‘यूसीसी और एक देश-एक चुनाव होगा अगला मिशन’, भाजपा स्थापना दिवस पर पीएम मोदी ने बताया आगे का प्लान

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भाजपा के स्थापना दिवस पर पार्टी कार्यकर्ताओं के समर्पण और बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने आपातकाल और कांग्रेस के शासनकाल के दमन से लेकर पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में राजनीतिक हिंसा तक हर तरह की कठिनाइयों का सामना किया है, ताकि पार्टी को मजबूत किया जा सके और राष्ट्र की सेवा की जा सके।

समान नागरिक संहिता और एक देश-एक चुनाव पर रहेगा फोकस
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ”देश जानता है, हर चुनौती का सामना करने के लिए भाजपा ईमानदारी से कोशिश कर रही है, आगे भी करेगी। पहले भी सकारात्मक नतीजे मिले हैं और आगे भी मिलेंगे।”

पीएम मोदी ने कहा, ”अंग्रेजों के दौर के सैकड़ों काले कानूनों का अंत, लोकतंत्र के लिए नए संसद भवन का निर्माण, सामान्य समाज के गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण, कानून बनाकर तीन तलाक पर रोक, सीएए, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण ऐसे कितने ही काम हैं, जो भाजपा के ईमानदार प्रयासों का नतीजा हैं।” उन्होंने कहा कि हमारा मिशन अभी भी जारी है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता और एक देश-एक चुनाव ऐसे सभी विषयों पर आज देश में एक गंभीर चर्चा हो रही है।

कई कार्यकर्ताओं ने किया जीवन बलिदान
उन्होंने कहा, “भाजपा के कार्यकर्ता जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने में कभी पीछे नहीं हटते। उन्हें दृढ़ विश्वास था कि वे जो कड़ी मेहनत कर रहे हैं, उससे भारत का भविष्य बेहतर होगा। यही कारण है कि कार्यकर्ताओं ने हर कठिनाई झेली, चाहे वह आपातकाल हो या कांग्रेस के शासन का दमन। कई कार्यकर्ताओं ने तो अपना जीवन भी बलिदान कर दिया। हमने पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में देखा है, जहां हिंसा को एक राजनीतिक संस्कृति बना दिया गया है।”

राजनीतिक संघर्ष के शुरुआती साल
प्रधानमंत्री ने राजनीतिक संघर्ष के शुरुआती वर्षों को याद करते हुए कहा, “हम 1984 का वह समय नहीं भूल सकते जब कांग्रेस ने रिकॉर्ड संख्या में सीटें जीती थीं, लेकिन भारत ने यह भी देखा कि उन्होंने लोगों को कैसे धोखा दिया। इससे लोगों का विश्वास भाजपा में बढ़ा और धीरे-धीरे हमने सीटें जीतना शुरू किया।”

विचारधाराओं का अंतर
उन्होंने भारत के राजनीतिक परिदृश्य को आकार देने वाले वैचारिक अंतर पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “उस समय दो विचारधाराएं अस्तित्व में आईं। एक सत्ता-संचालित राजनीति थी, और दूसरी सेवा-संचालित राजनीति।”

आरएसएस से प्रेरणा
इसके साथ ही पीएम मोदी ने भाजपा द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से प्राप्त प्रेरणा पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “आरएसएस के विशाल और पवित्र बरगद के पेड़ के नीचे, हमें शुद्ध इरादों और ईमानदारी के साथ राजनीति में कदम रखने की प्रेरणा मिली। शुरुआती कुछ दशकों में हमने संगठन के लिए नीतियां बनाने में अपनी ऊर्जा समर्पित की। फिर वह समय आया जब भाजपा ने खुद को एक मजबूत कैडर-आधारित पार्टी के रूप में बनाने में पूरी तरह से झोंक दिया।”

उन्होंने कहा, “हमने कार्यकर्ताओं का एक ऐसा विशाल कैडर बनाया जो सेवा की भावना से काम करने के लिए समर्पित था, जिसने पार्टी के सिद्धांतों को अपने जीवन का आदर्श बनाया। जिसने किसी भी परिस्थिति में अपने मूल्यों से कभी समझौता नहीं किया।”

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