दुनिया इस समय इतिहास की हथियारों की सबसे विनाशकारी दौड़ में शामिल: जेलेंस्की

भारत 'हमारे साथ ही है' : यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की

संयुक्त राष्ट्र/वाशिंगटन. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बुधवार को विश्व के नेताओं से कहा कि दुनिया इस समय ”इतिहास की हथियारों की सबसे विनाशकारी दौड़ में शामिल” है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का आह्वान किया कि रूस के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए. जेलेंस्की ने कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने युद्ध का विस्तार यूरोप में करना चाहते हैं. जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा, ”हम अब इतिहास में हथियारों की सबसे विनाशकारी दौड़ में शामिल हैं.

यूक्रेन तो केवल पहला देश है और अब रूसी ड्रोन पूरे यूरोप में उड़ान भर रहे हैं, और रूसी अभियान पहले से ही विभिन्न देशों में फैल रहे हैं, और पुतिन इस युद्ध का विस्तार करके इसे जारी रखना चाहते हैं.” जेलेंस्की की यह टिप्पणी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से उनकी मुलाकात के एक दिन बाद आई है, जिन्होंने यूक्रेन के प्रयासों का समर्थन किया और रूस की आलोचना की. ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि उनका मानना है कि यूक्रेन रूस के कब्जे में गए सभी क्षेत्रों को वापस पा सकता है.

भारत ‘हमारे साथ ही है’ : यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि भारत “हमारे साथ ही है” और उम्मीद जताई कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप से नयी दिल्ली का रूसी ऊर्जा क्षेत्र के प्रति रवैया बदलेगा. जेलेंस्की ‘फॉक्स न्यूज’ के साथ एक साक्षात्कार के दौरान यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध में चीन और भारत की भूमिका के बारे में पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे रहे थे. अमेरिका अक्सर भारत और चीन पर रूसी हथियार खरीदने का आरोप लगाता रहा है, जिसके बारे में राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि यह हथियार यूक्रेन के खिलाफ मास्को के युद्ध में उसे धन मुहैया कराते हैं.

जेलेंस्की ने कहा, “मुझे लगता है कि भारत मुख्य रूप से हमारे साथ है. हां, हमारे पास ऊर्जा को लेकर कुछ सवाल हैं, लेकिन मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप यूरोपीय (देशों) के साथ मिलकर इसे प्रबंधित कर सकते हैं तथा भारत के साथ अधिक मजबूत और करीबी संबंध बना सकते हैं.” यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा, “और मुझे लगता है कि हमें हर संभव प्रयास करना चाहिए ताकि भारतीयों को पैर पीछे नहीं खींचने पड़े और वे रूसी ऊर्जा क्षेत्र के प्रति अपना रुख बदलेंगे.” वह फॉक्स न्यूज के एक साक्षात्कारकर्ता के एक विशिष्ट प्रश्न का उत्तर दे रहे थे: “चीन, भारत, ये सभी इसमें योगदान दे रहे हैं; राष्ट्रपति ने कहा कि यूरोपीय देशों को तेल से दूर होने की जरूरत है, लेकिन उन्हें अमेरिका के साथ ऐसा करना होगा. क्या आपको लगता है कि ऐसा होने वाला है?”

जेलेंस्की ने कहा, “मुझे यकीन है कि चीन के साथ यह ज्यादा मुश्किल होगा क्योंकि यह आज के लिए नहीं है. रूस का समर्थन न करना (चीन के) हित में नहीं है.” उन्होंने यह भी कहा, “मुझे लगता है कि ईरान कभी भी हमारे पक्ष में नहीं होगा….” संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपने संबोधन में जेलेंस्की ने कहा: “चीन यहां है – एक शक्तिशाली राष्ट्र जिस पर रूस अब पूरी तरह से निर्भर है.” जेलेंस्की ने कहा, “अगर चीन सचमुच इस युद्ध को रोकना चाहता है, तो वह मास्को पर आक्रमण रोकने के लिए दबाव डाल सकता है. चीन के बिना, पुतिन का रूस कुछ भी नहीं है. फिर भी, अक्सर चीन शांति के लिए सक्रिय होने के बजाय, खामोश और दूर ही रहता है.” भारत यह कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित और बाजार की गतिशीलता से प्रेरित है. फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद पश्चिमी देशों द्वारा मास्को पर प्रतिबंध लगाने और उसकी आपूर्ति बंद करने के बाद, भारत ने छूट पर बेचे जाने वाले रूसी तेल की खरीद शुरू कर दी.

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