शिकोहपुर भूमि सौदा मामला : ईडी ने वाद्रा और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया

नयी दिल्ली. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरियाणा के शिकोहपुर में एक जमीन सौदे में कथित अनियमितता से जुड़े धन शोधन के एक मामले में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा के कारोबारी पति रॉबर्ट वाद्रा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है. आधिकारिक सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी.

सूत्रों ने बताया कि यह पहली बार है जब किसी जांच एजेंसी ने 56 वर्षीय वाद्रा के खिलाफ आपराधिक मामले में अभियोजन शिकायत (आरोप पत्र) दाखिल की है. सूत्रों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि संघीय जांच एजेंसी ने वाद्रा और स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड जैसी उनकी अन्य संबंधित संस्थाओं से संबंधित 37.64 करोड़ रुपये मूल्य की 43 अचल संपत्तियां भी कुर्क की हैं. उन्होंने बताया कि एजेंसी ने बुधवार को पीएमएलए के तहत एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया. सूत्रों ने बताया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत आरोप पत्र यहां राउज एवेन्यू अदालत में पेश किया गया.

सूत्रों ने बताया कि आरोप पत्र में वाद्रा, उनसे जुड़ी स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी, सत्यानंद याजी और केवल सिंह विर्क, उनकी कंपनी ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड और कुछ अन्य सहित कुल 11 संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है.
अदालत ने अभी तक अभियोजन पक्ष की शिकायत पर संज्ञान नहीं लिया है. वाद्रा ने किसी भी कानून या नियम का उल्लंघन करने से इनकार किया है. उनका कहना है कि यह मामला उनके और उनके परिवार (जिनमें लोकसभा में मौजूदा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी शामिल हैं) के खिलाफ ”राजनीतिक प्रतिशोध” से प्रेरित है. ईडी ने आरोपपत्र में दावा किया है कि वाद्रा पर धनशोधन का आरोप है .

साथ ही उसने कुर्क की गई संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है. वाद्रा के खिलाफ धन शोधन का मामला गुरुग्राम पुलिस द्वारा सितंबर, 2018 में दर्ज की गई एक प्राथमिकी पर आधारित है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि वाद्रा ने अपनी कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से 12 फरवरी 2008 को ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड से 7.5 करोड़ रुपये में ‘झूठी’ घोषणा के माध्यम से फर्जीवाड़ा कर सेक्टर 83 (गुरुग्राम) के शिकोहपुर गांव में स्थित 3.53 एकड़ जमीन की खरीद की.

एजेंसी का आरोप है कि वाद्रा ने अपने ”व्यक्तिगत प्रभाव” के जरिए उक्त भूमि पर वाणिज्यिक लाइसेंस भी प्राप्त किया. उस समय हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा नीत कांग्रेस की सरकार थी. चार साल बाद, सितंबर 2012 में, कंपनी ने यह जमीन रियल्टी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दी.

यह भूमि सौदा अक्टूबर 2012 में विवादों में घिर गया जब भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी और तत्कालीन भूमि चकबंदी और भूमि अभिलेख महानिदेशक-सह-पंजीकरण महानिरीक्षक अशोक खेमका ने इस सौदे को राज्य चकबंदी अधिनियम और कुछ संबंधित प्रक्रियाओं का उल्लंघन बताते हुए दाखिल खारिज रद्द कर दिया. ईडी वाद्रा के खिलाफ दो अन्य मामलों में जांच कर रही है, जिनमें हथियार सलाहकार संजय भंडारी के खिलाफ मामला और दूसरा, राजस्थान के बीकानेर में एक भूमि सौदे से जुड़ा मामला शामिल है.

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