कोई ‘लहर’ नहीं है, प्रधानमंत्री की भाषा में केवल ‘जहर’ है : जयराम रमेश

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 14 May 2024 07:23 PM
कोई ‘लहर’ नहीं है, प्रधानमंत्री की भाषा में केवल ‘जहर’ है : जयराम रमेश
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भुवनेश्वर/नयी दिल्ली. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पक्ष में कोई ‘लहर’ नहीं है, बल्कि उनकी भाषा में केवल ‘जहर’ है. कांग्रेस महासचिव रमेश ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ‘निवर्तमान’ प्रधानमंत्री की भाषा संकेत दे रही है कि वह ‘चिंतित और भ्रमित’ हैं.

उन्होंने कहा, ”उनको (प्रधानमंत्री को) अहसास हो गया है कि किसान, मजदूर, महिला और अन्य पिछड़ा वर्ग उनसे निराश हैं. इसलिए वह हिंदू-मुस्लिम, मुस्लिम लीग, कांग्रेस को टेम्पो में भरकर दिया गया कालाधन और ‘मंगलसूत्र’ की बात करने लगे हैं.” रमेश ने दावा किया, ”प्रधानमंत्री के पक्ष में जमीन पर कोई ‘लहर’नहीं है बल्कि उनकी भाषा में केवल ‘जहर’ है. इससे पता चलता कि बदलाव का समय आ गया है.” उन्होंने कहा कि पिछले चार चरण में 379 लोकसभा सीट के लिए चुनाव हो चुका है और यह स्पष्ट हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दक्षिण में ‘साफ’ हो गई है और उत्तर, पश्चिम और पूर्वी भारत में ‘हाफ’ है.’ कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि इस चुनाव में विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को बहुमत मिलेगा.

उन्होंने कहा कि इस चुनाव में कांग्रेस संविधान और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई लड़ रही है, क्योंकि ‘धनतंत्र’ देश में हावी हो गया है.
कांग्रेस नेता ने कहा कि ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) और केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. उन्होंने कहा कि दोनों दल लोकसभा और ओडिशा विधानसभा में ‘नकली लड़ाई’ लड़ रहे है.

रमेश ने कहा, ”प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री नूरा-कुश्ती कर रहे हैं. हालांकि, वास्तविकता यह है कि बीजद ने पिछले 10 साल में संसद में भाजपा का समर्थन किया है.” उन्होंने कहा कि बीजद सांसदों ने ‘किसान विरोधी, आदिवासी विरोधी और पर्यावरण विरोधी’ विधेयकों का संसद के दोनों सदनों में समर्थन किया और यहां तक ओडिशा की सत्तारूढ़ पार्टी ने भाजपा प्रत्याशी अश्विनी वैष्णव को राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने में भी मदद की.

रमेश ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर निशाना साधते हुए कहा, ”क्या आपने दिल्ली में भाजपा का शत प्रतिशत समर्थन नहीं किया? क्या यह सच नहीं है कि बीजद ने वन अधिकार अधिनियम को कमजोर करने वाले विधेयक, वन संरक्षण अधिनियम में संशोधन, भूमि अधिग्रहण अधिनियम और श्रम संहिता का समर्थन किया था? ” कांग्रेस नेता ने कहा, ”बीजद और भाजपा में कोई अंतर नहीं है और ओडिशा में कांग्रेस एकमात्र विकल्प है जो भाजपा-बीजद ‘गठबंधन’ के खिलाफ लड़ रही है.भाजपा को मत देना बीजद को मत देने और बीजद को मत देना भाजपा के समर्थन में मतदान करने के समान है.”

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मोदी के शासन में उड़िया भाषा के विकास के लिए एक रुपये भी खर्च नहीं किया गया जबकि संस्कृत के लिए 650 करोड़ रुपये आवंटित किए. उन्होंने कहा कि इसके विपरीत मनमोहन सिंह सरकार के दौरान उड़िया सहित छह भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया. जाति आधारित जनगणना की वकालत करते हुए रमेश ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े समुदायों को उचित आरक्षण देने के लिए यह कवायद जरूरी है. उन्होंने पटनायक से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या वह इसके समर्थन में हैं.

देश की 99 प्रतिशत आबादी को लाभ पहुंचाने वाली नीतियों को ‘रेवड़ी’ बताती है मोदी सरकार: कांग्रेस

कांग्रेस ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की एक टिप्पणी को लेकर उन पर पलटवार करते हुए मंगलवार को कहा कि देश की 99 प्रतिशत आबादी को लाभ पहुंचाने वाली नीतियों को ‘रेवड़ी’ बताना मोदी सरकार की आदत है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि केंद्र में ‘इंडिया’ गठबंधन सरकार बनने पर पार्टी की ओर से घोषित योजनाओं का उचित ढंग से क्रियान्वयन किया जाएगा.

भाजपा नेता और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को आम चुनावों के दौरान कांग्रेस को उसकी विभिन्न योजनाओं की घोषणाओं को लेकर आड़े हाथ लिया था. उन्होंने कहा कि क्या कांग्रेस को गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की महिलाओं को सालाना एक लाख रुपये देने समेत सामाजिक कल्याण योजनाओं को लागू करने की लागत के बारे में पता भी है? सीतारमण ने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के राजकोषीय प्रबंधन (विशेषकर कर्ज को लेकर) के बारे में हाल के दिनों में बहुत कुछ कहा गया है.

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के ऐतिहासिक न्याय पत्र घोषणापत्र की व्यवहार्यता पर सवाल उठाया है और इसके व्यावहारिक प्रस्तावों को ऐसे ”बड़े वादे” के रूप में र्विणत किया है जो वित्तीय रूप से महंगा साबित सकता है. इस बात पर ध्यान न दें कि पिछले दो दशकों में जीडीपी वृद्धि, निवेश और रोजगार सृजन राजग की तुलना में संप्रग सरकार के तहत अधिक थे. संप्रग ने अपना कार्यकाल मोदी सरकार की तुलना में कम राजकोषीय घाटे और राष्ट्रीय ऋण (जीडीपी के प्रतिशत के रूप में) के साथ समाप्त किया.” उनका कहना था, ”यह वही डराने वाली बात थी जो भाजपा ने 2004 में असफल रूप से की थी, जिसके बाद संप्रग ने सत्ता संभाली और भारत का अब तक का सबसे अच्छा आर्थिक प्रदर्शन रहा. वह भी 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बावजूद, जो 1930 के दशक के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा झटका था. राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि जब हम वित्तीय मंदी के दौरान काम कर रहे थे तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह प्राथमिक साझेदार थे.”

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