
नयी दिल्ली/श्रीनगर. जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और दिल्ली सीमा पर हिरासत में लिये गए अन्य लोगों ने मंगलवार को उन पुलिस थानों पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया जहां उन्हें रखा गया है. इन लोगों को उस समय हिरासत में लिया गया जब वे लद्दाख के लिए छठी अनुसूची में दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर राजधानी की ओर मार्च कर रहे थे.
वांगचुक, एक महीने पहले लेह से शुरू हुई ‘दिल्ली चलो पदयात्रा’ का नेतृत्व कर रहे है. उन्हें और लद्दाख के लगभग 120 अन्य लोगों को सोमवार रात हिरासत में लिया गया. पदयात्रा का आयोजन ‘लेह एपेक्स बॉडी’ द्वारा किया गया था, जो ‘करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस’ के साथ मिलकर पिछले चार साल से लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा दिए जाने और इसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने, लद्दाख के लिए लोक सेवा आयोग के साथ ही शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और लेह एवं करगिल जिलों के लिए अलग लोकसभा सीटों की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रही है.
पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, वांगचुक और उनके साथ आए लोगों को निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के लिए दिल्ली सीमा पर हिरासत में लिया गया और उन्हें बवाना, नरेला औद्योगिक क्षेत्र और अलीपुर सहित विभिन्न पुलिस थानों में ले जाया गया. अधिकारी ने कहा, ”हमने उन्हें वापस जाने के लिए समझाने की कोशिश की क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 163 (जो पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाती है) लागू है, लेकिन वे अड़े रहे.” उन्होंने कहा कि वे अभी भी हिरासत में हैं.
समूह के एक प्रतिनिधि ने दावा किया कि वांगचुक को बवाना पुलिस थाने ले जाया गया और उन्हें उनके अधिवक्ताओं से मिलने नहीं दिया जा रहा है. प्रतिनिधि ने बताया कि कार्यकर्ता और अन्य लोगों ने उन पुलिस थानों में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है, जहां उन्हें रखा गया है. प्रतिनिधि ने दावा किया कि वांगचुक और समूह के अन्य सदस्यों ने आधिकारिक अनुमति मांगी थी और यहां तक ??कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ईमेल भी किया था, लेकिन उस जानकारी का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए किया गया.
विरोध-प्रदर्शन का मौलिक अधिकार छीन लिया गया : महबूबा मुफ्ती
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और लद्दाख के कई अन्य लोगों को हिरासत में लेने को लेकर केंद्र पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि लोगों से विरोध करने का मौलिक अधिकार भी छीन लिया गया है. महबूबा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”हमारी पहचान और संसाधनों पर हमले के खिलाफ विरोध करने का मौलिक अधिकार भी हमसे छीन लिया गया है. हम लद्दाख के लोगों के साथ एकजुटता से खड़े हैं.”
आतिशी को वांगचुक से मिलने से रोके जाने पर बवाना में आप कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन
दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को बवाना थाने में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मिलने से रोके जाने के बाद आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं ने उपराज्यपाल वी के सक्सेना के खिलाफ प्रदर्शन किया. आतिशी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया, ”मैं सोनम वांगचुक जी और लद्दाख के 150 भाई-बहनों से मिलने बवाना थाने पहुंची थी. दिल्ली पुलिस ने मुझे उनसे मिलने नहीं दिया. हमें बताया गया कि उपराज्यपाल ने फोन करके मुझे उनसे न मिलने देने का आदेश दिया है. यह तानाशाही ठीक नहीं है.” उन्होंने कहा कि वांगचुक और लद्दाख के लोग भी उपराज्यपाल के शासन के खिलाफ लड़ रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा, ”दिल्ली के लोग लद्दाख के लोगों के साथ खड़े हैं. लद्दाख में उपराज्यपाल का शासन समाप्त होना चाहिए. साथ ही, दिल्ली में भी उपराज्यपाल का शासन समाप्त होना चाहिए. लद्दाख और दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना चाहिए.”
वांगचुक की हिरासत के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर, तीन अक्टूबर को हो सकती है सुनवाई
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और कई अन्य को दिल्ली की सीमा पर हिरासत में लिये जाने के खिलाफ मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गयी. याचिकाकर्ताओं के वकील ने मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ के समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का उल्लेख किया गया, जिसके बाद अदालत ने मामले को तीन अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया.
अदालत ने इस याचिका के उचित होने पर इसे उसी दिन सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की तथा कहा कि उसने हिरासत से संबंधित एक अन्य याचिका को सूचीबद्ध करने के अनुरोध को पहले ही स्वीकार कर लिया है. बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका किसी लापता या अवैध रूप से हिरासत में लिये गए व्यक्ति को पेश करने के निर्देश का अनुरोध करते हुए दायर की जाती है.
दो अन्य रिट याचिकाओं में भी दिल्ली पुलिस के उस आदेश की आलोचना की गई है, जिसमें 30 सितंबर से पांच अक्टूबर तक सीमा सहित राजधानी के विभिन्न हिस्सों में पांच या अधिक ‘अनधिकृत’ लोगों के एकत्र होने तथा विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाई गई है.
एक याचिका सामाजिक कार्यकर्ता आजाद ने दायर की है, जिन्होंने कहा कि वह वांगचुक और ‘लेह एपेक्स बॉडी’ के साथ मिलकर काम करते हैं. दूसरी याचिका इस निकाय के कानूनी सलाहकार वकील मुस्तफा हाजी ने दायर की है.
मुख्य न्यायाधीश की पीठ के भोजनावकाश के लिए उठने से पहले वकील विक्रम हेगड़े ने हाजी की याचिका का उनके समक्ष उल्लेख किया. अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए आज ही सूचीबद्ध करने से इनकार करते हुए तीन अक्टूबर को अपराह्न 3.30 बजे तक कार्य स्थिति व्यवस्थित होने पर इन याचिकाओं की सुनवाई पर सहमति जताई. दो याचिकाओं में हिरासत में लिये गए लोगों को रिहा करने का निर्देश देने तथा समूह को अपनी चिंताएं उठाने के लिए दिल्ली में शांतिपूर्ण तरीके से प्रवेश करने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया है.
वांगचुक समेत लद्दाख के करीब 120 लोगों को पुलिस ने लद्दाख के लिए छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांग को लेकर राजधानी की ओर मार्च करते समय दिल्ली सीमा पर कथित तौर पर हिरासत में लिया गया है. वांगचुक, एक महीने पहले लेह से शुरू हुई ‘दिल्ली चलो पदयात्रा’ का नेतृत्व कर रहे हैं.
पदयात्रा का आयोजन ‘लेह एपेक्स बॉडी’ द्वारा किया गया है, जो पिछले चार साल से ‘करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस’ के साथ मिलकर लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने और इसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने, लद्दाख के लिए लोक सेवा आयोग के साथ ही शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और लेह एवं करगिल जिलों के लिए अलग लोकसभा सीट की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रही है.
खरगे, राहुल ने सोनम वांगचुक को हिरासत मे लिए जाने को ‘कार्यरतापूर्ण और अस्वीकार्य’ कार्रवाई बताया
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक तथा कई अन्य लद्दाख वासियों को हिरासत में लिया जाना ‘कार्यरतापूर्ण, अलोकतांत्रिक और अस्वीकार्य” कार्रवाई है. खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”सत्ता के नशे में चूर मोदी सरकार ने लद्दाख से शांतिपूर्वक दिल्ली मार्च कर रहे नागरिकों के एक समूह को हिरासत में ले लिया है. यह और कुछ नहीं बल्कि एक कायरतापूर्ण कार्रवाई है तथा पूरी तरह से अलोकतांत्रिक प्रकृति की है.” उन्होंने कहा, ”लद्दाख में संविधान की छठी अनुसूची के तहत आदिवासी समुदायों की सुरक्षा के लिए व्यापक आह्वान के साथ, जन समर्थन की लहर बढ. रही है. इसके बजाय, मोदी सरकार अपने करीबी मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिए लद्दाख के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र का दोहन करना चाहती है.” खरगे का कहना है कि यह घटना हमें बताती है कि मोदी सरकार की निरंकुशता के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है.
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लद्दाख की आवाज सुननी होगी. उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ”पर्यावरण और संवैधानिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्वक मार्च कर रहे सोनम वांगचुक जी और लद्दाख के सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया जाना अस्वीकार्य है.” पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी पूछा कि लद्दाख के भविष्य के लिए आवाज उठाने वाले बुजुर्ग नागरिकों को दिल्ली की सीमा पर आखिर हिरासत में क्यों लिया गया.
सोनम वांगचुक की हिरासत पर कांग्रेस की निंदा को भाजपा ने उसके पाखंड की पराकाष्ठा बताया
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और कई अन्य लद्दाखियों को हिरासत में लिए जाने की कांग्रेस द्वारा की गयी निंदा को ‘पाखंड की पराकाष्ठा’ करार दिया. कांग्रेस की इस प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर ने कहा, ”मुझे तथ्य नहीं पता. मुझे तथ्यों की जांच करनी होगी.”
प्रसाद ने कहा, ”अगर राहुल गांधी को कोई टिप्पणी करनी है तो वह कोलकाता में कार्टूनिस्टों को उठा लिए जाने और तमिलनाडु में एक व्यंग्यकार को जेल भेजे जाने पर चुप्पी क्यों साध लेते हैं?” उन्होंने कहा कि वांगचुक को हिरासत में लिए जाने पर कांग्रेस नेता की प्रतिक्रिया ‘पाखंड की पराकाष्ठा’ है.
जादवपुर विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर और उनके पड़ोसी को 2012 में पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक कार्टून सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए गिरफ्तार किया गया था. साल 2017 में तमिलनाडु में एक स्वतंत्र कार्टूनिस्ट को तत्कालीन मुख्यमंत्री के पलनीस्वामी को गलत तरीके से चित्रित करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.



