स्वाति मालीवाल मारपीट मामला : अदालत ने बिभव कुमार की जमानत याचिका खारिज की

जमानत याचिका खारिज होने के बाद उच्च न्यायालय का रुख करेंगे केजरीवाल के करीबी बिभव कुमार: आप

नयी दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी बिभव कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी, जिन पर मुख्यमंत्री आवास पर आम आदमी पार्टी की सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट करने का आरोप है. मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट गौरव गोयल ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुख्यमंत्री के निजी सहायक कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी. मामले में विस्तृत आदेश का इंतजार है.

सुनवाई के दौरान, राज्यसभा सदस्य मालीवाल ने अदालत से कहा कि अगर कुमार को रिहा किया गया, तो उनकी जान को खतरा है और उनके परिवार को ”गंभीर खतरा” है. मालीवाल ने दावा किया कि घटना के बारे में एक यूट्यूबर द्वारा ”एकतरफा वीडियो” बनाया गया था, जिसके बाद उन्हें धमकियां मिलनी शुरू हो गईं. तेरह मई को घटना के दिन से मुख्यमंत्री आवास के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें से एक में मालीवाल को सुरक्षार्किमयों के साथ बहस करते हुए देखा जा सकता है, जबकि दूसरे में वह सिविल लाइंस में मुख्यमंत्री आवास से बाहर निकलती दिखाई देती हैं.

मालीवाल के वकील ने कहा कि कुमार के जेल में होने के बावजूद आप सांसद को धमकियां मिल रही हैं. उन्होंने कुमार के निर्दोष होने पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कुमार ने अपना फोन फॉर्मेट कर दिया था और घटना की सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दी थी.
अतिरिक्त लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि मालीवाल ने मुख्यमंत्री आवास में जबरन प्रवेश नहीं किया था. उन्होंने कहा कि अपनी सेवाएं समाप्त होने के बावजूद कुमार एक ”प्रभावशाली” व्यक्ति हैं.

कुमार के वकील ने जमानत का अनुरोध करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल जमानत पाने की ”तीन शर्तें” पूरी करते हैं, क्योंकि उनके फरार होने का खतरा नहीं है, न ही सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने की संभावना है. कुमार के वकील ने दावा किया कि पुलिस के साथ सहयोग करने के बावजूद उनके मुवक्किल को गिरफ्तार कर लिया गया. वकील ने कहा कि मामले में प्राथमिकी तीन दिन की देरी के बाद ”सोच समझकर” दर्ज की गई थी. कुमार को शनिवार को चार दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था और मंगलवार को उन्हें अदालत में पेश किए जाने की संभावना है.

जमानत याचिका खारिज होने के बाद उच्च न्यायालय का रुख करेंगे केजरीवाल के करीबी बिभव कुमार: आप

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी बिभव कुमार स्वाति मालीवाल ‘हमला’ मामले में शहर की एक अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब उच्च न्यायालय का रुख करेंगे. आम आदमी पार्टी (आप) ने सोमवार को यह जानकारी दी. दिल्ली की एक अदालत ने 13 मई को मुख्यमंत्री आवास पर ‘आप’ की राज्यसभा सदस्य मालीवाल पर हमले के मामले में आरोपी कुमार की जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी.

‘आप’ ने एक बयान में कहा, “कुमार निचली अदालत के निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख करेंगे.” मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गौरव गोयल ने अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद केजरीवाल के निजी सहायक कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी. अदालत के विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा की जा रही है.

केजरीवाल के आवास पर मालीवाल के पहुंचने के बाद बिभव को बुलाया गया: राष्ट्रीय महिला आयोग

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू)ने दावा किया है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पूर्व सहयोगी बिभव कुमार को स्वाति मालीवाल के मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचने के बाद वहां बुलाया गया था. आयोग ने इस बाबत ब्योरा मांगा है कि आम आदमी पार्टी (सांसद) स्वाति मालीवाल के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोपी बिभव को किसके निर्देश पर बुलाया गया था.

एनसीडब्ल्यू ने सोमवार को जारी विज्ञप्ति में कहा कि इससे पहले 13 मई, 2024 को जारी एक वक्तव्य में उसने एक मीडिया पोस्ट का स्वत: संज्ञान लिया था कि ‘दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने अरविंद केजरीवाल के निजी सचिव पर अपने साथ मारपीट करने का आरोप लगाया’.

खबर के मुताबिक दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष मालीवाल ने आरोप लगाया कि कुमार ने उन पर हमला किया था. एनसीडब्ल्यू ने खुलासा किया है कि मालीवाल के मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचने के बाद कुमार को वहां बुलाया गया था. जिन परिस्थितियों में और जिस किसी के निर्देश पर कुमार को बुलाया गया था, उसे स्पष्ट करने के लिए एनसीडब्ल्यू ने मुख्यमंत्री सहित सभी शामिल व्यक्तियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच करने के लिए कहा है.

एनसीडब्ल्यू ने सीडीआर की जांच करने की आवश्यकता पर बल दिया है ताकि यह पता चल सके कि कुमार को मुख्यमंत्री के आवास पर उपस्थित होने का निर्देश किसने दिया था. इसके अलावा एनसीडब्ल्यू ने उन व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर जोर दिया है जो मालीवाल को बलात्कार और हत्या करने की धमकियां दे रहे हैं. एनसीडब्ल्यू ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने और तीन दिन के अंदर की गई कार्रवाई की व्यापक रिपोर्ट देने के लिए कहा है.

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