मणिपुर में कानून का राज ध्वस्त, प्रधानमंत्री के पास दौरे का समय नहीं: कांग्रेस

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 10 Sep 2024 08:24 PM
मणिपुर में कानून का राज ध्वस्त, प्रधानमंत्री के पास दौरे का समय नहीं: कांग्रेस
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नयी दिल्ली. कांग्रेस ने मणिपुर में इंटरनेट सेवा निलंबित किए जाने के बाद मंगलवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और दावा किया कि प्रदेश में कानून का राज ध्वस्त हो गया है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि वह दुनिया के विभिन्न देशों का दौरा करते हैं, लेकिन उन्हें मणिपुर जाने का समय नहीं मिला. मणिपुर सरकार ने छात्रों के उग्र आंदोलन के बीच मंगलवार को पूरे राज्य में इंटरनेट सेवा पांच दिन के लिए निलंबित कर दी. राज्य के गृह विभाग ने एक अधिसूचना में कहा कि यह निर्णय तस्वीर, नफरती भाषण और नफरती वीडियो के प्रसार के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर अंकुश लगाने के लिए लिया गया है.

रमेश ने प्रधानमंत्री के एक भाषण का वीडियो साझा करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”यहां नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री मणिपुर के लोगों से कह रहे हैं कि वह 15 महीनों में वह कर देंगे जो कांग्रेस 15 वर्षों में नहीं कर सकी. क्या सच में! मणिपुर के समाज के सभी वर्गों से निर्णायक जनादेश मिलने के 15 महीनों के भीतर, उन्होंने राज्य को आग में जलने दिया. यह अभी भी जल रहा है और कोई राहत नजर नहीं आ रही है.” उन्होंने दावा किया, ”उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि राज्य में संवैधानिक तंत्र ध्वस्त हो गया है. फिर भी नरेन्द्र मोदी अडिग हैं. वह दुनिया भर में यात्रा करते हैं, लेकिन 3 मई, 2023 को मणिपुर त्रासदी शुरू होने के बाद से उन्हें राज्य का दौरा करने का समय नहीं मिल पाया.” कांग्रेस महासचिव ने कहा, ”आज एक साल से अधिक समय हो गया है, मणिपुर लगातार जल रहा है. आज इंफाल के मध्य में उनके पोस्टर फाड़ दिए गए, यहां तक कि मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं भी फिर से बंद कर दी गईं. राज्य में कानून का राज चरमरा गया है.”

अदाणी के विदेशी निवेश भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नुकसानदेह: कांग्रेस

कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि अदाणी समूह का विदेश में निवेश का जो तरीका है वो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नुकसानदेह है तथा ऐसे निवेश से चीन के मुकाबले भारत को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की कीमत चुकानी पड़ सकती है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘विशेष मित्रता’ की कीमत भारत को पहले ही घरेलू और वैश्विक स्तर पर कई बार चुकानी पड़ी है. अमेरिकी संस्था ‘हिंडनबर्ग रिसर्च’ की रिपोर्ट आने के बाद से कांग्रेस अदाणी समूह पर अनियमितता और एकाधिकार के आरोप लगातार लगा रही है, हालांकि इस कारोबारी समूह ने सभी आरोपों को खारिज किया है.

रमेश ने एक बयान में आरोप लगाया, ”19 जून, 2020 को नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री का चीन को क्लीन चिट देने वाला बयान, किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए सबसे नुकसानदेह बयानों में से एक था. यह एक सफेद झूठ था जिसने हमारी स्थिति को कमजोर किया और चीनियों को हमारी सीमा के उल्लंघन एवं भूमि पर निरंतर कब्जे की वास्तविकता से इनकार करने में सक्षम बनाया.” उन्होंने दावा किया कि उसके बाद से अनियंत्रित चीनी आयात, निवेश और आप्रवासन के जोखिमों के प्रति सरकार की लापरवाही भी लगातार सामने आई है.

रमेश ने कहा, ”अदाणी समूह के चीन में निवेश करने की योजना के साथ, ऐसा लगता है कि चीन को दी गयी ‘क्लीन चिट’ उसके लिए ‘लेटर ऑफ सपोर्ट’ बनने जा रही है.” उनके मुताबिक, सबसे पहले यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि चीन के प्रति इस सरकार का आर्थिक नीति निर्माण हमेशा से अनुचित रहा है. उन्होंने कहा, ”हमारी सीमाओं पर और हमारी भूमि के भीतर चीनी सैनिकों के बढ़ते राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे के बावजूद, भारत सरकार इस मामले में सुस्ती बरत रही है. टिक टॉक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन आयात बढ़ रहा है और घरेलू स्तर पर तबाही मची है.” कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि सरकार ने भारत में चीनी कामगारों के लिए ‘फास्ट-ट्रैक’ वीजा की व्यवस्था भी की है और चीनी निवेश को प्रोत्साहित किया है.

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