सिब्बल ने ‘कई ट्रेन से भाजपा कार्यकर्ताओं को बिहार ले जाए जाने’ के दावे को दोहराया

नयी दिल्ली. राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने सोमवार को 6,000 लोगो को ले जाने के लिए तीन नवंबर को हरियाणा से बिहार के लिए चलाई गई चार विशेष ट्रेन को लेकर रेल मंत्रालय पर सवाल उठाए. सिब्बल ने कहा कि उनके स्पष्टीकरण ने उनकी पोल खोल दी है और दावा किया कि ये ट्रेन ‘भाजपा कार्यकर्ताओं से भरी’ थीं.

सिब्बल के नए दावों पर रेलवे की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. हालांकि, रविवार को मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि वह इस त्योहारी सीजन में 12,000 विशेष ट्रेन चला रहा है – जिनमें 10,700 अनुसूचित हैं और लगभग 2,000 अनिर्धारित हैं. मंत्रालय ने कहा, ”हम तीन स्तरों, मंडल, क्षेत्रीय और रेलवे बोर्ड स्तर पर ‘वॉर रूम’ संचालित कर रहे हैं. जब भी किसी स्टेशन पर यात्रियों की अचानक भीड़ होती है, हम तुरंत अनिर्धारित विशेष ट्रेन चला देते हैं.” भाजपा पर निशाना साधते हुए सिब्बल ने सोमवार को कहा कि एक राजनीतिक दल बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर इतना ‘घबराया हुआ’ है कि उसने राज्य में अपनी चुनावी किस्मत चमकाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाने का फैसला किया.

यह टिप्पणी सांसद सिब्बल और राजद के ए डी सिंह द्वारा लगाए गए उस आरोप के एक दिन बाद आई जिसमें कहा गया है कि तीन नवंबर को हरियाणा से बिहार के लिए चार विशेष ट्रेन चलाई गईं जिनमें 6,000 लोग सवार थे. सिंह ने रेल मंत्री से विधानसभा चुनाव के दौरान इन ट्रेन के संचालन का उद्देश्य स्पष्ट करने और यह बताने के लिए कहा कि भुगतान किसने किया. बिहार विधानसभा चुनाव में पहले चरण का मतदान छह नवंबर को हुआ था और दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होना है.  मतगणना 14 नवंबर को होगी.

रेलवे के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाने के लिए सोमवार को एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सिब्बल ने आरोप लगाया कि ये ट्रेन ‘भाजपा समर्थकों’ को लाने-ले जाने के लिए चलाई जा रही हैं. उन्होंने एक वीडियो भी दिखाया जिसमें कथित तौर पर तीन नवंबर को बिहार जाने वाली एक ‘विशेष’ ट्रेन में यात्रा करते हुए कुछ लोग भाजपा का ‘पटका’ (स्कॉर्फ) पहने हुए दिखाई दे रहे हैं.

निर्दलीय राज्यसभा सदस्य ने कहा, ”एक बात तो साफ है कि ये भाजपा के लोग हैं और ये कह रहे हैं कि भाजपा ने पैसे दिए. यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन है. जहां ये सभी लोग वोट देते हैं, वहां चुनाव रद्द किया जा सकता है.” सिब्बल ने कहा, ”कल जब मैंने प्रेस वार्ता की थी, तो मैंने आपको बताया था कि तीन नवंबर को सुबह 10 बजे, 11 बजे, दोपहर तीन बजे और शाम चार बजे चार ट्रेन बिहार के लिए रवाना की गईं. इनमें लगभग 6,000 यात्री सवार थे. मैंने कहा कि यह भाजपा के इशारे पर किया गया, जो मेरा आरोप था. मैंने यह भी कहा कि रेल मंत्री (अश्विनी वैष्णव) के जवाब देने की संभावना कम ही है, और वास्तव में उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.”

उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे ने एक तरह का स्पष्टीकरण जारी किया है जो ‘झूठा’ है. उन्होंने कहा, ”रेलवे द्वारा इस तरह के स्पष्टीकरण जारी करना दुर्भाग्यपूर्ण है, जिससे उनकी पोल और खुल जाती है.” रेलवे के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाते हुए सिब्बल ने कहा कि उसने त्योहारों के मौसम में विशेष ट्रेन चलाने की बात कही थी, लेकिन वह मौसम छठ के साथ खत्म हो गया था और ये ट्रेन तीन नवंबर को चलाई गईं.

उन्होंने कहा, ”रेलवे ने दो नवंबर की रात 9:14 बजे एक परिपत्र (सर्कुलर) जारी किया, जिसमें तीन नवंबर को अतिरिक्त भीड़ को कम करने के लिए चार अनारक्षित विशेष ट्रेन चलाने की घोषणा की गई. उन्हें कैसे पता था कि अतिरिक्त भीड़ होगी? क्या 29 अक्टूबर, 30 अक्टूबर, 31 अक्टूबर या एक नवंबर, दो नवंबर को भीड़ थी… वे लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं.” उन्होंने दावा किया कि ये ट्रेन करनाल के भाजपा कार्यकर्ताओं से भरी थीं. सिब्बल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह यात्रियों को ले जाने के लिए सार्वजनिक संपत्ति का इस्तेमाल कर रही है जिसका भुगतान पार्टी द्वारा किया गया. उन्होंने कहा कि यह एक भ्रष्ट आचरण है. सिब्बल ने कहा, ”मुझे नहीं लगता कि सरकार कुछ करेगी, मुझे नहीं लगता कि रेल मंत्री कुछ करेंगे, या भाजपा कुछ करेगी. लेकिन मैं चाहता हूं कि लोग समझें कि इस चुनाव में उनके जनादेश को कैसे दूषित करने की कोशिश की जा रही है.”

अंतिम मतदान प्रतिशत के वक्त लैंगिक मतदान अनुपात बताया जाता है: तेजस्वी के आरोपों पर निर्वाचन आयोग

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव द्वारा बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के पुरुष-महिला मतदान आंकड़े “प्रकट न करने” को लेकर निर्वाचन आयोग की आलोचना के बीच, अधिकारियों ने सोमवार को स्पष्ट किया कि लैंगिक (जेंडर के अनुसार) मतदान अनुपात आमतौर पर अंतिम मतदान प्रतिशत जारी किए जाने के समय बताया जाता है.

अधिकारियों ने कहा कि मतदान में पुरुष और महिला मतदाताओं का अनुपात सामान्यत: अंतिम मतदान के समय ही जारी किया जाता है. मतदान का पहला चरण छह नवंबर को संपन्न हुआ था, जबकि दूसरा चरण मंगलवार को होगा. आयोग के अनुसार, पहले चरण में लगभग 65.08 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मत डाले. पटना में आयोजित संवाददाता सममेलन में यादव ने दावा किया कि विपक्षी गठबंधन ”मत चोरी या किसी भी प्रकार की बेईमानी” को बर्दाश्त नहीं करेगा.

उन्होंने दावा किया, ”निर्वाचन आयोग ने छह नवंबर को मतदान करने वाले मतदाताओं का लैंगिक आंकड़ा अब तक नहीं जारी किया है, जबकि विधानसभा चुनाव के पहले चरण के चार दिन बीत चुके हैं. ऐसा पहली बार हो रहा है. पहले इसे तुरंत जारी किया जाता था.” यादव ने यह भी दावा किया कि बिहार में चुनाव ड्यूटी के लिए सुरक्षा र्किमयों की कुल 208 कंपनियों की तैनाती भाजपा शासित राज्यों से की गई है.

उन्होंने पूछा, ” भाजपा शासित राज्यों से सुरक्षाकर्मी क्यों तैनात किए गए हैं? हम उन पर कड़ी नजर रख रहे हैं. करीब 68 प्रतिशत पुलिस पर्यवेक्षक भाजपा शासित राज्यों से हैं. ऐसा क्यों है?” आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने कहा कि तैनात किए गए लगभग 80 प्रतिशत पुलिस बल केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) से हैं और केवल लगभग 20 प्रतिशत पुलिस बल राज्य सशस्त्र पुलिस (एसएपी) से तैनात हैं, जिन्हें उनकी उपलब्धता के अनुसार विभिन्न राज्यों से आनुपातिक रूप से लिया जाता है.

झारखंड, तेलंगाना, केरल, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक सहित 24 विभिन्न राज्यों से पर्यवेक्षकों को लिया गया है. उन्होंने बताया कि सभी राज्यों से आनुपातिक रूप से पर्यवेक्षकों को तैनात किया गया है, चाहे संबंधित राज्य में सत्तारू­ढ़ दल कोई भी हो. उन्होंने यह भी बताया कि सभी ”स्ट्रांग रूम” में सीसीटीवी काम कर रहे हैं और जहां भी कोई खराबी सामने आई है, उसे तुरंत ठीक कर दिया गया है.

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