सोरेन सरकार ने भाजपा विधायको के बहिर्गमन के बीच विश्वास मत जीता

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Mon, 05 Sep 2022 08:23 PM
सोरेन सरकार ने भाजपा विधायको के बहिर्गमन के बीच विश्वास मत जीता
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रांची. झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने सोमवार को विधानसभा में आसानी से विश्वास मत हासिल कर लिया और इसी के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाली सरकार को गिराने के लिए विधायकों को लुभाए जाने की आशंका के बावजूद आदिवासी नेता सोरेन को राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिली.

कुल 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 48 विधायकों ने मतदान किया, जिनमें झामुमो के 29, कांग्रेस के 15 और राष्ट्रीय जनता दल (राजद), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) एवं भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन का एक-एक विधायक और एक निर्दलीय विधायक शामिल था. इस दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने सदन से बहिर्गमन किया.

सोरेन ने एक दिवसीय विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा , ‘‘जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें नहीं हैं, वह (भाजपा) वहां लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है’’ और इसी कारण विश्वास मत हासिल करने की जरूरत महसूस हुई.

उन्होंने कहा, ‘‘मीडिया के 25 अगस्त को यह खबर देने के बाद से राज्य में अनिश्चितता थी कि ईसीआई (भारत निर्वाचन आयोग) ने (लाभ का पद रखने के मामले में विधायक के तौर पर सोरेन को अयोग्य ठहराए जाने का अनुरोध करने वाली भाजपा की याचिका पर) राज्यपाल को अपनी सिफारिश भेज दी है.’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘संप्रग (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे (राज्यपाल से) मिलकर इस मामले संबंधी अटकलों को विराम लगाने को कहा.

उन्होंने उन्हें भरोसा दिलाया कि दो-तीन दिन में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. इसके बाद वह पिछले दरवाजे से दिल्ली गए.’’ सोरेन पर राज्यपाल को दी गई निर्वाचन आयोग की कथित सलाह के आधार पर अयोग्य ठहराए जाने का खतरा अब भी है. विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा उसके विधायकों को लुभाने की कोशिश किए जाने की आशंका के कारण झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन के विधायकों को कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ में ले जाया गया था.

बहरहाल, ंिचतित सोरेन ने अनिश्चितता की स्थिति के बीच अपने समक्ष चुनौतियों का सामना करने का फैसला किया और विश्वास प्रस्ताव पेश किया तथा विधायकों को रविवार रात झारखंड लाया गया. केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड के राजनीति विज्ञान एवं लोक प्रशासन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर आलोक गुप्ता ने कहा, ‘‘सोरेन की सरकार के इस कदम ने लोगों को एक स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकार का गठन करने वाले दल एकजुट हैं और संख्या में हेराफेरी कर सरकार गिराने की कोई भी कोशिश उचित नहीं है.’’ विश्लेषकों का मानना है कि प्रस्ताव के पारित होने से सोरेन को राजनीतिक रूप से मजबूत होने में मदद मिलेगी. विश्लेषक लाभ के पद के मामले में राज्यपाल द्वारा कार्रवाई में देरी किए जाने को भी सोरेन के पक्ष में मान रहे हैं. उनका मानना है कि एक लोकप्रिय आदिवासी मुख्यमंत्री को हटाने का राजनीतिक नुकसान भाजपा के लिए नकारात्मक असर डाल सकता है.

सोरेन ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए दंगे भड़का कर देश में ‘गृह युद्ध’ जैसे हालात पैदा करने की कोशिश कर रही है. संवेदनशील संथाल परगना क्षेत्र के दुमका में दो लड़कियों के कथित बलात्कार और उनकी हत्या के कारण सोरेन सरकार को सोमवार को ‘बंद’ और विरोध का सामना करना पड़ा.

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमारी सरकार के सामने जिस प्रकार बाधाएं पेश की जा रही हैं, वह बात किसी से छिपी नहीं है. हमारे तीन विधायक बंगाल में हैं. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने झारखंड के विधायकों को खरीदने की कोशिश की.’’ पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में बड़ी नकद राशि ले जा रहे कांग्रेस के तीन विधायकों को गिरफ्तार किया गया था. ऐसा आरोप है कि यह राशि अन्य विधायकों को ‘‘खरीदने’’ के लिए ले जाई जा रही थी.

सोरेन ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी एक आदिवासी महिला को देश की राष्ट्रपति बनाने के बाद अब एक आदिवासी मुख्यमंत्री से सत्ता छीनने की कोशिश कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘लोग बाजार में सामान खरीदते हैं, लेकिन भाजपा विधायकों को खरीदती है.’’ उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में संप्रग भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को करारा जवाब देगा. झामुमो विधायक सुदिव्या कुमार ने सत्र के दौरान ‘हेमंत है तो विश्वास है’ का नारा लगाया.

इस बीच, विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार पर तंज कसते हुए कहा, ‘‘न तो राज्यपाल और न ही विपक्ष ने विश्वास मत की कवायद कराने के लिए कहा था.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने इसलिए प्रस्ताव पेश किया, क्योंकि वह देश को दिखाना चाहते थे कि जिन विधायकों पर उन्हें खुद भरोसा नहीं है, वे उनकी सरकार के साथ हैं.’’ मरांडी ने कहा, ‘‘पूरे देश ने देखा कि किस तरह से विशेष उड़ान से विधायकों को रायपुर ले जाया गया. रांची आने के बाद उन्हें अपने आवास में नहीं रहने दिया गया और एक र्सिकट हाउस में रखा गया. वे आज सुबह भी बस में बैठाकर विधानसभा लाए गए. यह इस बात का पर्याप्त सबूत है कि सोरेन को अपने विधायकों पर कोई भरोसा नहीं है.’’

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