शारदीय नवरात्रि 2026: मां दुर्गा को भूलकर भी न चढ़ाएं ये 5 चीजें, पूजा करते समय रखें इन नियमों का ध्यान

Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के दौरान पूजा सामग्री की शुद्धता और सात्विकता का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी दल, कुछ विशेष फूल, बासी फल और तामसिक भोजन देवी को अर्पित करने से बचना चाहिए। जानिए नवरात्रि की पूजा में किन पांच चीजों का ध्यान रखना चाहिए और पूजा की थाली तैयार करते समय किन नियमों का पालन करना उचित है।
Author: www.navabharat.news
UPDATED: Mon, 12 Oct 2026 09:35 AM
शारदीय नवरात्रि 2026: मां दुर्गा को भूलकर भी न चढ़ाएं ये 5 चीजें, पूजा करते समय रखें इन नियमों का ध्यान
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शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दौरान भक्त नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। श्रद्धालु व्रत रखते हैं, देवी मंत्रों का जाप करते हैं और माता को फूल, फल, मिठाई सहित विभिन्न प्रकार के सात्विक पकवानों का भोग लगाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।

नवरात्रि की पूजा में जहां स्वच्छता और भक्ति को महत्वपूर्ण माना जाता है, वहीं कुछ वस्तुओं को देवी को अर्पित करने से बचने की परंपरा भी प्रचलित है। हालांकि, पूजा के नियम अलग-अलग क्षेत्रों, देवी के स्वरूपों और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार बदल सकते हैं। आइए जानते हैं कि नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा करते समय किन पांच बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

1. मां दुर्गा को तुलसी दल अर्पित करने से बचें

हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यंत पवित्र माना जाता है। भगवान विष्णु की पूजा और उनसे संबंधित धार्मिक अनुष्ठानों में तुलसी दल का विशेष महत्व है। हालांकि, मां दुर्गा की सामान्य पूजा में तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा प्रचलित नहीं है। कुछ धार्मिक मान्यताओं में देवी के विशेष स्वरूपों की पूजा के दौरान तुलसी के प्रयोग से परहेज करने की सलाह दी जाती है।

इसलिए नवरात्रि में माता को भोग लगाते समय अपने परिवार की परंपरा और पूजा-विधि के अनुसार सामग्री का चयन करें। देवी को अर्पित करने के लिए ताजे फूल, फल और निर्धारित पूजन सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।

2. धतूरा और आक के फूल चढ़ाने से पहले परंपरा जानें

धतूरा और आक यानी मदार के फूल भगवान शिव की पूजा से विशेष रूप से जुड़े माने जाते हैं। मां दुर्गा की पूजा में इनका प्रयोग सामान्य रूप से प्रमुख नहीं है। इसके बजाय देवी को लाल गुड़हल सहित विभिन्न ताजे फूल अर्पित करने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है।

नवरात्रि में पूजा की थाली सजाते समय स्वच्छ और ताजे फूलों को प्राथमिकता दें। यदि आपके घर में किसी विशेष देवी स्वरूप की पूजा के लिए अलग नियम बताए गए हैं, तो उसी परंपरा का पालन करना उचित रहेगा।

3. कनेर और केतकी के फूलों के इस्तेमाल में रखें सावधानी

धार्मिक परंपराओं में अलग-अलग देवी-देवताओं को अलग प्रकार के पुष्प अर्पित करने की मान्यता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा की पूजा में कनेर और केतकी के फूलों का इस्तेमाल करने से बचा जाता है। देवी की पूजा में लाल गुड़हल और अन्य ताजे फूलों को विशेष महत्व दिया जाता है।

पूजा के लिए फूल चुनते समय उनकी ताजगी और स्वच्छता का ध्यान रखें। फूल मुरझाए हुए या गंदे नहीं होने चाहिए। साथ ही, अपने पूजा-पाठ की परंपरा के अनुसार ही पुष्प अर्पित करें, क्योंकि सभी क्षेत्रों में फूलों से जुड़े नियम एक जैसे नहीं होते।

4. बासी, कटे-सड़े या खराब फल न चढ़ाएं

नवरात्रि की पूजा में भोग की शुद्धता को महत्वपूर्ण माना जाता है। मां दुर्गा को अर्पित किए जाने वाले फल साफ और ताजे होने चाहिए। सड़े-गले, खराब या गंदे फलों को भोग में शामिल करने से बचना चाहिए। इसी तरह, जमीन पर गिरे हुए या दूषित फल अर्पित करने के बजाय अच्छी गुणवत्ता वाले फल चुनें।

पूजा से पहले भोग की सामग्री अच्छी तरह जांच लें। फलों को साफ पानी से धोकर पूजा की थाली में रखें और भोग तैयार करते समय स्वच्छ बर्तनों का इस्तेमाल करें। इन बातों से पूजा की व्यवस्था साफ-सुथरी बनी रहती है।

5. देवी को तामसिक भोजन का भोग न लगाएं

नवरात्रि में सात्विकता और संयम का विशेष महत्व माना जाता है। पारंपरिक पूजा-पद्धतियों में मां दुर्गा को सात्विक भोजन अर्पित करने की मान्यता है। इसलिए कई परिवारों में प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक माने जाने वाले खाद्य पदार्थों से बने व्यंजनों को भोग में शामिल नहीं किया जाता।

इसके स्थान पर फल, मिठाई, हलवा, खीर और अन्य सात्विक पकवान अर्पित किए जाते हैं। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार फलाहार भी करते हैं। भोग बनाते समय सामग्री की शुद्धता, रसोई की सफाई और श्रद्धा का ध्यान रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

नवरात्रि 2026 कब से शुरू होगी?

पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से हो रही है। इसी दिन घटस्थापना के साथ नौ दिनों तक चलने वाले देवी आराधना पर्व का शुभारंभ माना जाएगा। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, घटस्थापना का शुभ समय सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा।

बताए गए मुहूर्त का पालन करने से पहले अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग और सूर्योदय के समय की पुष्टि कर लें, क्योंकि स्थान के अनुसार पूजा के समय में अंतर हो सकता है।

नवरात्रि की पूजा करते समय इन बातों का भी रखें ध्यान

  • पूजा स्थल और पूजन सामग्री को साफ-सुथरा रखें।
  • माता को अर्पित किए जाने वाले फूल और फल ताजे व स्वच्छ हों।
  • भोग तैयार करते समय सात्विकता और स्वच्छता का ध्यान रखें।
  • पूजा के दौरान श्रद्धा, संयम और शांति बनाए रखें।
  • अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा-विधि अपनाएं।

शारदीय नवरात्रि मां दुर्गा की आराधना, भक्ति और आत्मसंयम का पर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में सात्विक भोजन, ताजे फूलों और स्वच्छ भोग सामग्री का विशेष महत्व है। तुलसी दल, कुछ विशेष फूलों और तामसिक भोजन के इस्तेमाल से जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकती हैं। इसलिए पूजा करते समय अपने घर की परंपरा और संबंधित पूजा-विधि का ध्यान रखें। सबसे महत्वपूर्ण है कि मां दुर्गा की आराधना श्रद्धा, स्वच्छता और सच्चे मन से की जाए।

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। पूजा-विधि और पूजन सामग्री से जुड़े नियम क्षेत्र तथा परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं। किसी भी मान्यता को सार्वभौमिक नियम न मानें।

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