सैफ पर हमला मामला : आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

मुंबई. मुंबई की एक अदालत ने बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर हमले के आरोप में गिरफ्तार बांग्लादेशी नागरिक की पुलिस हिरासत की अवधि बढ़ाने का अनुरोध बुधवार को ठुकरा दिया. अदालत ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजते हुए कहा कि उसकी पुलिस हिरासत बढ़ाने के लिए कोई नया आधार नहीं दिया गया है. सैफ पर हमले के आरोपी मोहम्मद शरीफुल इस्लाम (30) को बुधवार को उसकी पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद बांद्रा की मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया.

न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) कोमल सिंह राजपूत ने आरोपी की हिरासत अवधि बढ़ाने के अनुरोध वाली मुंबई पुलिस की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा, ह्लआगे की पुलिस हिरासत, कम से कम इस स्तर पर, उचित नहीं है.ह्व न्यायमूर्ति राजपूत ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों का हवाला देते हुए जांच अधिकारी से कहा कि अगर कोई नया घटनाक्रम होता , तो पुलिस निर्धारित समय में शेष अवधि के लिए फिर से आरोपी की हिरासत का अनुरोध कर सकती है.

नये आपराधिक कानूनों के तहत पुलिस किसी व्यक्ति की 15 दिनों तक की हिरासत का अनुरोध कर सकती है. अपराध की गंभीरता के आधार पर हिरासत गिरफ्तारी से 40 या 60 दिनों के भीतर एक साथ या छोटे-छोटे हिस्सों में मांगी जा सकती है. इस्लाम कथित तौर पर डकैती के इरादे से 16 जनवरी को तड़के सैफ के बांद्रा स्थित फ्लैट में घुसा था. सैफ से सामना होने पर इस्लाम ने उन पर चाकू से कथित तौर पर छह बार वार किया और वहां से फरार हो गया. उसे 19 जनवरी को पड़ोसी ठाणे जिले से गिरफ्तार किया गया था.

हालांकि, बांग्लादेश में इस्लाम के पिता मोहम्मद रूहूल ने दावा किया कि सैफ के अपार्टमेंट की सीढि.यों पर लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज में दिख रहा शख्स उसका बेटा नहीं है. रूहूल ने कहा कि उसके बेटे को मामले में फंसाया जा रहा है. बुधवार को पुलिस ने आरोपी की हिरासत अवधि बढ़ाने का अनुरोध करते हुए कहा कि उसने अभी तक उन लोगों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी है, जिन्होंने भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने में उसकी मदद की थी. पुलिस ने दलील दी थी कि आरोपी ने अपने वित्तीय लेनदेन के बारे में भी पूरी जानकारी नहीं दी है.

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि जांच के लिए पुलिस की एक टीम कोलकाता भेजी गई थी और उसे संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए. उसने कहा कि सैफ के अपार्टमेंट में लगे सीसीटीवी कैमरे का फुटेज और आरोपी की तस्वीर फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला को भेजी गई है, ताकि ‘फेस रिकग्निशन’ तकनीक की मदद से दोनों का मिलान किया जा सके.

अभियोजन पक्ष ने अदालत को यह भी बताया कि अपराध को अंजाम देते समय और भागने के दौरान आरोपी द्वारा पहने गए कपड़े, अपराध में इस्तेमाल किए गए हथियार और उपकरण, एक गमछा और एक बैग रासायनिक विश्लेषण के लिए फॉरेंसिक प्रयोगशाला भेजा गया है. पुलिस ने अपनी याचिका में कहा कि जिन लोगों ने इस्लाम की बांग्लादेश से भारत आने में मदद की, उनका अभी तक पता नहीं लगाया जा सका है.

याचिका में कहा गया है कि चूंकि, अपराध गंभीर प्रकृति का है, इसलिए इसकी गहन जांच की जरूरत है और पुलिस को आरोपी की अतिरिक्त हिरासत दी जानी चाहिए. बचाव पक्ष के वकील दिनेश प्रजापति और संदीप शेरखाने ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी से जुड़ी जांच पूरी हो चुकी है. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि जांच पूरी हो चुकी है और हिरासत अवधि बढ़ाने के लिए कोई नया आधार नहीं दिया गया है. पुलिस के मुताबिक, इस्लाम ने भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने के बाद अपना नाम बदलकर बिजॉय दास कर लिया था. हमले के बाद सैफ को आपातकालीन सर्जरी करानी पड़ी थी. उन्हें अस्पताल से पांच दिन बाद छुट्टी दे दी गई थी.

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