
कोलकाता. पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में शामिल बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) ने सोमवार को काम के कथित अत्यधिक दबाव के विरोध में प्रदर्शन के दौरान यहां सीईओ कार्यालय में घुसने का प्रयास किया और पुलिसर्किमयों के साथ हाथापाई की. एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी.
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने सोमवार को कहा कि यदि निर्वाचन आयोग “वास्तव में स्वतंत्र” है, तो उसे बूथ स्तर के अधिकारियों की सुरक्षा करनी चाहिए, मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए और विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के बारे में पारदर्शी होना चाहिए.
बीएलओ अधिकार रक्षा समिति के सदस्यों ने उत्तरी कोलकाता के कॉलेज स्क्वायर से जुलूस निकाला, जिसमें ताले और बेड़ियां लेकर प्रतीकात्मक रूप से उस भवन के मुख्य द्वार को बंद किया गया, जिसमें मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) का कार्यालय स्थित है.
शाम को उस समय नाटकीय घटनाक्रम शुरू हो गया जब दस सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल, जिसमें चार बीएलओ और छह शिक्षक या राज्य सरकार के कर्मचारी शामिल थे, अपनी शिकायतें दर्ज कराने सीईओ मनोज अग्रवाल के कार्यालय में दाखिल हुआ. सीईओ की अनुपस्थिति में, उनके अधीनस्थ ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और उनका ज्ञापन स्वीकार किया.
हालांकि, जब प्रतिनिधिमंडल वहां से जा रहा था, तो एक सदस्य ने आरोप लगाया कि रैली में भाग लेने के कारण उसे धमकी भरा संदेश मिला, जिसके बाद समूह ने कार्यालय के अंदर अचानक धरना शुरू कर दिया. हंगामे के बीच, कोलकाता पुलिस के जवानों और सीईओ कार्यालय के सुरक्षा कर्मचारियों ने प्रदर्शनकारियों को उठाकर परिसर से बाहर निकाल दिया.
इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने मध्य कोलकाता स्थित सीईओ कार्यालय में घुसने के लिए पुलिस अवरोधक तोड़ने की कोशिश की. प्रदर्शनकारी बीएलओ ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि उन्हें जुलूस निकालने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि “निर्वाचन आयोग ने एसआईआर कवायद के दौरान अत्यधिक और अमानवीय कार्य दबाव की उनकी शिकायतों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.” एक पदाधिकारी ने दावा किया, “बीएलओ को कम समय में कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है, हालांकि इसी कार्य में आमतौर पर दो साल से अधिक समय लगता है.” समिति ने यह भी आरोप लगाया कि बीएलओ बीमार पड़ रहे हैं और उनमें से दो ने तनाव के कारण आत्महत्या कर ली.
समिति ने पूर्व में कहा था कि पारा-शिक्षक, कॉलेज प्रोफेसर और विभिन्न संगठनों के शिक्षक इस प्रदर्शन में समर्थन के लिए शामिल होंगे, जिससे निर्वाचन आयोग पर तत्काल हस्तक्षेप के लिये दबाव डाला जा सके. एसआईआर के तहत घर-घर जाकर गणना का कार्य चार नवंबर को शुरू हुआ और यह चार दिसंबर तक जारी रहेगा, तथा मसौदा नामावलियां नौ दिसंबर को प्रकाशित की जाएंगी. समिति ने चेतावनी दी कि यदि समय-सीमा नहीं बढ़ाई गई या सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो वह निरंतर विरोध कार्यक्रम शुरू करेगी.
इस बीच, एक अन्य संगठन, बीएलओ ओइक्या मंच ने गणना प्रपत्रों के डिजिटलीकरण से संबंधित मुद्दों को अलग से उठाया और अतिरिक्त सहायक कर्मचारियों की मांग की. निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि दोनों बीएलओ संगठनों की मांगें सीईओ कार्यालय को प्राप्त हो गई हैं, लेकिन उन्होंने उनके आंदोलन पर कोई टिप्पणी नहीं की.
‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, टीएमसी के राज्यसभा सदस्य गोखले ने कहा कि हालांकि पार्टी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में नहीं है, लेकिन वह पश्चिम बंगाल में इस अभ्यास को “जल्दबाजी, अव्यवस्थित और अपारदर्शी तरीके” से किए जाने का कड़ा विरोध करती है. गोखले ने कहा, “क्या एसआईआर करने के लिए क्रूरता जरूरी है? बंगाल और पूरे भारत में, एसआईआर का काम करने वाले बीएलओ या तो थककर मर रहे हैं या आत्महत्या कर रहे हैं. जिस प्रक्रिया के लिए कुछ महीने का समय दिया जाना चाहिए, उसे जल्दबाजी में 30 दिनों में पूरा किया जा रहा है.”



