ताओं और अस्पष्ट भू-राजनीतिक पहलुओं की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वैश्विक अनिश्चितताएं कायम हैं. इसके अलावा बढ़ती मुख्य मुद्रास्फीति ने भी नीतिगत निर्णय को प्रभावित किया.

ब्याज दरों में कटौती के बावजूद ऋण वृद्धि में तेजी नहीं आने के बारे में सीधे तौर पर अपने विचार व्यक्त किए बिना गवर्नर ने कहा कि कुछ हद तक लाभ हस्तांतरण अभी होना बाकी है. उन्होंने कहा कि यदि ब्याज दरें कम होती हैं, तो इससे ऋण में वृद्धि होगी और समग्र वृद्धि की गति भी बढ़ेगी. खुदरा कर्ज के मुख्य आधार आवास ऋण में वृद्धि के बारे में मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई का मानना है कि इस खंड में वृद्धि 14 प्रतिशत के साथ ” काफी अच्छी” रहेगी…

उन्होंने कहा कि ऋणदाताओं की ब्याज दरों में आरबीआई द्वारा की गई सभी कटौतियों के परिणाम सामने आने में अधिक समय लगता है. इसके बाद मकान खरीदने वालों को दीर्घकालिक खरीद पर निर्णय लेने में अधिक समय लगता है जिससे संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में ऋण में और अधिक वृद्धि होगी.

गवर्नर कहा कि जून में कुल मुद्रास्फीति के घटकर 2.1 प्रतिशत आने की प्रमुख वजह खाद्य मुद्रास्फीति में कमी है. उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्रास्फीति और खाद्य मुद्रास्फीति दोनों ही आंकड़े महत्वपूर्ण हैं और आरबीआई इन पर नजर बनाए हुए है. मल्होत्रा ने ब्याज दरों में कटौती से जीडीपी विस्तार में मदद मिलने के मद्देनजर इसके लिए आरबीआई के हर आवश्यक कदम उठाने की प्रतिबद्धता दोहराई.

उन्होंने कहा, ” ऐसी स्थिति में जो भी करना आवश्यक होगा, हम करते रहेंगे. व्यापार वार्ता अब भी जारी है. हमें उम्मीद है कि हम एक सौहार्दपूर्ण समाधान पर पहुंच जाएंगे.” नौकरशाह से केंद्रीय बैंकर बने मल्होत्रा ने कहा, ” हमारे देश की वृद्धि के लिए मूल्य स्थिरता और आर्थिक वृद्धि का सही संतुलन प्रदान करने के लिए जो भी आवश्यक होगा, उसमें हम पीछे नहीं रहेंगे.” रुपये में गिरावट के मुद्दे पर मल्होत्रा ने कहा कि वर्तमान अनिश्चितताओं के कारण ऐसे परिणाम आश्चर्यजनक नहीं होने चाहिए. खराब ऋण की स्थिति के संबंध में उन्होंने कहा कि बैंकिंग प्रणाली में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की स्थिति संतोषजनक है, सकल एनपीए 2.2 प्रतिशत है जबकि शुद्ध एनपीए 0.5-0.6 प्रतिशत है.

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