
नयी दिल्ली/गुवाहाटी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने से महज कुछ दिन पहले रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि निस्वार्थ सेवा की भावना और अनुशासन का पाठ ही संघ की असली ताकत है और इसके स्वयंसेवकों के प्रत्येक कार्य में ‘राष्ट्र प्रथम’ को प्राथमिकता दी जाती है.
मोदी ने अपने मासिक ‘मन की बात’ संबोधन में कहा कि केशव बलिराम हेडगेवार ने देश को बौद्धिक गुलामी से मुक्त कराने के लिए 1925 में विजयादशमी के दिन आरएसएस की स्थापना की थी और तब से इसकी यात्रा जितनी प्रेरणादायक है उतनी ही उल्लेखनीय और अभूतपूर्व भी रही है.
खुद आरएसएस के प्रचारक रहे मोदी ने हेडगेवार के उत्तराधिकारी एम एस गोलवलकर की भी प्रशंसा की और कहा कि उनका यह कथन कि “यह मेरा नहीं है, यह राष्ट्र का है” लोगों को स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए प्रेरित करता है. उन्होंने कहा, “गुरुजी गोलवलकर के इस कथन ने लाखों स्वयंसेवकों को त्याग और सेवा का मार्ग दिखाया है. त्याग, सेवा और इससे मिलने वाला अनुशासन ही संघ की वास्तविक ताकत है. आज सौ वर्षों से भी अधिक समय से आरएसएस राष्ट्र सेवा में निरंतर जुटा हुआ है.” हाल ही में कुछ मौकों पर प्रधानमंत्री ने संगठन की उदारतापूर्वक प्रशंसा की है. इससे पहले उन्होंने इस साल स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में संगठन की सराहना की थी, इसके अलावा 11 सितंबर को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के जन्मदिन पर उनके नेतृत्व को सराहा था.
अगले सप्ताह विजयादशमी पर आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो जाएंगे. संगठन को सत्तारूढ़ भाजपा की वैचारिक संस्था माना जाता है. मोदी ने कहा कि जब संघ की स्थापना हुई थी, तब देश सदियों से गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था और देश के स्वाभिमान व आत्मविश्वास को गहरी चोट पहुंची थी. उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यता को पहचान के संकट से जूझना पड़ रहा था.
मोदी ने कहा, “हमारे देशवासी हीन भावना का शिकार हो रहे थे. इसलिए देश की आजादी के साथ-साथ यह भी जरूरी था कि यह बौद्धिक गुलामी से मुक्त हो.” उन्होंने कहा कि देश में कहीं भी प्राकृतिक आपदा आने पर आरएसएस के स्वयंसेवक सबसे पहले पहुंचते हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा, “लाखों स्वयंसेवकों के हर कार्य और हर प्रयास में “राष्ट्र प्रथम” की भावना सदैव सर्वोपरि रहती है.” मोदी ने ‘मन की बात’ के 126वें संस्करण में एक बार फिर स्वदेशी पर जोर देते हुए लोगों से दो अक्टूबर को गांधी जयंती पर खादी की कोई वस्तु खरीदने का आग्रह किया.
उन्होंने कहा, “वोकल फोर लोकल को खरीदारी का मंत्र बना दीजिए. ठान लीजिए, हमेशा के लिए, जो देश में तैयार हुआ है, वही खरीदेंगे. जिसे देश के लोगों ने बनाया है, वही घर ले जाएंगे. जिसमें देश के किसी नागरिक की मेहनत है, उसी सामान का उपयोग करेंगे.
उन्होंने कहा, “जब हम ऐसा करते हैं, तो हम सिर्फ कोई सामान नहीं खरीदते, हम किसी परिवार की उम्मीदों को जगाते हैं, किसी कारीगर की मेहनत को सम्मान देते हैं, किसी युवा उद्यमी के सपनों को पंख देते हैं.” मोदी ने यह भी कहा कि सरकार छठ पर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल कराने के लिए काम कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार के इसी तरह के प्रयासों के कारण, कोलकाता की दुर्गा पूजा भी इस यूनेस्को सूची का हिस्सा बन गई है.
प्रधानमंत्री ने नाविका सागर परिक्रमा के दौरान अदम्य साहस और अडिग संकल्प का उदाहरण पेश करने वालीं नौसेना की महिला अधिकारियों – लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा से भी बात की. उन्होंने उनके प्रयासों की सराहना की और कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रही हैं. आगामी गांधी जयंती (दो अक्टूबर) का उल्लेख करते हुए, मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से आजादी के बाद भारत में खादी के प्रति आकर्षण कम हो गया.
उन्होंने कहा, ”हालांकि, पिछले 11 वर्षों में, खादी के प्रति आकर्षण में उल्लेखनीय रूप से बढ़ोतरी हुई है और इसकी बिक्री लगातार बढ़ रही है. मैं आपसे दो अक्टूबर को खादी उत्पाद खरीदने का आग्रह करता हूं. ” प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह और प्रख्यात गायिका लता मंगेशकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी.
उन्होंने कहा, “अमर शहीद भगत सिंह हर भारतीय, खासकर देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं.” लता मंगेशकर के योगदान की सराहना करते हुए मोदी ने कहा कि उन्होंने देशभक्ति के गीत गाए हैं जिनसे लोगों को बहुत प्रेरणा मिली है. रेडियो प्रसारण के दौरान मंगेशकर का गाया गीत ‘ज्योति कलश छलके’ भी बजाया गया. रामायण के रचयिता और विशेष रूप से दलितों के बीच पूजनीय संत वाल्मीकि की जयंती सात अक्टूबर से पहले मोदी ने कहा कि अयोध्या में राम के मंदिर के साथ-साथ निषादराज और मर्हिष वाल्मीकि को सर्मिपत मंदिर भी बनाए गए हैं.
उन्होंने कहा, ”रामायण का यह प्रभाव मंदिर में निहित भगवान राम के आदर्शों और मूल्यों के कारण है. भगवान राम ने सेवा, सद्भाव और करुणा की भावना से सभी को गले लगाया. इसलिए हमें लगता है कि मर्हिष वाल्मीकि की रामायण के राम माता शबरी और निषादराज के साथ ही पूर्ण हैं.” उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जब वे राम मंदिर जाएं तो इन मंदिरों के भी दर्शन करें. मोदी ने इस दौरान असम के प्रसिद्ध गायक जुबिन गर्ग को भी श्रद्धांजलि दी. उन्होंने प्रसिद्ध कन्नड़ लेखक एस.एल. भैरप्पा को भी श्रद्धांजलि दी.
‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने भूपेन हजारिका और जुबिन को दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को महान गायक भूपेन हजारिका को श्रद्धांजलि अर्पित की और इस बात पर जोर दिया कि कैसे उनके गीतों ने विभिन्न देशों को जोड़ने का काम किया. उन्होंने गायक जुबिन गर्ग (जिनकी हाल ही में सिंगापुर में डूबने से मृत्यु हो गई थी) को भी याद किया और उन्हें असम के सबसे चमकते सितारों में से एक बताया.
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि गर्ग का संगीत आने वाली पीढि.यों को भी प्रेरित करेगा. मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के दौरान असम के इन दो संगीत सितारों का जिक्र किया और कार्यक्रम के दौरान हजारिका के एक प्रसिद्ध गीत के तमिल और सिंहली संस्करण बजाए गए.
मोदी ने दोनों भाषाओं में गीत का एक अंश बजाने के बाद कहा, ”दोस्तों, ये ध्वनियां इस बात की गवाह हैं कि कैसे भूपेन हजारिका के गीत दुनिया भर के विभिन्न देशों को जोड़ते हैं.” उन्होंने कहा कि श्रीलंका में हजारिका के प्रतिष्ठित गीत ‘मनुहे-मनुहार बाबे’ का सिंहली और तमिल में अनुवाद करना एक बहुत ही सराहनीय प्रयास था.
उन्होंने कहा, ”मैंने इन्हीं गीतों का ऑडियो बजाया. कुछ दिन पहले, मुझे असम में हजारिका के जन्मशताब्दी समारोह में भाग लेने का सौभाग्य मिला. यह वास्तव में एक यादगार अवसर था.” मोदी ने कहा, ”साथियों, असम में भूपेन हजारिका की जन्मशती के उत्सव के बीच, कुछ दिन पहले एक दुखद क्षण भी आया. लोग ज़ुबिन गर्ग के असामयिक निधन पर शोक व्यक्त कर रहे हैं.” उन्होंने कहा कि प्रसिद्ध गायक गर्ग ने पूरे देश में अपनी पहचान बनाई.
मोदी ने कहा, ”गर्ग का असमिया संस्कृति से गहरा नाता था. जुबिन गर्ग हमेशा हमारी स्मृतियों में अंकित रहेंगे और उनका संगीत आने वाली पीढि.यों को मंत्रमुग्ध करता रहेगा.” प्रधानमंत्री ने असमिया भाषा में कहा कि गर्ग असम की सांस्कृतिक विरासत का एक चमकता हुआ रत्न थे और वे हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे. सिंगापुर में 19 सितंबर को 52 वर्षीय जुबिन गर्ग की समुद्र में डूबने से मौत हो गई थी.
सरकार छठ पूजा को यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने के लिए प्रयासरत: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि सरकार छठ महापर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने के लिए प्रयासरत है और जब ऐसा होगा तो दुनिया के हर कोने में लोग इस त्योहार की भव्यता और दिव्यता का अनुभव कर सकेंगे. अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में मोदी ने यह भी बताया कि कुछ समय पहले सरकार के इसी तरह के प्रयासों के कारण कोलकाता की दुर्गा पूजा भी यूनेस्को की सूची का हिस्सा बन गई थी.
उन्होंने कहा, “हमारे त्योहार और उत्सव भारत की संस्कृति को जीवित रखते हैं. छठ पूजा दिवाली के बाद आने वाला एक पवित्र त्योहार है. सूर्य देव को सर्मिपत यह भव्य त्योहार बहुत खास है.” प्रधानमंत्री ने कहा, “इसमें हम डूबते सूर्य को भी अर्घ्य देते हैं और उसकी पूजा करते हैं. छठ न केवल देश के विभिन्न हिस्सों में मनाया जाता है, बल्कि इसकी भव्यता पूरी दुनिया में देखी जाती है. अब यह एक वैश्विक त्योहार बनता जा रहा है.” मोदी ने कहा, “मुझे आपको यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि भारत सरकार भी छठ पूजा से जुड़े एक बड़े प्रयास में लगी हुई है. भारत सरकार छठ महापर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने के लिए प्रयासरत है.” उन्होंने कहा कि जब छठ पूजा को यूनेस्को की सूची में शामिल किया जाएगा तो दुनिया के हर कोने में लोग इसकी भव्यता और दिव्यता का अनुभव कर सकेंगे.
मोदी ने कहा, “कुछ समय पहले, भारत सरकार के ऐसे ही प्रयासों के कारण, कोलकाता की दुर्गा पूजा भी यूनेस्को की इस सूची का हिस्सा बन गई. अगर हम अपने सांस्कृतिक आयोजनों को ऐसी वैश्विक मान्यता देंगे, तो दुनिया भी उनके बारे में जानेगी, उन्हें समझेगी और उनमें भाग लेने के लिए आगे आएगी.” दिवाली के कुछ दिन बाद छठ मनाया जाता है. इस त्योहार के दौरान, श्रद्धालु डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और अपने परिवार और बच्चों के लिए आशीर्वाद और समृद्धि की कामना करते हैं. यह बिहार के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है.



