सरगुजा: पोस्टमार्टम के लिए पैसे मांगने के मामले में संविदा डॉक्टर को हटाया गया, अधिकारी निलंबित

रायपुर. छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में दो बालकों के शवों का पोस्टमार्टम करने के लिए पैसे मांगने के आरोप के बाद राज्य शासन ने सरकारी अस्पताल के संविदा डॉक्टर को हटा दिया है तथा एक स्वास्थ्य अधिकारी को निलंबित कर दिया है. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

अधिकारियों ने बताया कि रविवार (18 मई) को जिले के लुंड्रा विकासखंड के सिलसिला ढोढ़ा झरिया गांव में मछली पालन के लिए बने एक छोटे से तालाब में डूबने से पांच साल के दो चचेरे भाइयों सूरज गिरी और जुगनू गिरी की मौत हो गई थी. उन्होंने बताया कि दोनों मृत बालकों के परिजनों ने आरोप लगाया कि रघुनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टर ने पोस्टमार्टम के लिए 10-10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी और सोमवार को जब स्थानीय ग्रामीणों ने दबाव डाला और शिकायत की तब पोस्टमार्टम किया गया.

अधिकारियों ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद सरगुजा कलेक्टर विलास भोसकर ने आरोपों की जांच के आदेश दिए. उन्होंने बताया कि मामले की जांच के बाद प्रथम दृष्टया पाया गया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, धौरपुर के खंड चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर राघवेंद्र चौबे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर नियंत्रण नहीं रख सके और अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाह रहे तथा उनका यह आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के विपरीत पाया गया.

अधिकारियों ने बताया कि इसलिए उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया. उन्होंने बताया कि इसके साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रघुनाथपुर में पदस्थ अनुबंधित चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अमन जायसवाल को भी लापरवाही का दोषी पाया गया है.

अधिकारियों ने बताया कि जांच में यह स्पष्ट हुआ कि उन्होंने भी अपने दायित्वों का निर्वहन समुचित रूप से नहीं किया और उनका आचरण भी सेवा नियमों के विरुद्ध था, लिहाज़ा उन्हें उनके दायित्वों से कार्यमुक्त कर दिया गया है और निर्देशित किया गया है कि वह रायपुर स्थित स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक के समक्ष तत्काल अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं.

उन्होंने बताया कि इस मामले में कलेक्टर विलास भोसकर ने रघुनाथपुर पीएचसी सेंटर का निरीक्षण किया तथा पीड़ित परिजनों के घर जाकर मुलाकात की. कलेक्टर ने शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया. अधिकारियों ने बताया कि कलेक्टर ने पीड़ित परिजनों से चर्चा कर वास्तविक स्थिति की जानकारी ली और मृत बालकों के परिजनों को तत्काल चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की.
उन्होंने बताया कि कलेक्टर ने संवेदनशील मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करने की बात कही है.

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