
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि राष्ट्रों की सुरक्षा और समृद्धि महासागरों से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है और सरकार ने भारत की समुद्री क्षमताओं को बढ.ाने के लिए कई परिवर्तनकारी कदम उठाए हैं. नाइजीरिया स्थित कैंप कार्यालय से भेजे गए अपने संदेश में मोदी ने मानवता के समृद्ध भविष्य की साझेदारी के वास्ते आम सहमति बनाने के लिए नयी दिल्ली में आयोजित किए जा रहे ‘सागरमंथन, महासागर संवाद’ को सफल बनाने का आह्वान किया.
उन्होंने कहा, ”आज, राष्ट्रों की सुरक्षा और समृद्धि महासागरों से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है. महासागरों की क्षमता को समझते हुए, भारत की समुद्री क्षमताओं को बढ.ाने के लिए कई परिवर्तनकारी कदम उठाए गए हैं.” दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा समुद्री विचार मंच ‘सागरमंथन’ सोमवार को शुरू हुआ.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”महासागरों की क्षमता को देखते हुए, भारत की समुद्री दक्षता को बढ.ाने के लिए कई क्रांतिकारी कदम उठाए गए हैं. पिछले दशक में ‘समृद्धि के बंदरगाह’, ‘प्रगति के बंदरगाह’ और ‘उत्पादकता के बंदरगाह’ के विजन से प्रेरित होकर हमने अपने बंदरगाहों की क्षमता को दोगुना कर दिया है.” उन्होंने कहा, ” बंदरगाहों की कार्यकुशलता को बढ.ाकर, जहाज से माल उतारने तथा लादने के समय को कम करके और एक्सप्रेसवे, रेलवे तथा नदी नेटवर्क के माध्यम से शुरू से अंत तक की कनेक्टिविटी को मजबूत करके हमने भारत के समुद्र तटीय रेखा को बदल दिया है.ह्व भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और इस क्षेत्र के विकास के लिए उठाए गए कदमों पर प्रकाश डालते हुए मोदी ने कहा कि देश की समुद्री परंपरा कई सहस्राब्दियों पुरानी है और यह दुनिया में सबसे समृद्ध परंपराओं में से एक है.
प्रधानमंत्री ने देश की समृद्ध समुद्री विरासत और इस क्षेत्र के विकास के लिए उठाए गए कदमों पर प्रकाश डालते हुए कहा, ह्लभारत की समुद्री परंपरा हजारों साल पुरानी है और यह दुनिया में सबसे समृद्ध है. लोथल और धोलावीरा के संपन्न बंदरगाह शहर, चोल वंश के बेड़े, छत्रपति शिवाजी महाराज के कार्य प्रेरणादायक हैं.”
रानी लक्ष्मीबाई की बहादुरी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी: प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को रानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में उनका साहस एवं प्रयास आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा. रानी लक्ष्मीबाई ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ 1857 के विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसे भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम के रूप में भी जाना जाता है. लक्ष्मीबाई ने उनके राज्य को हड़पने के अंग्रेजों के प्रयास का विरोध करने के लिए बहादुरी से लड़ते हुए अपनी जान दे दी.
मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”साहस और देशभक्ति की सच्ची प्रतिमूर्ति, झांसी की निडर रानी लक्ष्मीबाई को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि. स्वतंत्रता की लड़ाई में उनकी बहादुरी और प्रयास आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे.” प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों में रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व ने दिखाया कि सच्चा दृढ़ संकल्प क्या होता है.



